Thursday, 1 July 2021

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लंदन कभी अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA को अपनी माइंड-कंट्रोल पावर्स से हैरान कर देने वाले इल्यूजनिस्ट यूरी गेलर (Uri Geller) ने अब एक नया दावा किया है। उनका कहना है कि धरती कम से कम 50 साल से एलियन्स के संपर्क में है। यूरी को 1974 में मैरीलैंड स्थित NASA के बेस पर बुलाया गया था। CIA अधिकारी उनकी पावर्स से काफी प्रभावित थे। यूरी का कहना है कि तभी उन्हें एलियन्स की मौजूदगी पर विश्वास हुआ। यूरी गेलर को अपनी माइंड-कंट्रोल की ताकत के लिए जाना जाता रहा है। टेलिविजन पर बिना छुए चम्मच को मोड़ देने की उनकी परफॉर्मेंस के चलते उन्हें स्पून-बेंडर तक कहा जाता है। वह इल्यूजनिस्ट, जादूगर और टीवी पर्सनैलिटी भी हैं। वह खुद को साइकिक भी बताते हैं। वह कहते हैं कि इन ऐक्ट्स के लिए वह अपनी इच्छाशक्ति और मानसिक ताकत का इस्तेमाल करते हैं। UFO का टुकड़ा यूरी का कहना है कि इंजिनियर वर्नर वॉन ब्रॉन ने उन्हें एक सेफ में रखा मेटल का टुकड़ा दिखाया और बताया कि यह हमारे ग्रह का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक UFO (अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) का है जो धरती से टकराया। यूरी का कहना है कि उन्होंने वहां जो देखा उसने उनके होश उड़ा दिए लेकिन वह इसके बारे में ज्यादा डीटेल नहीं दे सकते क्योंकि उन्होंने इसके लिए एक दस्तावेज पर रजामंदी दी है। US टास्क फोर्स की रिपोर्ट कुछ वक्त पहले ही अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने UFOs पर गठित अपनी टास्क फोर्स की रिपोर्ट को देश की कांग्रेस के सामने रखा था। इसमें 2004 के बाद से धरती पर दिखे 144 यूएफओ या उड़न तश्तरियों के बारे में बताया गया है। यूं तो इस रिपोर्ट में इस बात का साफ-साफ दावा नहीं किया गया है कि इन उड़न तश्तरियों का संबंध दूसरे ग्रहों से आए एलियंस से है लेकिन ऐसी संभावना को पूरी तरह से खारिज भी नहीं किया है। अमेरिका की खुफिया यूनिट पेंटागन की UFO यूनिट के बारे में पहले दावा किया जा रहा था कि उसे भंग कर दिया गया है, लेकिन वह नेवी के सहयोग से खुफिया तरीके से चल रही थी। नेवी इंटिलिजेंस के तहत जारी इस प्रोग्राम को अनआइडेंटिफाइड एरियल फेनॉमेना टास्क फोर्स का नाम दिया गया था।


