जर्मनी पुलिस बिटकॉइन फर्जीवाड़े में बड़ी रकम जब्त कर सकती है। पुलिस ने एक ठग से 50 मिलियन यूरो यानी करीब 438 करोड़ की कीमत के बिटकॉइन जब्त किए हैं। हालांकि, अब पेच इतना फंसा है कि यह ठग जेल जा जा चुका है, पूछताछ का सामना कर चुका है लेकिन पासवर्ड देने को तैयार नहीं है। इसकी वजह से पुलिस 1700 से भी ज्यादा बिटकॉइन को कैश नहीं करा पा रही है। हाल के हफ्तों में बिटकॉइन की कीमत आसमान छूने लगी है जिसकी वजह से प्रशासन इसे जल्दी कैश कराना चाहता है लेकिन आरोपी ऐसा होने नहीं दे रहा है।Bitcoin Fraud: जर्मनी में एक बिटकॉइन चोर के पास 1700 से ज्यादा बिटकॉइन हैं और अब इसकी बढ़ी कीमतें देख प्रशासन इसे कैश कराना चाहता है लेकिन आरोपी पासवर्ड नहीं दे रहा।

जर्मनी पुलिस बिटकॉइन फर्जीवाड़े में बड़ी रकम जब्त कर सकती है। पुलिस ने एक ठग से 50 मिलियन यूरो यानी करीब 438 करोड़ की कीमत के बिटकॉइन जब्त किए हैं। हालांकि, अब पेच इतना फंसा है कि यह ठग जेल जा जा चुका है, पूछताछ का सामना कर चुका है लेकिन पासवर्ड देने को तैयार नहीं है। इसकी वजह से पुलिस 1700 से भी ज्यादा बिटकॉइन को कैश नहीं करा पा रही है। हाल के हफ्तों में बिटकॉइन की कीमत आसमान छूने लगी है जिसकी वजह से प्रशासन इसे जल्दी कैश कराना चाहता है लेकिन आरोपी ऐसा होने नहीं दे रहा है।
बिना पासवर्ड कैसे खुले खजाना?

अभियोजन पक्ष के वकील सबैस्टियन म्यूरर का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है लेकिन वह कुछ बता नहीं रहा है। शायद उसे पता न हो। बिटकॉइन को डिजिटल वॉलट में स्टोर किया जाता है जो इन्क्रिप्शन के जरिए प्रोटेक्ट की जाती है। इसे खोलने के लिए डिक्रिप्शन की चाहिए होती है जिससे बिटकॉइन का ऐक्सेस मिलता है। बिना पासवर्ड के वॉलट नहीं खुल सकता है और बिटकॉइन कैश नहीं हो सकता।
बिटकॉइन की कीमतें आसमान पार

आरोपी को दूसरे कंप्यूटरों पर चोरी से सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर बिटकॉइन पैदा करने के आरोप में दो साल की जेल दी गई थी। जब उसे जेल भेजा गया, उसके बिटकॉइन की कीमत आज की तुलना में एक चौथाई रही होगी। पिछले साल के बाद से बिटकॉइन की कीमत में भारी इजाफा हुआ है और इस साल जनवरी में यह सबसे ज्यादा 42 हजार डॉलर पर पहुंच गया था। ऐसे में प्रशासन के लिए बिटकॉइन का यह जखीरा किसी खजाने से कम नहीं है और वह इसे जल्द से जल्द कैश कराना चाहता है लेकिन अभी तक आरोपी की चुप्पी तुड़वाई नहीं जा सकी है।
...कचरे में फेंक दी 'की'

इससे पहले ब्रिटेन का मामला सामने आया था जहां वेल्श आईटी इंजिनियर जेम्स हॉवेल्स ने गलती से 2013 में अपनी हार्ड ड्राइव कचरे में फेंक दी थी जिसमें बिटकॉइन का कोड था। वह अब तक न्यूपोर्ट सिटी काउंसिल से उसे डंपयार्ड में ढूंढने की रिक्वेस्ट कर रहे हैं ताकि उन्हें वह कोड मिल जाए। हालांकि, प्रशासन पर्यावरण और आर्थिक बोझ का हवाला देकर इसकी इजाजत नहीं दे रहा। वेल्श के पास 7,500 बिटकॉइन थे जिनकी कीमत करीब 20 अरब रुपये है।
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