Saturday, 16 January 2021

https://ift.tt/36CAGd7

वॉशिंगटन सूरज के दक्षिणी हिस्से से चली एक आंधी आने वाले दिनों में धरती पर पहुंच सकती है। अमेरिका की नैशनल ओशैनिक ऐंड अटमॉस्फीयर अथॉरिटी, NOAA के स्पेस वेदर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये सोलर पार्टिकल 500 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से स्पेस में चल रहे हैं और अब तक सूरज से 15 करोड़ किमी दूर निकल चुके हैं। माना जा रहा है कि रविवार या सोमवार को यह धरती के वायुमंडल से टकरा सकते हैं। क्या होगा असर? NOAA के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकी वजह से आर्कटिक ऑरोरा (Aurora) पैदा हो सकता है। ऑरोरा वह रोशनी होती है जो धरती के मैग्नेटोस्फीयर में सोलर विंड के टकराने से पैदा होती है। नीले और हरे रंग की रोशनी एक दिलकश नजारा पेश करती है जिसे देखने के लिए लोग इंतजार में रहते हैं। ये उत्तरी गोलार्ध में या ऑरोरा बोरियैलिस की शक्ल में आसमान में अद्भुत छटा बिखेरते हैं। सौर्य तूफान से नुकसान भी? सौर्य तूफानों का असर सैटलाइट पर आधारित टेक्नॉलजी पर भी हो सकता है। सोलर विंड की वजह से धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है जिससे सैटलाइट्स पर असर हो सकता है। इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है। पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है। गंभीरता से रिसर्च की जरूरत आखिरी बार इतना शक्तिशाली तूफान 1859 में आया था जब यूरोप में टेलिग्राफ सिस्टम बंद हो गया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सौर्य तूफानों को स्टडी किया जाना और उनसे अपनी टेक्नॉलजी और उपकरणों को बचाना बेहद जरूरी है। ये रेडिएशन ट्रिलियन डॉलर का नुकसान धरती को पहुंचा सकते हैं और इनकी वजह से ध्वस्त हुआ इन्फ्रास्ट्रक्चर दोबारा खड़ा करने में कई साल लग कते हैं।


from World News in Hindi, दुनिया न्यूज़, International News Headlines in Hindi, दुनिया समाचार, दुनिया खबरें, विश्व समाचार | Navbharat Times https://ift.tt/3swgxyk
via IFTTT

No comments:

Post a Comment

https://ift.tt/36CAGd7

रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...