Friday, 26 February 2021

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प्योंगयांग उत्तर कोरिया में तैनात रूसी राजनयिकों को अपने परिवारों के साथ हाथ से ढकेलने वाली ट्रॉली पर सामान रखकर मॉस्को रवाना होना पड़ा है। जिसके बाद से रूसी राजनयिकों की इस यात्रा की उनके अपने ही देश में खूब आलोचना हो रही है। किसी भी देश में विदेशी राजनयिकों को प्रोटोकॉल के अनुसार विशेष सुविधाएं प्राप्त होती हैं। उन्हें न तो एयरपोर्ट पर चेक किया जाता है और न ही गिरफ्तार किया जा सकता है। उत्तर कोरिया का अपने पड़ोसी देश रूस के साथ संबंध भी अच्छे हैं। ऐसे में मित्र देश से राजनयिकों को अपने परिवार के साथ पैदल जाने पर रूसी विदेश मंत्रालय की खासी आलोचना हो रही है। 34 घंटे की यात्रा कर प्योंगयांग से पहुंचे रूस उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में स्थित रूसी दूतावास में तैनात 8 राजनयिकों को परिवार के साथ अपने वतन जाने के लिए रेललाइन के सहारे लगभग 34 घंटे की यात्रा करनी पड़ी है। इस दौरान इन राजनयिकों के परिवार भी उनके साथ थे। इन लोगों ने अपने सामानों को रेललाइन पर हाथ से ढकेलने वाले एक ट्रॉली पर रखा हुआ था। जिसे बच्चे और बड़े बारी-बारी से धक्का लगाकर आगे बढ़ा रहे थे। उत्तर कोरिया की सभी फ्लाइट्स बंद और बॉर्डर सील उत्तर कोरिया से रूस का व्लादिवोस्तोक शहर सबसे नजदीक है। उत्तर कोरिया की सरकारी एयरलाइन एयर कोरियो प्योंगयांग से व्लादिवोस्तोक तक के लिए फ्लाइट सर्विस देती है, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण पिछले कई महीनों से इस फ्लाइट पर प्रतिबंध लगा हुआ है। उत्तर कोरिया ने अपनी जमीनी सीमा को भी पिछले साल फरवरी से ही सील कर रखा हुआ है। किसी को भी न तो उत्तर कोरिया आने की और न ही यहां से बाहर जाने की इजाजत है। रूसी दूतावास ने दी सफाई प्योंगयांग में स्थित रूसी दूतावास ने बयान जारी कर कहा है कि हमारे राजनयिकों के पास अपने देश जाने के लिए यही एक तरीका बचा हुआ था। शुरुआत में इन राजनयिकों के परिवारों की यात्रा ट्रेन के जरिए प्रारंभ की। इन लोगों ने उत्तर कोरिया के पुराने, खराब मेंटीनेंस के लिए कुख्यात धीमी रेल लाइन पर यात्रा करने में 32 घंटे बिताए। जिसके बाद वे बस के जरिए दो घंटे का सफर कर बॉर्डर के नजदीक पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद उन्हें रेलवे लाइन पर हाथ से ढकेलने वाली एक ट्रॉली दी गई। जिसके जरिए इन लोगों ने अपनी बाकी बची यात्रा पूरी की। रूस में हो रही आलोचना इस यात्रा की तस्वीरों को प्योंगयांग में स्थित रूसी दूतावास के ट्विटर हैंडल पर भी पोस्ट किया गया है। जिसके बाद से उत्तर कोरिया में रूसी राजनयिकों की बेज्जती को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। अधिकतर यूजर रूस की विदेश नीति और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव पर निशाना साध रहे हैं। दरअसल इन दोनों देशों में संबंध बहुत अच्छे हैं, जिसके बावजूद राजनयिकों के साथ ऐसे व्यवहार से पूरी दुनिया चकित है।


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