इस्लामाबाद पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक सुरक्षा जांच चौकी पर अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की जिससे अर्द्धसैनिक बल के चार जवानों की मौत हो गयी। शुक्रवार को सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि यह हमला गुरुवार को कोहलू जिले के कहान इलाके में हुआ। वहीं बलूचिस्तान के पश्चिमी बाइपास इलाके में हुए एक बम हमले में एक जवान की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए हैं। सूत्रों ने बताया कि बंदूकधारियों ने जमान खान जांच चौकी पर हमला किया जिसके परिणाम स्वरूप फ्रंटियर कोर के चार जवानों की मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि इस घटना में एक जवान घायल हुआ है। वहीं दूसरी घटना बाइपास इलाके में हुई जहां रिमोट बम हमले में एक जवान की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए। यह बम एक मोटरसाइकिल में रखा गया था। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक विद्रोहियों ने यह बम अर्द्धसैनिक बलों की गाड़ी के पास खड़ा किया था। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इससे पहले पिछले साल ही अक्टूबर महीने में उग्रवादियों ने पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा में जा रहे पाकिस्तानी तेल एवं गैस कर्मचारियों के काफिले पर हमला किया, जिसमें 14 जवान मारे गए थे। पहले भी होते रहे हैं हमले पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया था कि उग्रवादियों के इस हमले में पाकिस्तानी ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी के सात कर्मचारी मारे गए। इसके अलावा काफिले की सुरक्षा कर रही पाकिस्तान फ्रंटियर कोर के 6 सैनिकों की भी मौत हुई है। इस इलाके में पहले भी सुरक्षाबलों पर बड़े पैमाने पर हमले होते आए हैं। वहीं गुरुवार को ही आतंकियों ने उत्तरी वजीरिस्तान में एक और सैन्य काफिले को निशाना बनाया। इस हमले में पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी समेत छह सैन्यकर्मी मारे गए। सेना ने एक बयान में कहा कि आतंकवादियों ने उत्तरी वजीरिस्तान के रजमाक क्षेत्र के पास आईईडी के जरिए सैन्य काफिले को निशाना बनाया। कौन हैं बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की शुरुआत 1970 के दशक में ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो के शासनकाल में हुई थी। उस समय इस छोटे से आतंकी संगठन ने बलूचिस्तान के इलाके में पाक सेना के नाक में दम कर रखा था। जब पाकिस्तान में सैन्य तानाशाह जियाउल हक सत्ता में आए तो उन्होंने बलूच नेताओं से बातचीत कर इस संगठन के साथ अघोषित संघर्ष विराम कर लिया। इस संगठन में मुख्य रूप से पाकिस्तान के दो ट्राइब्स मिरी और बुगती लड़ाके शामिल हैं। परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल से भड़का बलोचों का गुस्सा उस समय से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी काफी समय तक किसी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दिया। लेकिन, जब परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान में सत्ता संभाली तब साल 2000 के आसपास बलूचिस्तान हाईकोर्ट के जस्टिस नवाब मिरी की हत्या हो गई। पाकिस्तानी सेना ने सत्ता के इशारे पर इस केस में बलूच नेता खैर बक्श मिरी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से बलूच लिबरेशन आर्मी ने अपने ऑपरेशन को फिर से शुरू कर दिया।
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