Wednesday, 29 September 2021

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दुबईदुबई की आलीशान जिंदगी किसी को भी लुभा सकती है। सड़कों पर चलतीं महंगी गाड़ियां और आसमान को चूमती दुनिया की सबसे ऊंची इमारतें किसी को भी दुबई का दीवाना बना सकती हैं। दुबई के शेख पूरी दुनिया में अपनी दौलत और महंगे शौक के लिए जाने जाते हैं। किसी भी चीज का शौक करते समय शेख इस बात का ध्यान रखते हैं कि दुनिया में कोई भी उनकी बराबरी न कर पाए। वे खुद को विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानते हैं और समय-समय पर इसका अहसास दुनिया को कराते रहते हैं। दुबई के शेख खासतौर पर सोने के शौकीन हैं। उनकी गाड़ियों से लेकर मोबाइल, यहां तक की खाने में भी सोना मौजूद होता है। आज आपको दुबई के शेखों के कुछ आलीशान और अजीबोगरीब शौक के बारे में बताएंगे जिन्हें देखकर आप कहेंगे, 'वाह! लाइफ हो तो ऐसी...'

Dubai Lifestyle: अगर आप दुबई में हैं तो आप दुनिया की सबसे ऊंची इमारत के भीतर से पृथ्वी का नजारा देख सकते हैं। ऐसी कई चीजें हैं जिनका अनुभव आप दुनिया में सिर्फ दुबई में ही कर सकते हैं।


दुनिया की सबसे आलीशान जिंदगी जीते हैं दुबई के शेख, सोने की गाड़ी से लेकर गोल्डन फूड, अजीबोगरीब शौक

दुबई

दुबई की आलीशान जिंदगी किसी को भी लुभा सकती है। सड़कों पर चलतीं महंगी गाड़ियां और आसमान को चूमती दुनिया की सबसे ऊंची इमारतें किसी को भी दुबई का दीवाना बना सकती हैं। दुबई के शेख पूरी दुनिया में अपनी दौलत और महंगे शौक के लिए जाने जाते हैं। किसी भी चीज का शौक करते समय शेख इस बात का ध्यान रखते हैं कि दुनिया में कोई भी उनकी बराबरी न कर पाए। वे खुद को विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानते हैं और समय-समय पर इसका अहसास दुनिया को कराते रहते हैं। दुबई के शेख खासतौर पर सोने के शौकीन हैं। उनकी गाड़ियों से लेकर मोबाइल, यहां तक की खाने में भी सोना मौजूद होता है। आज आपको दुबई के शेखों के कुछ आलीशान और अजीबोगरीब शौक के बारे में बताएंगे जिन्हें देखकर आप कहेंगे, 'वाह! लाइफ हो तो ऐसी...'



एटीएम से निकलता है सोना
एटीएम से निकलता है सोना

आमतौर पर एटीएम मशीन इमरजेंसी में पैसों की जरूरत को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए लगाई जाती है। लेकिन दुबई में यह मशीन शेखों के महंगे शौक को पूरा करने के लिए लगाई गई हैं। इन मशीनों से पैसों के बजाय सोना निकाला जा सकता है। शेख इन मशीनों से नकदी के बदलते सोना निकलते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सोने जैसी कीमती धातु दुबई में कितनी आम है। दुबई में जगह-जगह आपको सोना निकलने वाली एटीएम मशीन मिल जाएंगी।



सोने की गाड़ियों से करते हैं सफर
सोने की गाड़ियों से करते हैं सफर

दुनिया में एक से एक लग्जरी और महंगी कारें आपको देखने को मिल सकती हैं। लेकिन दुबई एक अलग ही दुनिया है जहां सड़कों पर चलते-फिरते आपको सोने की कारें दिख जाएंगी। कई बार इंटरनेट पर इन गोल्ड प्लेटेड कारों की तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं। जिन्हें देखकर लोग हैरान हो जाते हैं। इन कारों की कीमत सैकड़ों करोड़ों में होती है क्योंकि इन्हें खासतौर पर डिजाइन कराया जाता है। कारों के अलावा शेख गोल्ड प्लेटेड मोबाइल फोन के भी शौकीन होते हैं, जिन पर करोड़ों के हीरे जड़े होते हैं।



