पेइचिंग लद्दाख के गलवान घाटी में पीएलए के चार सैनिकों की मौत के खुलासे के बाद से चीन में बवाल मचा हुआ है। वहां के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारत विरोधी संदेशों की बाढ़ आई हुई है। गुस्साए चीनी अब पेइचिंग में स्थित भारतीय दूतावास के वीवो अकाउंट पर जमकर गाली-गलौज कर रहे हैं। बता दें कि गलवान हिंसा के 8 महीने बाद चीन ने शुक्रवार को पहली बार स्वीकार किया था कि भारतीय सैनिकों के साथ झड़प में उसके चार सैनिक मारे गए थे। जिसके बाद चीनी जनता शी जिनपिंग से इतने दिन सच को छिपाए रखने को लेकर सवाल भी पूछ रही है। भारतीय दूतावास के सोशल मीडिया अकाउंट को बनाया निशााना हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय दूतावास के वीवो अकाउंट पर अपमानजनक संदेश और अपशब्दों की बाढ़ आई हुई है। चीन के कई शहरों में मारे गए सैनिकों के सम्मान में श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया जा रहा है। हालांकि, चीन ने इसमें भी गोलमोल करते हुए केवल उन्हीं सैनिकों के नाम जारी किए हैं जिन्हें सम्मानित किया गया है। चीन की सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पीएलए के सैनिकों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी प्रकाशित करने के लिए एक व्यक्ति को नानजिंग शहर में गिरफ्तार किया गया था। चीन में इसलिए ज्यादा भावुक हुई जनता दरअसल, चीन में बड़ी आबादी ऐसी है जिन्होंने गलवान झड़प के पहले किसी विदेशी सेना के साथ संघर्ष में अपने सैनिकों का बलिदान नहीं देखा है। बताया जा रहा है कि इससे पहले वियतनाम के साथ झड़प में चीनी सैनिक मारे गए थे। ऐसे में चीन का युवा वर्ग अपने सैनिकों के मारे जाने पर कुछ ज्यादा ही आक्रोशित है। चीन में ट्विटर बैन है जिसकी जगह वीवो का प्रयोग किया जाता है। सैनिकों की वापसी से घर में ही घिरा हुआ है ड्रैगन दरअसल चीन लद्दाख में तनाव के शुरू होने के बाद से ही चौतरफा घिरा हुआ है। भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई ने तो पहले से ही पीएलए के सैनिकों के हौसले तोड़ दिए थे। इस बीच पैंगोंग झील से सैनिकों की वापसी को लेकर चीन की अपने ही देश में खासी आलोचना हो रही थी। चीनी लोग सेना और कम्युनिस्ट पार्टी से सवाल पूछ रहे थे कि इतने दिनों से जारी तनाव के बाद आखिर सेना पीछे क्यों लौट रही है। 45 सैनिकों मौत के दावे से परेशान था चीन इसमें बची हुई कसर रूस की न्यूज एजेंसी तास ने पूरा कर दिया। तास ने 10 फरवरी को अपनी खबर में गलवान हिंसा में चीन के 45 सैनिकों के मौत का दावा किया था। जिसके बाद से चीन में हड़कंप मचा हुआ था। चीन सहित दुनियाभर के लोगों को तास की खबर पर इसलिए ज्यादा भरोसा है क्योंकि गलवान में हिंसक झड़प के बाद रूस की अगुवाई में ही भारत और चीन के बीच राजनीतिक स्तर पर पहली बातचीत हुई थी।
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