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ढाका बांग्लादेश के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया इलाज के लिए अगर विदेश जाना चाहती हैं तो उन्हें अपने गलत कामों को कबूल करना चाहिए और राष्ट्रपति से माफी मांगनी चाहिए। इससे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी के सदस्यों ने आरोप लगाया था कि सरकार राजनीतिक कारणों के चलते उन्हें बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए देश से बाहर जाने से रोक रही है। बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग समिति ने पिछले हफ्ते मांग की थी कि सरकार 76 वर्षीय पार्टी अध्यक्ष ज़िया को बेहतर इलाज के लिए तुरंत विदेश जाने की अनुमति दे। ‘द डेली स्टार बांग्लादेश’ की खबर के मुताबिक, संसद में बुधवार को विधि मंत्री अनीस उल हक ने कहा, 'ज़िया को इलाज कराने के वास्ते विदेश जाने के लिए अपने गलत कामों को कबूल करना चाहिए और राष्ट्रपति से माफी मांगनी चाहिए।' कोविड के बाद की जटिलताओं से पीड़ित हक ने कहा कि अगर कोई इस पर अन्य कानूनी प्रावधान ढूंढ सकता है, तो वह अपना पेशा छोड़ देंगे। बीएनपी के महासचिव मिर्जा फख्र उल इस्लाम आलमगीर ने पिछले हफ्ते कहा था, 'उनके इलाज की देखरेख के लिए गठित मेडिकल बोर्ड के प्रमुख एएफएम सिद्दीकी ने बताया कि ज़िया कोविड-19 से उबर चुकी हैं, लेकिन कोविड के बाद की जटिलताओं से पीड़ित हैं। वह अभी खतरे से बाहर नहीं हैं।' आलमगीर ने कहा था कि उन्हें जिगर और अन्य जटिलताओं के बेहतर इलाज के लिए विदेश ले जाने की जरूरत है। बीपीएन के सांसद हारून उर रशिद और मुशर्रफ हुसैन ने आरोप लगाया है कि सरकार राजनीतिक कारणों के चलते ज़िया को विदेश जाने की इजाजत नहीं दे रही है। आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधि मंत्री ने कहा कि ज़िया के परिवार के सदस्यों ने उनकी रिहाई के लिए आवेदन दिया था और कहा था कि उन्हें विदेश ले जाना होगा, 'लेकिन अपने आवेदन में, उन्होंने कानून के किसी प्रावधान का उल्लेख नहीं किया। हमने (दंड संहिता की) धारा 401 के तहत अपील पर विचार किया और उनकी सजा को दो शर्तों पर निलंबित कर दिया गया और उन्हें रिहा कर दिया गया।' आर्थराइटिस, मधुमेह और आंखों से संबंधित परेशानी उन्होंने कहा कि यह दो शर्तें थी कि वह घर पर इलाज कराएंगी और उनका उपचार देश में ही होगा। मंत्री के मुताबिक, ज़िया के परिवार ने ये शर्तें मान ली थी और उन्हें जेल से घर ले गए थे। कोरोना वायरस महामारी के बीच पिछले साल 25 मार्च को, दो बार देश की प्रधानमंत्री रही ज़िया को छह महीने के लिए जेल से रिहा किया गया था और भ्रष्टाचार के दो मामलों में उनकी सज़ा को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद रिहाई की अवधि को कई बार बढ़ाया जा चुका है। ज़िया को कोरोना वायरस से दूसरी बार संक्रमित होने के तीन दिन बाद 28 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले वह 11 अप्रैल को संक्रमित पाई गई थी। उन्हें आर्थराइटिस, मधुमेह और आंखों से संबंधित परेशानी है। उन्हें 19 जून को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।


