लोकतंत्र के साथ ऐसी जबर्दस्ती कम ही होती है जैसी इस हफ्ते म्यांमार में देखने को मिली है। पिछले नवंबर में ही वहां चुनाव हुए थे जिनमें लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) को पहले से भी ज्यादा बहुमत देकर जिताया। यह पता होने के बावजूद कि चाहे जितना भी बड़ा बहुमत दे दें, न तो उनकी प्रिय नेता सरकार की प्रमुख बनेंगी और न उस सरकार को शासन चलाने की पूरी स्वतंत्रता मिलेगी।
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