खाने में खाते हैं सोने की डिश
खाने में खाते हैं सोने की डिश

दुबई दुनिया के कुछ सबसे अमीर लोगों का घर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुबई में रहने वाले करोड़पतियों की आबादी 52,000 से ज्यादा है। 2,430 लोग ऐसे हैं जिनकी कुल संपत्ति 10 मिलियन डॉलर या उससे ज्यादा है। इनमें ज्यादातर शेख हैं जिनके खाने में भी सोना शामिल है। इनकी पसंद का ख्याल रखते हुए दुबई के कुछ रेस्तरां ऐसा खाना परोसते हैं जिसमें सोना शामिल होता है। इसका उदाहरण दुबई का Hampstead Bakery and Cafe है जहां फ्रेंच टोस्ट को 24 कैरेट सोने की परत में लपेट कर परोसा जाता है। इसके अलावा दुबई में आपको सोने की काफी और चाय भी मिल सकती है।



पालतू जानवरों से रहे सावधान!
पालतू जानवरों से रहे सावधान!

पालतू जानवरों का नाम लेते ही अक्सर हमें कुत्ता, बिल्ली या गाय जैसे जानवर याद आते हैं। ये जानवर बेहद प्यारे और ज्यादातर मासूम होते हैं। लेकिन दुबई के पालतू जानवरों थोड़े अलग है। जानवरों को पालने के शौक में दुबई के शेखों का मुकाबला दुनिया में कोई नहीं कर सकता। ये शेख शेर और चीते जैसे खूंखार जंगली जानवरों को पालते हैं। आमतौर ऐसे जानवर अगर दिख जाएं तो पूरे इलाके में दहशत फैल जाती है लेकिन कई तस्वीरों में ये जंगली जानवर शेखों के साथ कार में सैर करते या उनकी गोद में बैठे नजर आते हैं।



आसमान के बजाय प्लेन में बैठकर उड़ते हैं पक्षी
आसमान के बजाय प्लेन में बैठकर उड़ते हैं पक्षी

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रीय पक्षी का नाम Falcon है। शेख इस पक्षी को पालने के शौकीन हैं। देश में शेखों का बहुत सम्मान किया जाता है। सरकार की ओर से शेखों को न सिर्फ राष्ट्रीय पक्षी को पालने की अनुमति मिली है बल्कि फैल्कन को खास सुविधाएं भी दी गई हैं। यह पक्षी प्लेन में बैठकर उड़ान भर सकता है। इतना ही नहीं इस पक्षी को फ्लाइट में सीट भी दी जाती है।