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इस्लामाबाद पाकिस्तानी सेना में आज चीन में बने हुए वीटी-4 युद्धक टैंक के पहले बैच को शामिल किया गया है। पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने बताया कि मंगला कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल शाहीन मजहर महमूद ने आर्मर्ड डिवीजन का दौरा कर वीटी-4 टैंकों के पहले बैच का निरीक्षण किया। मेजर जनरल राशिद महमूद ने कोर कमांडर को टैंकों के पहले बैच के शिपमेंट के बारे में जानकारी दी। इस दौरान चीन के के शक्ति का प्रदर्शन भी किया गया। वीटी-4 खरीदने वाला तीसरा देश बना पाकिस्तान इस टैंक का निर्माण चीन की सरकारी बख्तरबंद वाहन निर्माता कंपनी नोरिन्को ने किया है। वीटी-4 टैंकों की डिलिवरी इस साल अप्रैल से शुरू की गई थी, हालांकि अभी तक इसके कितने यूनिट सौंपे गए हैं, इसको लेकर कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। थाईलैंड और नाइजीरिया के बाद पाकिस्तान तीसरा देश है जिसने चीन से ये टैंक खरीदे हैं। पिछले साल सितंबर में पाकिस्तानी सेना ने बख्तरबंद कोर में शामिल होने के बाद टिल्ला फील्ड फायरिंग रेंज में इस टैंक का टेस्ट किया था। कितना ताकतवर है चीन का वीटी-4 टैंक चीन के वीटी-4 मेन बैटल टैंक को एमबीटी-3000 के नाम से भी जाना जाता है। यह चीन के तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक है। चीन ने इस टैंक को दूसरे देशों को बेचने के लिए खासतौर पर बनाया है। 52 टन वजनी यह टैंक 10.10 मीटर लंबा और 3.4 मीटर चौड़ा है। इस टैंक को तीन क्रू मेंबर मिलकर चला सकते हैं। जिसमें एक ड्राइवर, दूसरा कमांडर और तीसरा गनर होता है। इसका मुख्य हथियार 125 एमएम की गन है। इसमें टर्बोचार्ज इंजन लगा हुआ है जो टैंक को 1300 हॉर्सपावर की ताकत प्रदान करता है। टी-90 भीष्म भारत का टी-90 भीष्म कितना शक्तिशाली भारत के टी-19 भीष्म के आगे पाकिस्तान का वीटी-4 मुख्य युद्धक टैंक कहीं नहीं ठहरता है। यह टैंक मूल रूप से रूस में बना है। इसके नाम में टी टैंक को बताता है, जबकि 90 का मतलब यह 1990 के दशक में आधिकारिक रूप से बनकर तैयार हुआ था। इसकी गिनती दुनिया के सबसे शक्तिशाली टैंकों में की जाती है। इसमें भी तीन क्रू मेंबर होते हैं जिनमें ड्राइवर, कमांडर और गनर शामिल होता है। T-90 टैंक में Kaktus K-6 एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर लगा हुआ है, जो इसे दुश्मन के हमले से बचाता है। टी-90 से दुश्मनों का बचना नामुमकिन टी-90 टैंक में अचूक 125 एमएम की मेन गन है। यह 6 किलोमीटर दूर तक सटीक गोलीबारी कर सकता है। इतना ही नहीं, टी-90 टैंक कई तरह की मिसाइलों को भी फायर करने में सक्षम है। इसका वजन 48 टन है। यह दुनिया के हल्के टैंकों में एक है। यह दिन और रात में दुश्मन से लड़ने की क्षमता रखता है। इसमें 1000 हॉर्स पावर का शक्तिशाली इंजन लगा हुआ है। यह एक बार में 550 किमी की दूरी तय कर सकता है। यह टैंक एंटी एयरक्राफ्ट गन से भी लैस है जो दुश्मनों के हेलिकॉप्टर को मार गिरा सकती है।


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ओटावा कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक अन्य पूर्व घरेलू आवासीय स्कूल के आसपास अचिह्नित कब्रों में 182 लोगों के अवशेष पाए गए हैं। लोअर कूट बैंड ने बुधवार को एक बयान में कहा कि क्रैनब्रुक शहर के पास स्थित कुटुनाक्सा राष्ट्र के अकुम समुदाय के एक सदस्य ने पूर्व सेंट यूजीन मिशन स्कूल के पास अवशेषों को खोजने के लिए जमीन के भीतर खोजने वाले रडार का इस्तेमाल किया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, स्वदेशी स्कूल 1912 से 1970 के दशक की शुरूआत तक कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित किया गया था। इमारत को एक निकटवर्ती गोल्फ कोर्स के साथ एक रेसॉर्ट और कैसीनो में परिवर्तित कर दिया गया है। बैंड ने बयान में कहा, ‘ऐसा माना जाता है कि इन 182 शवों के अवशेष कतुनक्सा राष्ट्र के सदस्य बैंड, और अकुम समुदाय से संबंध रखते हैं।’ बैंड ने कहा कि उसके 100 सदस्यों को स्कूल में जाने के लिए मजबूर किया गया था। ब्रिटिश कोलंबिया में कमलूप्स इंडियन रेजिडेंशियल स्कूल की साइट पर 215 लोगों के अनुमानित अवशेषों और सास्काचेवान में मैरीवल इंडियन रेजिडेंशियल स्कूल की एक साइट के पास अनुमानित 751 अचिह्नित कब्रों की खोज के बाद ये खोज की गई। समुदाय के नेतृत्व ने खोज की घोषणा करने से पहले समुदाय में आवासीय स्कूल के बचे लोगों से मुलाकात की। बैंड ने कहा कि यह रिपोर्ट के निष्कर्षों के शुरूआती चरण में है और अधिक अपडेट प्रदान करेगा। ये स्कूल भीड़भाड़, खराब स्वच्छता, अस्वास्थ्यकर भोजन और छोटे श्रम के लिए जाने जाते थे। अपनी मूल भाषा बोलने वाले या पारंपरिक समारोहों में भाग लेने वाले इनके छात्रों को कठोर दंड दिया जाता था।


