लंदन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ऐलान किया है कि कोरोना वायरस के एक अज्ञात स्ट्रेन के खतरे से नागरिकों की रक्षा के लिए सोमवार से सभी ट्रेवेल कॉरिडोर पर बैन लगाया जाएगा। जॉनसन ने कहा कि कोई व्यक्ति जो दूसरे देश से ब्रिटेन आ रहा है, उसे यहां घुसने से पहले कोरोना पॉजिटिव नहीं होने का प्रूफ दिखाना होगा। इससे पहले ब्राजील में फैले कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के बाद दक्षिण अमेरिका और पुर्तगाल से यात्रियों के आने पर बैन लगा दिया गया था। प्रधानमंत्री जॉनसन ने कहा कि नए नियम कम से कम 15 फरवरी तक लागू रहेंगे। ब्रितानी पीएम ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब ब्रिटेन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 87 हजार को पार कर गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार को कोरोना वायरस के 55,761 मामले सामने आए। इस बीच कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को लगभग 20 लाख हो गई है। हालांकि कई देशों ने महामारी पर काबू पाने के लिए अपने यहां टीकाकरण शुरू कर दिया है लेकिन गरीब और कम विकसित देशों में टीका पहुंचने में दिक्कत है। '10 लाख लोग चार महीने से भी कम समय में मर गए' कोरोना वायरस दिसंबर 2019 में पहली बार चीन के वुहान शहर में सामने आया था। मृत्यु संबंधी आंकड़े ब्रसेल्स, मक्का और वियना की आबादी के बराबर हैं। बता दें कि शुरुआती 10 लाख लोगों की मौत आठ महीनों में हुई थी लेकिन अगले 10 लाख लोग चार महीने से भी कम समय में मर गए। मौत के ये आंकड़े दुनियाभर में सरकारी एजेंसियों द्वारा बताए गए हैं, जबकि बीमारी के कारण मृतकों की असल संख्या अधिक हो सकती है क्योंकि महामारी के शुरुआती दिनों में मौत होने के कई अन्य कारण भी बताए गए थे। ब्रॉउन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में महामारी विशेषज्ञ डॉ आशीष झा ने कहा कि काफी लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक समुदाय ने असाधारण काम किया है। अमेरिका, ब्रिटेन, इज़राइल, कनाडा और जर्मनी जैसे संपन्न देशों में लाखों लोगों को सुरक्षा देने का काम शुरू किया जा चुका है। उन्हें कम से कम टीके की एक खुराक दी गई है। कई ऐसे देश हैं जहां टीका पहुंचा ही नहीं है। ब्राजील, भारत के लिए यह साल भी चुनौतियों से भरा कई विशेषज्ञ अनुमान जता रहे हैं कि ईरान, भारत, मेक्सिको और ब्राजील में यह साल भी दुश्वारी भरा हो सकता है। दुनियाभर में कोविड-19 से मरने वालों में आधे लोग इन्हीं देशों से थे। अमीर देशों में टीकाकरण अभियान तो चल रहा है लेकिन गरीब देशों में इस अभियान को चलाने में कई बाधाएं हैं। इनमें कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली होना, लचर परिवहन व्यवस्था, भ्रष्टाचार और टीके को फ्रीज़र में रखने के लिए बिजली का अभाव शामिल हैं।
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