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इस्लामाबाद तालिबान सरकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता न मिलने के कारण पाकिस्तान अफगानिस्तान को तकनीकी, वित्तीय और विशेषज्ञ सहयोग मुहैया कराने में मुश्किलों का सामना कर रहा है। मीडिया में आयी एक खबर में बुधवार को यह कहा गया। डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, मंगलवार को आर्थिक मामलों के मंत्री उमर अय्यूब खान की अध्यक्षता वाली एक बैठक में नए अफगान प्रशासन को सहयोग देने के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया गया। यह बैठक उन खबरों के बीच हुई कि युद्धग्रस्त देश गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहा है। लेकिन मुख्य चुनौती यह है कि अफगान सरकार को विश्व द्वारा मान्यता दिए बगैर यह कैसे किया जाए। अफगानिस्तान के साथ आर्थिक सहयोग पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सैयद फखर इमाम, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुईद यूसुफ, पाकिस्तान स्टेट बैंक के गवर्नर डॉ. रजा बाकिर, जल एवं बिजली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मुजम्मिल हुसैन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। विश्वस्त सूत्रों ने अखबार को बताया कि बैठक में कहा गया कि अफगान सरकार के लिए बड़ी चुनौती अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के तुरंत बाद बड़ी संख्या में तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञों के देश छोड़कर चले जाने से पैदा रिक्तता को भरने की है। प्रमुख संस्थानों खासतौर से तकनीकी और वित्तीय संस्थानों में विशेषज्ञों की कमी से बिजली, मेडिकल और वित्तीय सुविधाएं जैसी आवश्यक सेवाओं का सुचारू रूप से संचालन नहीं हो पा रहा है। अय्यूब ने अफगानिस्तान में मौजूदा हालात के संदर्भ में द्विपक्षीय आर्थिक सहायता पर जोर दिया। मंत्री के हवाले से एक बयान में कहा गया है कि सरकार अफगानिस्तान के लोगों की उनकी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से निपटने में मदद करना चाहती है। उन्होंने कहा, 'अफगान लोगों की जिंदगियों और आजीविकाओं को बचाने के लिए मानवीय आधार पर तत्काल तकनीकी और वित्तीय समर्थन की आवश्यकता है।' इमाम ने कहा कि 1.4 करोड़ अफगान लोगों के भोजन के गंभीर संकट का सामना करने की खबरें चिंताजनक हैं।


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वॉशिंगटन अमेरिका के 22 रिपब्लिकन सीनेटर के एक समूह ने मंगलवार को पर और उसका समर्थन करने वाली सभी विदेशी सरकारों पर प्रतिबंध लगाने के प्रावधान वाला एक विधेयक पेश किया। 'अफगानिस्तान काउंटर टेररिज्म, ओवरसाइट एंड एकाउंटेबिलिटी एक्ट' को सीनेटर जिम रिश ने पेश किया। विधेयक 2001-2020 के बीच तालिबान को समर्थन देने में पाकिस्तान की भूमिका, जिसके कारण अफगानिस्तान की सरकार गिरी... साथ ही पंजशीर घाटी और अफगान प्रतिरोध के खिलाफ तालिबान के हमले में पाकिस्तान के समर्थन के बारे में विदेश मंत्री से एक रिपोर्ट की मांग करता है। जिम रिश ने सीनेट के पटल पर विधेयक पेश करने के बाद कहा, 'हम अफगानिस्तान से अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन की बेतरतीब वापसी के गंभीर प्रभावों पर गौर करना जारी रखेंगे। ना जाने कितने ही अमेरिका नागरिकों और अफगान सहयोगियों को अफगानिस्तान में तालिबान के खतरे के बीच छोड़ दिया गया। हम अमेरिका के खिलाफ एक नए आतंकवादी खतरे का सामना कर रहे हैं, वहीं अफगान लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों का हनन करते हुए तालिबान गलत तरीके से संयुक्त राष्ट्र से मान्यता चाहता है।' विधेयक में, आतंकवाद का मुकाबला करने, तालिबान द्वारा कब्जा किए गए अमेरिकी उपकरणों के निपटान , अफगानिस्तान में तालिबान और आतंकवाद फैलाने के लिए मौजूद अन्य गुटों पर प्रतिबंध और मादक पदार्थों की तस्करी और मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए रणनीतियों की आवश्यकता की भी मांग की गई है। इसमें तालिबान पर और संगठन का समर्थन करने वाली सभी विदेशी सरकारों पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की गई है। इस बीच, अमेरिका के एक शीर्ष सैन्य जनरल ने कहा कि अफगानिस्तान पर अब शासन कर रहा तालिबान 2020 के दोहा समझौते का सम्मान करने में विफल रहा है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संगठन अभी तक अल-कायदा से अलग नहीं हुआ है। ‘यूएस ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ’ के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले ने सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों से कहा, 'दोहा समझौते के तहत, अमेरिका को तालिबान की कुछ शर्तों को पूरा करने पर अपनी सेना को वापस बुलाना शुरू करना था, जिससे तालिबान और अफगानिस्तान की सरकार के बीच एक राजनीतिक समझौता हो पाए।' उन्होंने कहा कि समझौते के तहत तालिबान को सात शर्तें और अमेरिका को आठ शर्तें पूरी करनी थी। मिले ने कहा, 'तालिबान ने अमेरिकी सेना पर हमला नहीं किया, जो कि एक शर्त थी, लेकिन वह दोहा समझौते के तहत किसी भी अन्य शर्त का पूरा करने में पूर्ण रूप से विफल रहा। वहीं शायद अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तालिबान कभी भी अल-कायदा से अलग नहीं हुआ या उनके साथ अपना संबंध नहीं तोड़ा।’’ अधिकारी ने कहा कि वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने अपनी सभी शर्तों को पूरा किया। यह स्पष्ट है कि अफगानिस्तान में युद्ध उन शर्तों पर समाप्त नहीं हुआ, जिन पर अमेरिका चाहता था। अमेरिका द्वारा एक मई को अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू करने के बाद तालिबान ने देश के कई हिस्सों पर कब्जा करना शुरू कर दिया था और 15 अगस्त को उसने काबुल को भी अपने नियंत्रण में ले लिया। मिले ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनका मानना है कि अल-कायदा अफगानिस्तान में है और वे फिर एक साथ आना चाहते हैं।