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जकार्ता इंडोनेशिया से महिला को कोड़े मारने की एक खौफनाक घटना सामने आई है। देश के असेह प्रांत में शादी से पहले सेक्‍स करने की आरोपी महिला को पुलिस ने 100 से ज्‍यादा कोड़े मारे जिससे वह वहीं पर दर्द से तड़पने लगी और बेहोश हो गई। महिला और उसके पुरुष प्रेमी को सार्वजनिक रूप से ये कोड़े मारे गए। इंडोनेशिया में शरिया कानून लागू है और शादी से पहले सेक्‍स वर्जित है। कोड़े मारे जाने के बाद एक बार महिला उठी लेकिन दोबारा कोड़ा मारने पर वह गिर गई और बेहोश हो गई। बाद में उसे होश आने पर फिर से कोड़े मारे गए। जितनी बार महिला के पीठ पर कोड़े मारे जाते, उतनी बार वह गहरी सांस लेती। एक स्थिति ऐसी आ गई कि महिला दर्द से तड़पने लगी। इसके बाद वहां मौजूद स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी उसकी जांच करने पहुंचे। आसेह ही ऐसा प्रांत है जहां पर शरिया कानून लागू महिला को अचेतावस्‍था में वहां से कई लोग उठाकर ले गए। कोड़े मारे जाने की घटना के दौरान घटनास्‍थल पर बड़ी संख्‍या में लोग और पुलिसकर्मी मौजूद थे। इस दौरान दो अन्‍य लोगों को भी शराब पीने और आपत्तिजनक व्‍यवहार करने पर कोड़े मारे गए। इन लोगों को क्रमश: 75 और 40 कोड़े सार्वजनिक रूप से मारे गए। पुलिस अधिकारी जुल्‍कीफ्ली ने कहा कि महिला 100 कोड़े खाने के बाद बेहोश हो गई थी, इसीलिए उसे दूसरी जगह पर ले जाया गया है। पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि महिला तुरंत उठ गई और अब ठीक हो रही है। इंडोनेशिया का आसेह ही ऐसा प्रांत है जहां पर शरिया कानून लागू है। बेहद कट्टरपंथी इस राज्‍य में विभिन्‍न अपराधों जैसे शराब पीने, अश्‍लील हरकतें करने और अवैध संबंधों के आरोप में दोषी पाए जाने पर सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे जाते हैं। अधिकारियों ने वर्ष 2018 में दावा किया था कि कोड़े मारे जाने को बंद किया जाएगा लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है। ऐसी घटनाएं बल्कि बढ़ गई हैं।


