पेइचिंग लद्दाख के गलवान घाटी में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच हुई झड़प का एक और वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में गलवान नदी के दोनों तरफ बड़ी संख्या भारतीय और चीनी सैनिक दिखाई दे रहे हैं। ये जवान लाउडस्पीकर के जरिए आपस में बातचीत करते भी सुनाई दे रहे हैं। जिसमें चीनी सैनिक कहते हैं कि भारतीय सेना के लीडर आए हुए हैं। जिसपर दूसरा चीनी सैनिक कहता है कि लीडर आये हैं तो क्या। जिसके जवाब में नदी की दूसरी तरफ खड़े भारतीय जवान माइक में कहते हैं कि गड़बड़ करना बंद करो, हमारे लीडर आए हुए हैं। पहले भी चीनी मीडिया ने जारी किया था गलवान हिंसा का वीडियो चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने शुक्रवार को गलवान में चार सैनिकों के मारे जाने का सच स्वीकारने के बाद शाम को एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में भारतीय और चीनी सेना के बीच हुए संघर्ष के कुछ फुटेज दिखाए गए थे। इस एडिटेड वीडियो की सहायता से चीन खुद को बेचारा और विक्टिम साबित करना चाहता था। जबकि सच यह है कि चीनी सैनिकों ने नुकीले तार लगे रॉड की सहायता से भारतीय सैनिकों पर हमला किया था। इस वीडियो के अंत में गलवान में मारे गए चार चीनी सैनिकों की तस्वीर भी दिखाई गई थी जिन्हें ड्रैगन ने सम्मानित किया था। वीडियो जारी कर विक्टिम कार्ड खेल रहा चीन दरअसल, इस वीडियो को जारी कर खुद को विक्टिम दिखाने की कोशिश कर रहा है। चीन इस एडिटेड वीडियो के जरिए यह जताना चाहता है कि हिंसा की शुरुआत भारत ने की थी। जबकि, सच्चाई से पूरी दुनिया वाकिफ है। ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के रिसर्चर नाथन रुसर ने दावा किया है कि जियोलोकेटर की मदद से पता चलता है कि झड़प वाली जगह भारतीय सीमा के अंदर लगभग 50 मीटर अंदर थी। सैनिकों की वापसी से घर में ही घिरा हुआ है ड्रैगन दरअसल चीन लद्दाख में तनाव के शुरू होने के बाद से ही चौतरफा घिरा हुआ है। भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई ने तो पहले से ही पीएलए के सैनिकों के हौसले तोड़ दिए थे। इस बीच पैंगोंग झील से सैनिकों की वापसी को लेकर चीन की अपने ही देश में खासी आलोचना हो रही थी। चीनी लोग सेना और कम्युनिस्ट पार्टी से सवाल पूछ रहे थे कि इतने दिनों से जारी तनाव के बाद आखिर सेना पीछे क्यों लौट रही है। 45 सैनिकों मौत के दावे से परेशान था चीन इसमें बची हुई कसर रूस की न्यूज एजेंसी तास ने पूरा कर दिया। तास ने 10 फरवरी को अपनी खबर में गलवान हिंसा में चीन के 45 सैनिकों के मौत का दावा किया था। जिसके बाद से चीन में हड़कंप मचा हुआ था। चीन सहित दुनियाभर के लोगों को तास की खबर पर इसलिए ज्यादा भरोसा है क्योंकि गलवान में हिंसक झड़प के बाद रूस की अगुवाई में ही भारत और चीन के बीच राजनीतिक स्तर पर पहली बातचीत हुई थी।
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