Monday, 25 January 2021

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इस्‍लामाबाद नया पाकिस्‍तान बनाने का वादा करके सत्‍ता में आए प्रधानमंत्री इमरान खान नियाजी देश को कर्ज के मकड़जाल में फंसाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। हालत यह है कि इमरान खान को अपने देश के संस्‍थापक मोहम्‍मद अली जिन्‍ना की पहचान को भी गिरवी रखना पड़ रहा है। कंगाल पाकिस्‍तान को अपने कर्ज को चुकाने के लिए अब लोन लेकर लोन देना पड़ रहा है। पाकिस्‍तानी की यह कंगाली अब ट्विटर पर टॉप ट्रेंड कर रही है और लोग कह रहे हैं कि पाकिस्‍तान चीन का उपनिवेश बनने जा रहा है। ट्विटर पर #PakBecomingChineseColony टॉप ट्रेंड कर रहा है। यही नहीं लोग चीन-पाकिस्‍तान आर्थिक कॉरिडोर और उसमें फैले भ्रष्‍टाचार को पाकिस्‍तान के उपन‍िवेश बनने की वजह बता रहे हैं। दरअसल, सीपीईसी में पाकिस्‍तानी सेना की मदद से चीनी कंपनियों के भ्रष्‍टाचार के कारण अब इस पूरे प्रॉजेक्‍ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पहले यह प्रॉजेक्‍ट करीब 46 अरब डॉलर का था जो अब बढ़कर करीब 87 अरब डॉलर का हो गया है। पाकिस्तान पर अब तक 5.7 अरब डॉलर की नई उधारी इसी वजह से कई विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि पाकिस्‍तान ब्रिटिश शासन की तरह एक बार फिर से चीन का गुलाम न बन जाए। गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया है। बची खुची पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की कमर कोरोना वायरस ने तोड़कर रख दी है। कंगाली की दहलीज पर खड़े पाकिस्तान ने अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए फिर से 1.2 बिलियन डॉलर (87,56,58,00,000 रुपये) का नया कर्ज लिया है। कर्ज की इस नई राशि के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में पाकिस्तान अब तक 5.7 अरब डॉलर (4,16,01,73,50,000 रुपये) की नई उधारी ले चुका है। सऊदी और यूएई ने भी पाकिस्तान से वापस मांगा कर्ज वहीं प्रधानमंत्री इमरान खान ढाई साल सरकार चलाने के बाद भी देश के खस्ता आर्थिक हालात के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार बता रहे हैं। पाकिस्तान में हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि सरकारी कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए भी इमरान खान सरकार को जोड़ तोड़ करना पड़ रहा है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा 'दाता' सऊदी अरब और यूएई अपने कई बिलियन डॉलर के कर्ज को वापस मांग रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त चीन भी अब पाकिस्तान को कर्ज देने में आनाकानी कर रहा है। महंगे ब्याज पर कर्ज ले रहा पाकिस्तान पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 के जुलाई-दिसंबर के दौरान इमरान खान सरकार को कई वित्तपोषण स्रोतों से बाहरी कर्जों के रूप में 5.7 बिलियन डॉलर की राशि मिली है। दिसंबर में पाकिस्तान सरकार ने विदेशों से 1.2 बिलियन डॉलर प्राप्त किए, जिसमें वाणिज्यिक बैंकों से महंगे ब्याज पर ली गई 434 मिलियन डॉलर की राशि भी शामिल है। पिछली सरकारों पर ठीकरा फोड़ रहे इमरान खान इमरान खान सरकार की लचर आर्थिक सुधारों के चलते साल 2020 के अंत तक पाकिस्तान का कुल कर्ज 11.5 फीसदी सालाना की दर से बढ़कर 35.8 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया है। जिसके बाद खुद की गलतियों के पिछली सरकारों पर डालते हुए पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय ने कहा कि पिछली सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण देश को अत्याधिक विनिमय दर और अत्यधिक उधारी का सामना करना पड़ रहा है।


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