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केंट एक ऐसा नाम है जिससे जुड़े रहस्यों का सिलसिला खत्म होता ही नहीं है। पुरातत्वविदों को अब हिटलर का एक कुख्यात 'महाहथियार' मिला है। रिसर्च रिसोर्स आर्कियॉलजी की टीम 14 फीट गहरे और 38 फीट चौड़े क्रेटर में खुदाई कर रही थी जब उसके हाथ यह हथियार लगा। कोलिन और शॉन वेल्च नाम के दो भाई ये प्रॉजेक्ट चला रहे थे। यहां उन्हें दिखा V-1 रॉकेट का एक हिस्सा। इसमें एक कंबशन चैंबर था जिसमें लिक्विड ऑक्सिजन और ऐल्कोहॉल को मिश्रण रखा जाता होगा। अलग जगह पर मिला टीम पहले भी इस तरह की जगहों पर खोज कर चुकी है लेकिन केंट में की गई यह खोज अनोखी बताई जा रही है। कोलिन ने केंट ऑनलाइन को बताया कि ये रॉकेट धरती पर किसी ऐंगल पर दाखिल होते थे। इस खास रॉकेट के लिए यह ऐंगल 70 डिग्री का था। आमतौर पर ऐसी खोज क्रेटर के किनारे पर होती है, रॉकेट के एंट्री पॉइंट से सबसे दूर लेकिन जब हमने वहां खुदाई की तो ऐसा कुछ नहीं मिला। मिनटों में ब्रिटेन पर गिरा माना जा रहा है कि जमीन पर मौजूद ragstone चट्टान की वजह से रॉकेट इंपैक्ट पॉइंट के पास ही रहा। शॉन बताते हैं कि उनके रॉकेट बेहद तेजी से ट्रैवल करते थे। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने ऐसे हजारों V2 रॉकेट लॉन्च किए जिनके हमलों में अकेले ब्रिटेन में 9 हजार लोगों की मौत हो गई थी। जिस रॉकेट की खोज पिछले हफ्ते की गई है, वह 14 फरवरी, 1944 को होलैंड से लॉन्च किया गया था और कुछ ही मिनटों में ब्रिटेन में आ गिरा। मिल सकते हैं सीक्रेट कोड इसे साफ करके संरक्षित किया जाएगा। एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि इस पर कुछ सीक्रेट सोर्स कोड लिखे हो सकते हैं जो आमतौर पर रॉकेट के हिस्सों पर देखने को मिलते हैं। जंग के बाद पाया गया था कि रॉकेट के हिस्से जहां बने थे, उस फैक्ट्री का पता लगाया जा सकता है। कुछ हिस्से चेकोस्लोवाकिया में बने थे तो कुछ ऑस्ट्रिया में। हर रॉकेट में पड़ने वाले ऐल्कोहॉल के लिए 30 टन आलू की जरूरत पड़ती थी और यह उत्पादन तब किया जा रहा था जब जर्मनी के लोगों के सामने खाने की कमी थी। 18 हजार लोगों को मारा हिटलर के महाहथियारों में V1 और V2 Vergeltungswaffen या जवाबी हथियार होोते थे। ये लंबी दूरी तक मारक क्षमता रखने वाले हथियार थे जिन्हें दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बम बरसाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यूरोप पर जब Allies ने कब्जा कर लिया तो इन हथियारों को फ्रांस और बेल्जियम जैसे स्थानों को निशाना बनाने के लिए किया जाने लगा। V हथियारों से कम से कम 18 हजार लोगों को मारा गया जिनमें से ज्यादातर आम नागरिक थे।


