वॉशंगटन तमिल मूल की भारतीय-अमेरिकन मां की बेटी () बुधवार को इतिहास रचने को तैयार हैं। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति बनने वाली हैं। वह पहली अश्वेत महिला होंगी जो अमेरिका में इस टॉप के पद पर पहुंचेंगी। हैरिस अमेरिका की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम रही हैं और भारत के साथ उनका गहरा कनेक्शन है। साल 1964 में कैलिफोर्निया में जन्मीं हैरिस की मां भारतीय मूल की डॉक्टर थीं और उनके पिता जमैका के इकॉनमिस्ट। कमला की मां श्यामला गोपालन हमेशा से यह चाहती थीं कि उनके बच्चे अपनी भारतीय जड़ों से जुड़े रहें। श्यामला एक जानी-मानी कैंसर रिसर्चर और ऐक्टिविस्ट थीं। श्यामला ने अपना ग्रैजुएशन भी दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया था। पहले भी रच चुकी हैं इतिहास हैरिस दूसरी अश्वेत और पहली दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला थीं जो अमेरिकी कांग्रेस के अपर चेंबर तक पहुंची थीं। सीनेटर के तौर पर वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ मुखर रही हैं। हालांकि, विदेश नीति पर उन्होंने ट्रंप का समर्थन भी किया है। चुनावी कैंपेन में ट्रंप और रिपब्लिकन खेमे ने हैरिस पर खूब हमला किया है। बाइडेन के साथ पहली बार नजर आईं कमला ने कहा कि उनके जीवन में उनकी मां की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा, 'मेरी मां श्यामला ने मेरी बहन माया और मुझे यह सिखाते हुए बड़ा किया कि आगे बढ़ते रहना हमारे और अमेरिका की हर पीढ़ी के हाथ में हैं। वह बताती थीं कि बैठकर चीजों के बारे में शिकायत मत करो, कुछ करो।' माता-पिता से सीखा ऐक्टिविज्म उनके माता-पिता 1960 के दशक में सिविल राइट्स मूवमेंट के दौरान साथ आए और ओकलैंड की सड़कों पर न्याय के लिए चिल्लाते और मार्च करते हुए एक-दूसरे से मिले। कमला ने कहा कि वह संघर्ष आज भी जारी है। वह बताती हैं, 'मेरे पैरंट्स मुझे प्रदर्शनों में साथ ले जाते थे।' कमला ने कहा कि मां से प्रभावित होकर उन्होंने कानून में समान अधिकार को लेकर लड़ाई लड़ने का फैसला किया। इसके बाद कमला डिस्ट्रिक्ट अटर्नी और अटर्नी जनरल बनीं।
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