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इस्लामाबाद अफगानिस्तान में तालिबान सहित बाकी आतंकी संगठनों को शह देना पाकिस्तान को अब भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को दो अलग-अगल आतंकी हमलों में के पांच जवान मारे गए। बताया जा रहा है कि इन हमलों में कई जवान घायल भी हुए हैं, जिनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख रशीद ने कबूला था कि तालिबानी आतंकियों के कई परिवार पाकिस्तान में पनाह लिए हुए हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी तालिबान के साथ पाकिस्तान के संबंधों को खुलेआम स्वीकार चुके हैं। उत्तरी वजीरिस्तान में पाक सेना के दो जवान ढेर पाकिस्तानी सेना की प्रॉपगैंडा विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने बुधवार को एक बयान में कहा कि अफगानिस्तान के अंदर से आतंकवादियों ने उत्तरी वजीरिस्तान कबायली जिले के द्वातोई इलाके में एक सैन्य चौकी पर गोलीबारी की। इस हमले में पाकिस्तानी सेना के दो जवान 43 साल के हवलदार सलीम और 35 साल के लांस नायक परवेज मारे गए। सूत्रों के अनुसार, आतंकवादियों ने अफगान के पक्तिका से पाकिस्तानी सेना के ऊपर यह हमला किया था। पाकिस्तान ने आतंकवाद के लिए अफगानिस्तान की निंदा की आईएसपीआर के बयान में कहा गया है कि इस्लामाबाद लगातार काबुल से अपनी तरफ प्रभावी सीमा नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए कहता रहा है। दिखावे के लिए पाकिस्तान ने कहा कि वह आतंकवादी गतिविधियों के लिए अफगानिस्तान की धरती के लगातार इस्तेमाल की कड़ी निंदा करता है। जबकि, पूरी दुनिया यह सच्चाई जानती है कि अफगानिस्तान के आतंकियों को पालने-पोसने में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। दक्षिण वजीरिस्तान में हुआ दूसरा हमला इस बीच, दक्षिण वजीरिस्तान कबायली जिले के तिआर्जा तहसील के न्यू कला में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। हमले में तीन जवान मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने हमले में रॉकेट और हल्की मशीनगनों का इस्तेमाल किया था। बता दें कि इन आतंकियों को पैसे और हथियार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई मुहैया करवाती है। कई बार आपसी दुश्मनी के कारण ये आतंकी पाकिस्तानी सेना पर हमला कर देते हैं।


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भूमध्य सागर में ब्रिटेन और रूस के बीच जारी तनाव में अब अमेरिका भी कूद गया है। ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ के बिलकुल पास मिसाइल युद्धाभ्यास कर रही रूसी सेना को ओहियो क्लास की यूएसएस अलास्का बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी ने चुनौती दी है। कुछ दिनों पहले ही रूस ने आरोप लगाया था कि ब्रिटेन और अमेरिका के लड़ाकू विमानों ने उसके युद्धपोतों के ऊपर से उड़ान भरी है। यह अमेरिकी पनडुब्बी 21 साल में पहली बार भूमध्य सागर स्थित ब्रिटिश ओवरसीज क्षेत्र में स्थित यूके रॉयल नेवी से बेस का दौरा किया है। अमेरिकी नौसेना ने अपने बयान में बताया है कि उसकी ओहियो श्रेणी की यूएसएस अलास्का बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी ने भूमध्य सागर में ब्रिटिश नौसैनिक अड्डे पर अत्यंत दुर्लभ स्टॉपओवर लिया है। यह ठहराव रसद आपूर्ति के लिए लिया गया है जो पहले से ही निर्धारित थी। लेकिन, विशेषज्ञ इसे रूस से जोड़कर देख रहे हैं। कुछ दिन पहले ही रूस ने ब्रिटिश नौसेना के एचएमएस डिफेंडर को काला सागर से खदेड़ दिया था।

UK Russia Tensions US: भूमध्य सागर में ब्रिटेन और रूस के बीच जारी तनाव में अब अमेरिका भी कूद गया है। ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ के बिलकुल पास मिसाइल युद्धाभ्यास कर रही रूसी सेना को ओहियो क्लास की यूएसएस अलास्का बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी ने चुनौती दी है।


रूस ने ब्रिटिश युद्धपोत को घेरा तो अमेरिका ने 21 साल बाद भेजी महाविनाशक परमाणु पनडुब्बी, होगी जंग?

भूमध्य सागर में ब्रिटेन और रूस के बीच जारी तनाव में अब अमेरिका भी कूद गया है। ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ के बिलकुल पास मिसाइल युद्धाभ्यास कर रही रूसी सेना को ओहियो क्लास की यूएसएस अलास्का बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी ने चुनौती दी है। कुछ दिनों पहले ही रूस ने आरोप लगाया था कि ब्रिटेन और अमेरिका के लड़ाकू विमानों ने उसके युद्धपोतों के ऊपर से उड़ान भरी है। यह अमेरिकी पनडुब्बी 21 साल में पहली बार भूमध्य सागर स्थित ब्रिटिश ओवरसीज क्षेत्र में स्थित यूके रॉयल नेवी से बेस का दौरा किया है। अमेरिकी नौसेना ने अपने बयान में बताया है कि उसकी ओहियो श्रेणी की यूएसएस अलास्का बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी ने भूमध्य सागर में ब्रिटिश नौसैनिक अड्डे पर अत्यंत दुर्लभ स्टॉपओवर लिया है। यह ठहराव रसद आपूर्ति के लिए लिया गया है जो पहले से ही निर्धारित थी। लेकिन, विशेषज्ञ इसे रूस से जोड़कर देख रहे हैं। कुछ दिन पहले ही रूस ने ब्रिटिश नौसेना के एचएमएस डिफेंडर को काला सागर से खदेड़ दिया था।



