बर्नइंसानों की तरह चीटियां भी एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। लेकिन सूचनाएं साझा करने के लिए वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करतीं बल्कि एक-दूसरे के मुंह में उल्टियां करती हैं। ज्यादातर कीड़ों में अग्रांत (foregut), मध्य आंत (midgut) और पश्चांत्र (hindgut) होता है। स्विट्जरलैंड में यूनिवर्सिटी ऑफ फ़्राइबर्ग के एड्रिया लेबोउफ़ का कहना है कि ज्यादातर 'सामाजिक कीड़े' फोरगुट को सामाजिक पेट की तरह इस्तेमाल करते हैं। नए अध्ययन के प्रमुख लेखक लेबोउफ ने कहा कि मिडगुट और हिंडगुट का काम खाने को पचाना है जबकि फोरगुट का शेयर करना है। ट्रोफैलेक्सिस या किसी दूसरे जीव के मुंह में खाने को डालना का काम ज्यादातर चीटीं जैसे सोशल जीव करते हैं। ट्रोफैलेक्सिस घटना के दौरान पोषक तत्व और प्रोटीन एक व्यक्ति से पेट से दूसरे के पेट में ट्रांसफर हो जाते हैं। इस तरह चीटियां एक सोशल सर्कुलेटरी सिस्टम बनाती हैं जो श्रृंखला के हर सदस्य को एक-दूसरे से जोड़ता है। एक कॉलोनी में दिख सकते हैं '20 ट्रोफैलेक्सिस इवेंट्स'कारपेंटर्स ऐंट (Camponotus) लगातार इन पोषक तत्वों को इस तरह से एक-दूसरे को पास करती रहती हैं। लाइव साइंस से बात करते हुए लेबोउफ ने कहा कि अगर आप एक कॉलोनी पर नजर डालें तो एक मिनट में आप '20 ट्रोफैलेक्सिस इवेंट्स' देख सकते हैं। चीटियों की एक कॉलोनी में कम से कम हजारों चीटियां हो सकती हैं। eLife जर्नल में 2016 की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए लेबोउफ ने कहा कि लगभग पांच साल पहले हमने इस तथ्य की खूबी बताते हुए एक पेपर प्रकाशित किया था। इसमें यह बताया गया था कि चीटियां सिर्फ बाहरी भोजन प्रकाशित नहीं करती हैं बल्कि वह ट्रोफैलेक्सिस करती हैं। खाने के अलावा भी शेयर करती हैं चीटियांरिसर्च में लिखा है कि चीटियां सिर्फ पोषक तत्वों का आदान-प्रदान नहीं कर रही हैं। वे हार्मोन और आरएनए जैसी कई अन्य चीजें भी पास कर रही हैं। भोजन या रास्तों की खोज के दौरान बड़े पैमाने पर यातायात नियंत्रण तकनीक के कारण उनके सामूहिक व्यवहार को सबसे प्रभावशाली माना जाता है। चींटियां एक वायरलेस फेरोमोन नेटवर्क का उपयोग करती हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई चींटी दूसरे से आगे न निकल जाए। इससे उन्हें अपने रास्ते में कभी भी ट्रैफिक जाम या एक-दूसरे से टक्कर की संभावना बिलकुल खत्म हो जाती है।
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