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पेइचिंग दुनिया की सबसे कीमती वस्तुओं में ज्यादातर लोग सोना, चांदी और हीरों का नाम लेंगे। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि किसी भी धातु और पत्थर से ज्यादा दुनिया में एक लकड़ी की कीमत है। एक्वीलेरिया के पेड़ से प्राप्त होने वाली एगरवुड लकड़ी को एलोववुड या ईगलवुड भी कहा जाता है। यह लकड़ी अरब, जापान, चीन, भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पाई जाती है। सोने और हीरे से ज्यादा कीमतीएगरवुड दुनिया की सबसे दुर्लभ और महंगी बिकने वाली लकड़ी है। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक एक किग्रा एगरवुड लकड़ी की कीमत 1,00,000 डॉलर या 73,00,000 रुपए तक हो सकती है। इस समय भारत में एक ग्राम हीरे की कीमत 3,25,000 रुपए है। जबकि 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 47,695 रुपए है। एगरवुड को आमतौर पर जापान में क्यारा या क्यानम के नाम से भी जाना जाता है। 25 लाख में बिकता है लकड़ी का तेलएगरवुड की लकड़ी से इत्र और दूसरी सुगंधित चीजें बनाई जाती हैं। लकड़ी के सड़ने के बाद इसका इस्तेमाल इत्र को बनाने में किया जाता है। एगरवुड से निकाले गए राल से Oud Oil भी बनता है। यह एक तरह का तेल होता है जिससे परफ्यूम बनाए जाते हैं। आज के समय में इस तेल की कीमत 25 लाख रुपए प्रति किलो है। कीमत के कारण इस लकड़ी को 'देवताओं की लकड़ी' या 'भगवान की लकड़ी' भी कहा जाता है। बड़े पैमाने पर होती है तस्करीचीन, जापान और हांगकांग में इसके कई पेड़ हैं। यह लकड़ी इतनी ज्यादा कीमती है कि बड़े पैमाने पर इसकी तस्करी और अवैध कटाई की जाती है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक तस्करी इस हद तक बढ़ चुकी है कि अब एक्वीलेरिया के पेड़ लगभग खत्म हो चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Asian Plantation Capital Company एशिया की सबसे बड़ी एगरवुड प्रोसेसिंग कंपनी है।


