Wednesday, 6 October 2021

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वॉशिंगटन/नई दिल्‍ली अमेरिका के साथ गहराते रिश्‍ते के बीच बाइडन प्रशासन ने एक बार फिर से भारत को रूसी रक्षा प्रणाली एस-400 को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। अमेरिका ने कहा कि एस-400 खतरनाक है और किसी भी देश के सुरक्षा हित में नहीं है। भारत के दौरे पर आई अमेरिका की उप विदेश मंत्री वेंडी शर्मन ने भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ बातचीत के बाद यह चेतावनी दी। वेंडी शर्मन ने भारत पर CAATSA प्रतिबंध लगने की आशंका को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, 'जो भी देश एस-400 को इस्‍तेमाल करना चाहता है, उसे लेकर हम सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। हम समझते हैं कि यह खतरनाक है और किसी के भी हित में नहीं है।' इस चेतावनी के साथ अमेरिकी उप‍रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि हम आशा करते हैं कि भारत के साथ CAATSA का मुद्दा सुलझा लिया जाएगा। एस-400 मिलने पर क्‍या बोले भारतीय वायुसेना प्रमुख अमेरिकी उप विदेश मंत्री का बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत को आगामी नवंबर महीने में रूस से पहला अत्‍याधुनिक एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम मिलने जा रहा है। भारतीय वायुसेना के चीफ एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने मंगलवार को कहा था कि रूस में निर्मित यह अत्‍याधुनिक एयर डिफेंस सिस्‍टम इस साल के अंदर-अंदर भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया जाएगा। भारतीय वायुसेना चीन के साथ बढ़ते खतरे को देखते हुए जल्‍द से जल्‍द एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम को अपने बेडे़ में शामिल करना चाहती है। भारत रूस से 5.4 अरब डॉलर में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम ले रहा है। चीन ने भी भारतीय सीमा के पास एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को ही तैनात कर रखा है। चीन के साथ तनाव बढ़ते ही भारत को इस सिस्‍टम की तत्‍काल और ज्‍यादा जरूरत आन पड़ी है। भारत रूस ही नहीं अमेरिका से भी बड़े पैमाने पर हथियार खरीद रहा है। इसमें अपाचे हेलिकॉप्‍टर, चिनूक और पी-8 आई निगरानी विमान शामिल हैं। हालांकि अभी भी भारत के 60 फीसदी हथियार रूसी हैं। क्‍वॉड और अन्‍य तरीकों से चीन के खिलाफ गठजोड़ में भारत के साथ खड़ा अमेरिका रूसी एयर डिफेंस सिस्‍टम का कड़ा विरोध कर रहा है। एस-400 सिस्‍टम से अमेरिका को सता रहा यह बड़ा डर अमेरिका चाहता है कि भारत एस-400 की जगह पर उसका एयर डिफेंस स‍िस्‍टम पेट्रियाट खरीदे। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी सिस्‍टम एस-400 के सामने कहीं नहीं ठहरता है। यही वजह है कि भारत ने अमेरिका को दो टूक बता दिया है कि वह इस सिस्‍टम को खरीदने से पीछे नहीं हटेगा और रूस के साथ अपनी डील पर आगे बढ़ेगा। भारत के इस रुख से अब अमेरिकी काट्सा प्रतिबंधों का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन रूस को अमेरिका का सबसे बड़ा शत्रु बता चुके हैं और वे तुर्की के एस-400 खरीदने का विरोध कर चुके हैं जो नाटो का सदस्‍य देश है। दरअसल, अमेरिका को डर है कि एस-400 के जरिए रूस अमेरिकी हथियारों से जुड़े राज जान सकता है। एमआईटी में राजनीति विज्ञान के प्रफेसर विपिन नारंग कहते हैं कि असलियत यह है कि नाटो सदस्‍य देश तुर्की भी अमेरिकी प्रतिबंधों से नहीं बच सका, इससे पता चलता है कि अमेरिका एस-400 को लेकर कितना चिंतित है। यह संभवत: केवल कूड़ा नहीं है। भारत का इस साल एस-400 लेने पर जोर बाइडेन प्रशासन को भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर मजबूर कर सकता है। भारत पर प्रतिबंध के मुद्दे पर अमेरिकी नेता दो फाड़ भारत पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर अमेरिकी सांसद दो फाड़ हो गए हैं। रिपब्लिकन पार्टी के नेता टोड यंग ने कहा है कि अगर भारत पर काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (CAATSA) के तहत प्रतिबंध लगाया जाता है तो यह रूस के लिए भूरणनीतिक जीत होगी। उधर, सीनेट की विदेश मामलों की समिति के डेमोक्रेटिक अध्यक्ष बॉब मेनेंडेज ने कहा है कि यदि भारत रूसी मिसाइल प्रणाली खरीदने की दिशा में आगे बढ़ता है तो उसे काट्सा की धारा 231 के तहत प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी जानी चाहिए। क्या है S-400 डिफेंस सिस्टम यह एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम है, जो दुश्मन के एयरक्राफ्ट को आसमान से गिरा सकता है। S-400 को रूस का सबसे अडवांस लॉन्ग रेंज सर्फेस-टु-एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। यह दुश्मन के क्रूज, एयरक्राफ्ट और बलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। यह सिस्टम रूस के ही S-300 का अपग्रेडेड वर्जन है। इस मिसाइल सिस्टम को अल्माज-आंते ने तैयार किया है, जो रूस में 2007 के बाद से ही सेवा में है। यह एक ही राउंड में 36 वार करने में सक्षम है।


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