21 साल में पहली बार जिब्राल्टर पहुंची अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी
21 साल में पहली बार जिब्राल्टर पहुंची अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी

अमेरिकी नौसेना ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी कि यूएसएस अलास्का कल जिब्राल्टर में रवाना हुआ था। परमाणु शक्ति संपन्न पनडुब्बियों की यात्रा को लेकर इस ऐलान को अप्रत्याशित तौर पर देखा गया। इससे पहले अमेरिका कभी भी अपनी परमाणु पनडुब्बियों की गतिविधियों के बारे में पहले ही जानकारी नहीं देता है। यू.एस. नेवल फोर्सेज यूरोप-अफ्रीका/यू.एस. सिक्स्थ फ्लीट के प्रवक्ता और यूएस नेवी के लेफ्टिनेंट कमांडर लेनया रोटक्लेन ने द वॉर जोन को बताया कि 21 साल में यह पहला मौका है जब ओहियो क्लास के एसएसबीएन ने 1999 के बाद से जिब्राल्टर के नौसैनिक बेस पर ठहराव लिया है। अमेरिका के पास ओहियो क्लास की 18 पनडुब्बियां हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि कि इन 18 में से कितनों ने जिब्राल्टर की आजतक यात्रा की है। लेफ्टिनेंट कमांडर रोटक्लेन ने कहा कि यूएसएस अलास्का (एसएसबीएन 732) ने 28 जून, 2021 को जिब्राल्टर के बंदरगाह पर रसद के लिए पहले से निर्धारित संक्षिप्त स्टॉप का आयोजन किया। अलास्का पनडुब्बी यूरोप और अफ्रीका में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के समर्थन में संचालन के लिए अमेरिकी नौसेना के छठे बेड़े का हिस्सा है। यह संक्षिप्त स्टॉप संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम-जिब्राल्टर के बीच सहयोग को मजबूत करता है।



एक साथ 280 ठिकानों पर परमाणु हमला कर सकती है यह पनडुब्बी
एक साथ 280 ठिकानों पर परमाणु हमला कर सकती है यह पनडुब्बी

अमेरिकी नौसेना ने यह नहीं बताया कि यूएसएस अलास्का को किस प्रकार से लॉजिस्टिक की जरूरत थी, जिसके लिए इसे जिब्राल्टर में रुकना पड़ा। इससे पहले अन्य प्रकार की अमेरिकी पनडुब्बियां नियमित रूप से इस रॉयल नेवी बेस पर रुकती रही हैं। बंदरगाह पर पहुंचने पर टगबोट्स ने पनडुब्बी को किनारे पर रोका और उनमें जरूरी सामान को लोड किया। आधुनिक सैन्य पनडुब्बियां जब सतह पर आतीं हैं तो उनकी सुरक्षा को सबसे ज्यादा खतरा होता है। यहां से वे दुश्मन की नजरों से छिप नहीं सकती हैं। अलास्का पनडुब्बी के लिए यह खतरा दोगुना हो जाता है, क्योंकि यह अपने साथ हमेशा फायर करने के लिए तैयार दर्जनों परमाणु मिसाइलों के साथ गश्त करती है। अमेरिकी नौसेना की प्रत्येक ओहियो क्लास की पनडुब्बी में 20 की संख्या में ट्राइडेंट D5 सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात होती हैं। प्रत्येक ट्राइडेंट डी5 मिसाइल 14 की संख्या में स्वतंत्र W76-1 या W88 परमाणु हथियार ले जा सकता है। इनमें से एक W76-1 परमाणु हथियार लगभग 100 किलोटन, जबकि W88 परमाणु हथियार 475 किलोटन की ऊर्जा पैदा कर सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि 20 ट्राइडेंट D5 सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें 280 ठिकानों पर परमाणु हमला कर सकती हैं।



