लंदन कनाडा के दो सांसदों ने ब्रिटेन की सिखों की संस्था को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है। सांसद टिम उप्पल और परबमीत सिंह ने कहा कि खालसा एड दुनियाभर में आपदा से प्रभावित इलाकों और गृहयुद्ध से जूझ रहे देशों में मानवीय सहायता मुहैया कराती है। खालसा एड पर भारत में खालिस्तानी आतंकवादियों से संबंध रखने का आरोप है और एनआईए उसकी जांच कर रही है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान इस संस्था ने ही किसानों को काफी मदद दी है। खालसा एड की स्थापना वर्ष 1999 में भारतीय मूल के रविंदर सिंह ने कोसोवो के शरणार्थियों की स्थिति को देखकर की थी। खालसा एड का दावा है कि उसने इंसान और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान उसने लोगों की सहायता की है। सांसद उप्पल ने सोमवार को ट्विटर पर घोषणा की कि खालसा एड को नोबेल शांति पुरस्कार 2021 के लिए नामित किया गया है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए इस साल डोनाल्ड ट्रंप भी दावेदार हैं। भारत में खालसा एड को लेकर काफी विवाद खालसा एड ब्रिटेन के अलावा, भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में सक्रिय है। खालसा एड ने कहा कि वह नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किए जाने से बहुत विनम्र महसूस कर रही है। बता दें कि भारत में खालसा एड को लेकर काफी विवाद चल रहा है। खालसा एड ने ही दिल्ली में टिकरी सीमा पर किसान मॉल की स्थापना की थी जो वहां प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए है। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने खालसा एड के खिलाफ जांच शुरू की है। खालसा एड पर अमेरिका के विवादास्पद संगठन सिख फॉर जस्टिस के साथ संबंध रखने का आरोप है। सिख फॉर जस्टिस भारत में खालिस्तानी आतंकी गतिविधियों का समर्थन करती है। ट्विटर पर कई लोगों ने खालिस्तानियों के साथ संबंध रखने के आरोपी खालसा एड को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करने पर हैरानी जताया है।
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