Thursday, 2 December 2021

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रूसी सेना 50 साल पुराने टी-72 को आज भी मुख्य युद्धक टैंक (Main Battel Tank) के रूप में इस्तेमाल कर रही है। यूक्रेन के साथ जारी तनाव को देखते हुए रूस ने टी-72 टैंक की कई यूनिट को सीमा के नजदीक तैनात किया है। टी-72 टैंक को शीत युद्ध के दौरान तत्कालीन सोवियत संघ के इंजीनियरों ने बनाया था। इसटैंक को रूस के दुश्मनों खासकर अमेरिका के खिलाफ निर्णायक रूप से प्रहार के लिए बनाया गया था। टी-72 टैंक के 2000 से ज्यादा यूनिट आज भी रूसी सेना में तैनात हैं। इस टैंक के हजारों यूनिट रूसी सेना के गोदामों में भी पड़े हुए हैं। इनसे फिर से इस्तेमाल के लायक पूर्जों को निकालकर दूसरे टैंकों में इस्तेमाल किया जा रहा है। सोवियत संघ के विघटन से पहले टी-72 टैंक के 18000 से ज्यादा यूनिट का निर्माण किया गया था। वर्तमान में इस टैंक का अपग्रेडेड वर्जन टी-72बी3 (T-72B3 Tank) अभी कई देशों की सेनाओं में कार्यरत है।

T-72 Tank Russian Army: सोवियत संघ के विघटन से पहले टी-72 टैंक के 18000 से ज्यादा यूनिट का निर्माण किया गया था। वर्तमान में इस टैंक का अपग्रेडेड वर्जन टी-72बी3 (T-72B3 Tank) अभी कई देशों की सेनाओं में कार्यरत है।


T-72 Tank: टी-72 टैंक को 50 साल बाद भी रिटायर क्यों नहीं कर रहा रूस? भारतीय सेना भी करती है इस्तेमाल

रूसी सेना 50 साल पुराने टी-72 को आज भी मुख्य युद्धक टैंक (Main Battel Tank) के रूप में इस्तेमाल कर रही है। यूक्रेन के साथ जारी तनाव को देखते हुए रूस ने टी-72 टैंक की कई यूनिट को सीमा के नजदीक तैनात किया है। टी-72 टैंक को शीत युद्ध के दौरान तत्कालीन सोवियत संघ के इंजीनियरों ने बनाया था। इसटैंक को रूस के दुश्मनों खासकर अमेरिका के खिलाफ निर्णायक रूप से प्रहार के लिए बनाया गया था। टी-72 टैंक के 2000 से ज्यादा यूनिट आज भी रूसी सेना में तैनात हैं। इस टैंक के हजारों यूनिट रूसी सेना के गोदामों में भी पड़े हुए हैं। इनसे फिर से इस्तेमाल के लायक पूर्जों को निकालकर दूसरे टैंकों में इस्तेमाल किया जा रहा है। सोवियत संघ के विघटन से पहले टी-72 टैंक के 18000 से ज्यादा यूनिट का निर्माण किया गया था। वर्तमान में इस टैंक का अपग्रेडेड वर्जन टी-72बी3 (T-72B3 Tank) अभी कई देशों की सेनाओं में कार्यरत है।



भारत समेत 30 देशों के पास T-72 के अलग-अलग वैरियंट
भारत समेत 30 देशों के पास T-72 के अलग-अलग वैरियंट

रूस ने टी-72 टैंक के कई अलग-अलग अपग्रेड दुनिया के 30 से ज्यादा देशों को बेचे हैं। इनमें भारत भी शामिल है। रूस ने 1973 के बाद से टी-72 टैंक को दर्जनों बार अपग्रेड किया है। जिसके बाद इस टैंक के लेटेस्ट वर्जन को तीसरी पीढ़ी का बताया जाता है। सबसे आधुनिक T-72B3 टैंक को साल 2014 में रूसी सेना में शामिल किया गया था। इनमें से कुछ को यूक्रेन और सीरिया में जारी युद्ध के दौरान भी देखा गया था। टी-72 का सबसे नया वर्जन T-72B3 बेहद खतरनाक हथियारों के साथ लैस है। टी-72 में ऑटोलैडर के साथ नई 2A46M5 125mm स्मूथबोर मेन गन लगी हुई है। इसका ऑटोलैंडर किसी भी तरह की जमीन पर टैंक में ऑटोमेटिक गोले लोड कर सकता है। यही मेन गन टी-72 को दुनियाभर के कई मुख्य युद्धक टैंकों के बराबर बनाती है।



टी-72 टैंक के इन हथियारों से डरती है दुनिया
टी-72 टैंक के इन हथियारों से डरती है दुनिया

इस टैंक में दुश्मन के टैंकों को ट्रैक करने के लिए ऑटोमेटिक ट्रैकर, नई कलीना फायर कंट्रोल सिस्टम और बैलिस्टिक कंप्यूटर लगा हुआ है। इस टैंक में इम्प्रूव्ड थर्मल साइट के साथ लेजर रेंज फाइंडर भी लगा हुआ है। अपग्रेड करने के बाद टी-72 का नया वैरियंट नवीनतम विस्फोटकों को भी फायर करने में सक्षम है। इसका मेन गन कवच-भेदी गोले और हाई एक्सप्लोसिव राउंड को फायर कर सकता है। यह टैंक AT-11 या स्निपर एंटी टैंक मिसाइल भी लॉन्च कर सकता है। टी-72 टैंक के नए वर्जन में दुश्मनों के हमलों से बचने के लिए आर्मर को भी शक्तिशाली बनाया गया है। T-72B3 में आधुनिक Kontakt-5 एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर को लगाया गया है। रूस के आधुनिक टी-90ए टैंक पर भी यही आर्मर लगा हुआ है। यह आर्मर एंटी टैंक मिसाइलों और रॉकेट के हमलों से टैंक को बचाने में सक्षम है।



70 किमी प्रति घंटा की स्पीड से दौड़ सकता है यह टैंक
70 किमी प्रति घंटा की स्पीड से दौड़ सकता है यह टैंक

इसमें आधुनिक V-92S2F इंजन लगाया गया है। यह डीजल इंजन 1,100 हॉर्सपावर की ताकत पैदा कर सकता है। यह टैंक एक बार में 500 किलोमीटर की रेंज तक सफर कर सकता है। पक्की सड़कों पर टी-72 का आधुनिक वर्जन लगभग 70 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से सफर कर सकता है। इसमें नया स्टियरिंग सिस्टम भी लगा हुआ है, जिससे ड्राइवर की टैंक पर बेहतरीन पकड़ मिलती है।



भारत के पास 2000 से ज्यादा T-72 टैंक
भारत के पास 2000 से ज्यादा T-72 टैंक

T-72 को भारत में 'अजेय' कहा जाता है। यूरोप के बाहर भारत पहला ऐसा देश था जिसने रूस से टी-72 टैंक को खरीदा था। वर्तमान में भारत के पास टी-72 टैंक के तीन वैरियंट में करीब 2000 से अधिक यूनिट हैं। यह बेहद हल्‍का टैंक है जो 780 हॉर्सपावर जेनेरेट करता है। यह न्‍यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल हमलों से बचने के लिए भी बलाया गया है। यह 1970 के दशक में भारतीय सेना का हिस्‍सा बना था। 'अजेय' में 125 एमएम की गन लगी है। साथ ही इसमें फुल एक्‍सप्‍लोसिव रिऐक्टिव आर्मर भी दिया गया है।





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