कई खतरनाक हथियारों से लैस है यूएसएस अलास्का
कई खतरनाक हथियारों से लैस है यूएसएस अलास्का

अमेरिका और रूस के बीच कई हथियार नियंत्रण समझौतों के कारण इन मिसाइलों में से केवल 5 या 6 ही हमेशा तैनात होती हैं। जनवरी 2020 से कुछ ओहियो पनडुब्बियों में तैनात ट्राइडेंट D5s मिसाइलों में कम क्षमता की W76-2 परमाणु विस्फोटक ही लगे हुए हैं। माना जा रहा है कि ट्राइडेंट D5s मिसाइल केवल पांच किलोटन के परमाणु विस्फोट को कर सकती है। अमेरिका के कई रक्षा विशेषज्ञ इसके लिए सरकार की आलोचना करते हैं, वहीं कई ऐसे भी हैं जो इसे रूस के साथ परमाणु बातचीत करने के लिए आवश्यक कदम बताते हैं। जिब्राल्टर में यूएसएस अलास्का का आगमन मात्र एक संयोग नहीं है। अगर अमेरिका इतने प्रचार के साथ अपनी परमाणु पनडुब्बी को किसी विवादित क्षेत्र में भेज रहा है कि तो इसके कई मायने हो सकते हैं।



लंबे समय तक समुद्र में छिपी रह सकती है यूएसएस अलास्का
लंबे समय तक समुद्र में छिपी रह सकती है यूएसएस अलास्का

यूएसएस अलास्का को अगर पनडुब्बी में तैनात नौसैनिकों के लिए खाने की वस्तुएं न लेनी हो तो वह कई महीनों तक पानी के नीचे गायब रह सकता है। इसमें खुद के ऑक्सीजन जेनरेटर्स लगे होते हैं, जो पनडुब्बी में तैनात नौसैनिकों के लिए ऑक्सीजन पैदा करते हैं। इसके अलावा परमाणु रिएक्टर लगे होने के कारण इनके पास ऊर्जा का अखंड भंडार होता है। जबकि परंपरागत पनडुब्बियों में डीजल इलेक्ट्रिक इंजन होता है। उन्हें इसके लिए डीजल लेने और मरम्मत के काम के लिए बार बार ऊपर सतह पर आना होता है। पानी के नीचे अगर कोई पनडुब्बी छिपी हुई तो उसका पता लगाना बहुत ही कठिन काम होता है। लेकिन, अगर वह पनडुब्बी किसी काम से एक बार भी सतह पर दिखाई दे दे तो उसको डिटेक्ट करना और पीछा करना दुश्मन के लिए आसान हो जाता है।



यूएसएस ओहियो भी 154 टॉमहॉक के साथ लगा रहा गश्त
यूएसएस ओहियो भी 154 टॉमहॉक के साथ लगा रहा गश्त

अमेरिका ने अपनी सबसे बड़ी परमाणु पनडुब्बी यूएसएस ओहियो को चीन के नजदीक तैनात किया है। इस पनडुब्बी पर लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें तैनात हैं, जो दुनिया के किसी भी कोने में हमला कर सकती हैं। आकार में बड़ी होने के कारण यूएसएस ओहियो में 154 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात होती हैं। यह क्षमता अमेरिका के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर में तैनात मिसाइलों की दोगुनी है। हर एक टॉमहॉक मिसाइल अपने साथ 1000 किलोग्राम तक के हाई एक्सप्लोसिव वॉरहेड को लेकर जाने में सक्षम है। अमेरिकी सेना में 1983 से तैनात यह मिसाइल सीरिया, लीबिया, ईराक और अफगानिस्तान में अपनी ताकत दिखा चुकी है।





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रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...