पेइचिंग चीन ने छोटे-छोटे बच्चों को मानसिक रूप से का अंधभक्त बनाने की तैयारियां शुरू कर दी है। जुलाई में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी समारोह आयोजित किया जाना है। जिसके ठीक पहले पार्टी की केंद्रीय समिति ने एक नए युवा संगठन चाइनीज यंग पायनियर्स के बीच वैचारिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें शी जिनपिंग का स्कूलों में गुणगान करने का आदेश दिया गया है। जिनपिंग के आदेशों का पालन करें बच्चे ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस गाइडलाइन में कहा गया है कि प्राथमिक विद्यालय के सभी बच्चों और माध्यमिक विद्यालय के पहले दो वर्षों के बच्चों के बीच शी जिनपिंग के विचारों की क्लासेज लगनी चाहिए। इन क्लासेज में जिनपिंग के आदेशों को पालन करने की शिक्षा दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि वे केवल वही करें जो शी जिनपिंग कहें। अब चीन के स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में 'शी थॉट' को पढ़ाया जाएगा। सरकारी कर्मचारी और सीपीसी के 9 करोड़ कार्यकर्ताओं को भी इसके बारे में बताया जाएगा। 'शी थॉट' को प्रचारित करने में जुटा चीन चीन में, राजनयिकों से लेकर अधिकारियों तक सभी को अपनी नीतियों में शी जिनपिंग के विचारों को शामिल करने का दबाव है। चीन में इसे 'शी थॉट' का नाम दिया गया है। उनपर चीनी राष्ट्रपति के सभी फर्जी सिद्धांतों को शामिल करने का भी दवाब है। इसके जरिए ड्रैगन अपने देश के बच्चों के मन में अभी से के प्रति वफादारी पैदा करना चाहता है। कम्युनिस्ट पार्टी की श्रेष्ठता का दे रहा हवाला इन दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि बच्चों को बताा जाए कि आज का सुखी जीवन अंतत पार्टी के सही नेतृत्व से आता है। इसके अलावा चीन अपने बच्चों को समाजवादी व्यवस्था की श्रेष्ठता की बात भी प्रचारित करने को कहा है। पीपुल्स डेली ने गुरुवार को सरकारी दिशा-निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि इसका मकसद राजनीतिक ज्ञान और मूल्यों के निर्माण को मजबूत करना है। शी थॉट में 14 सिद्धांत, सेना पर पार्टी के पूर्ण अधिकार पर जोर चीन ने शी थॉट्स को आज से तीन साल पहले ही मंजूरी दे दी थी। तब सीपीसी के सभी 2287 सदस्यों ने संविधान में 'शी थॉट' को शामिल करने के पक्ष में वोटिंग की थी। विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा था। इसमें चीनी सेना पर पार्टी के पूर्ण नियंत्रण की वकालत की गई है। इसके अलावा चीन के आधुनिक इतिहास में बदलाव लाना और एक देश, दो सिस्टम की महत्ता पर जोर देना शामिल है। इसके जरिए चीन ताइवान और हॉन्ग कॉन्ग के लोगों को चीन के प्रति प्रेरित करेगा। माओ के बराबरी पर पहुंचे जिनपिंग शी जिनपिंग के विचारों को संविधान में शामिल होते ही उन्होंने माओत्से तुंग की बराबरी कर ली है। चीन में जिनपिंग से पहले दो नेताओं के विचारों को संविधान में शामिल किया गया है। जिसमें पहले माओत्से तुंग और दूसरे देंग जियाओपिंग हैं। बड़ी बात यह है कि जिनपिंग और माओ के विचारों को उनके जिंदा रहते ही संविधान में शामिल कर लिया गया था, जबकि देंग जियाओपिंग के विचारों को उनके निधन के बाद शामिल किया गया था।
from World News in Hindi, दुनिया न्यूज़, International News Headlines in Hindi, दुनिया समाचार, दुनिया खबरें, विश्व समाचार | Navbharat Times https://ift.tt/3rierR9
via IFTTT
No comments:
Post a Comment