वॉशिंगटन अमेरिका के नए राष्ट्रपति ने यमन में सऊदी अरब के समर्थन वाले सैन्य अभियानों से समर्थन वापसी का ऐलान कर दिया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि पिछले छह साल के यमन में जारी हिंसा को खत्म किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति बाइडन ने वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग की यात्रा के दौरान कहा कि इस युद्ध को समाप्त करना है। अदन की खाड़ी के किनारे स्थित यमन पिछले कई साल से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच जंग का मैदान बना हुआ है। बाइडन ने यमन में नियुक्त किया विशेष दूत बाइडन ने इसके यमन में जारी हिंसा को खत्म करने के लिए वयोवृद्ध अमेरिकी राजनयिक टिमोथी लेंडरकिंग को अमेरिका का विशेष दूत बनाकर सना भेजा है। टिमोथी के जरिए अमेरिका न केवल यमन में खोई हुई अपनी इज्जत को वापस पाना चाहता है, बल्कि भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण इस इलाके पर अपनी पकड़ को भी बनाए रखना चाहता है। सऊदी को हथियारों की बिक्री भी रोकी संयुक्त राष्ट्र ने यमन को दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकट के रूप में बताया है। वहां 80 फीसदी लोगों के पास खाने की कमी है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर लोग अकाल का सामना कर रहे हैं। इस युद्ध के कारण न केवल यमन की करोड़ों की आबादी प्रभावित हुई है, बल्कि लाखों लोगों की मौत भी हो चुकी है। अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने के लिए के संचालन के लिए हथियारों की बिक्री सहित सभी अमेरिकी समर्थन को समाप्त कर दिया है। अदन की खाड़ी इतनी महत्वपूर्ण क्यों? अदन की खाड़ी से होकर दुनिया का आधा व्यापार होता है। जिसमें सबसे अधिक हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों का है। अगर किसी भी देश की सेना की पकड़ इस इलाके में मजबूत होती है तो वह अपने दुश्मनों के ऊर्जा जरूरतों को बंद कर सकता है। इसके अलावा इसी रास्ते से होकर स्वेज नहर के रास्ते समुद्री व्यापार होता है। अदन की सीमा सऊदी अरब और ओमान से लगती है। ईरान पर नरम और सऊदी पर गरम है बाइडन जो बाइडन का रूख ईरान को लेकर शुरू से नरम रहा है। यही कारण है कि ईरान ने संकेत दिया है कि वह ओबामा शासन में साइन किए गए परमाणु समझौते की ओर फिर से लौट सकता है। वहीं, बाइडन सऊदी अरब के प्रति कठोर रूख अपना चुके हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने ट्रंप के कार्यकाल के दौरान साइन हुए हथियारों की बिक्री पर रोक लगा दी थी।
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