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काबुल अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से दुनियाभर के देशों ने वहां जाने वाली अपनी उड़ानें रोक दी थीं। अब सरकार बनाने के बाद तालिबान ने भारत से अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को फिर से शुरू किया जाए। इसके लिए पहली बार तालिबान ने भारत को औपचारिक खत लिखा है। अफगान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से अफगान नैशनल कैरियर्स को दोनों देशों के बीच उड़ाने शुरू करने की इजाजत देने की अपील की है। 'अमेरिकी सैनिकों ने मचाई तबाही' द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक DGCA को लिखे खत पर अफगानिस्तान के कार्यकारी उड्डयन मंत्री अल्हाज हमीदुल्ला अखुंदजादा का दस्तखत है। DGCA चीफ अरुण कुमार को लिखे खत में कहा गया है, 'जैसा कि आपको पता है कि हाल ही में अमेरिकी सैनिक देश छोड़ते वक्त काबुल एयरपोर्ट को क्षतिग्रस्त और बेकार करके गए हैं। कतर की तकनीकी सहायता से एयरपोर्ट फिर से काम कर रहा है और इस बारे में 6 सितंबर, 2021 को NOTAM जारी कर दिया गया है।' 'संचालन में मदद करें' अखुंदजादा ने लिखा है कि इस खत का मकसद दोनों देशों के बीच यात्रियों के मूवमेंट को सुचारू रूप से करने का है। खत में आगे लिखा है, 'हमारे नैशनल कैरियर (आरियाना अफगान एयरलाइन और काम एयर) ने अपनी तय फ्लाइट्स चलाने का लक्ष्य बनाया है। इसलिए अफगानिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी आपसे उनकी कर्मशल फ्लाइट्स के संचालन में मदद करें।' अमेरिका ने 31 अगस्त को अफगानिस्तान छोड़ दिया था। उसके सारे सैनिक देश लौट गए और इसके साथ ही काबुल एयरपोर्ट भी तालिबान के हाथ में आ गया था। इसके बाद कतर ने एक्सपर्ट्स और उपकरण भेजकर इसकी मरम्मत में मदद की थी।


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लंदन ब्रिटेन की एक फर्म कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है। इस कमी को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर भर्तियां जारी की गई हैं। फर्म अपने कर्मचारियों को सालाना 62 हजार पाउंड यानी 63 लाख रुपए ऑफर कर रही है। भारी वेतन के चलते ये नौकरियां लोगों को लुभा रही है। दरअसल यह फर्म देश की ज्यादातर सुपरमार्केट में ताजा सब्जियां सप्लाई करती है। कर्मचारियों की कमी के चलते काम पर असर पड़ रहा है। कितनी मिलेगी सैलरीइसी वजह से नौकरियों के लिए दो अलग-अलग विज्ञापन जारी किए गए हैं। लंदन के लिंकनशायर में स्थित टी एच क्लेमेंट्स एंड सन लिमिटेड 'operatives' की तलाश कर रही है। कंपनी को खेत से बंदगोभी तोड़ने और ब्रोकली की कटाई करने वालों की तलाश है। नौकरी मिलने पर उम्मीदवारों को 30 पाउंड प्रति घंटा भुगतान किया जाएगा। इसका मतलब है कि दिन में आठ घंटे और हफ्ते में पांच दिन काम करके उम्मीदवार 1200 पाउंड हर हफ्ते कमा सकते हैं। कोरोना और ब्रेक्सिट ने तोड़ी कमरइस हिसाब से वे महीने का 4800 पाउंड और साल का 62,400 पाउंड (करीब 63 लाख रुपए) वेतन कमा सकते हैं। फर्म ने एक बयान में कहा कि कंपनी कोविड-19 और Brexit के कारण कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है। दोनों ने प्रवासी मजदूरों पर नए प्रतिबंध लगा दिया है। कंपनी ने दो अलग-अलग विज्ञापन जारी किए हैं। एक में कहा गया है, 'कंपनी कैबेज की कटाई के लिए फील्ड ऑपरेटिव की तलाश कर रही है।' कर्मचारियों की भारी कमीवहीं दूसरे विज्ञापन में 'ब्रोकली की कटाई' के लिए फील्ड ऑपरेटिव के लिए आवेदन मांगे गए हैं। कंपनी ने कहा कि यह एक फुल टर्म जॉब है। कंपनी ने कहा है कि कर्मचारियों का वेतन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कितनी सब्जियां चुनते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि फल और सब्जी उद्योग में इतना वेतन असामान्य है। यह इंडस्ट्री में कर्मचारियों की भारी कमी को दिखाता है।


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रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...