एक ओर जहां महीनों चली बातचीत के दौर के बाद लद्दाख में भारत और चीन की सेनाएं पीछे हटने लगी हैं, सरकारी चीनी मीडिया आग में घी डालने का काम करता दिख रहा है। चीनी सेना के आधिकारिक अखबार ‘पीएलए डेली’ ने शुक्रवार को खुलासा किया कि सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ऑफ चाइना (CMC) ने उन 4 सैन्य अधिकारियों और जवानों को अलग-अलग उपाधियों से नवाजा जो जून 2020 में गलवान घाटी में भारत के साथ सीमा पर संघर्ष में मारे गए थे। वहीं, ग्लोबल टाइम्स ने एक वीडियो जारी कर हिंसा का आरोप भारत पर मढ़ने की नाकाम कोशिश भी की। हालांकि, सेना की ओर से जारी स्टोरी को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन ताजा खुलासों के जरिए चीन आधा सच दुनिया के सामने रख रहा है।India China Galwan Clash Video: चीन ने पिछले साल गलवान घाटी में मारे गए अपने सैनिकों को सम्मानित किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सैनिकों का मारा जाना कबूल करके चीन पूरा सच नहीं बता रहा है।

एक ओर जहां महीनों चली बातचीत के दौर के बाद लद्दाख में भारत और चीन की सेनाएं पीछे हटने लगी हैं, सरकारी चीनी मीडिया आग में घी डालने का काम करता दिख रहा है। चीनी सेना के आधिकारिक अखबार ‘पीएलए डेली’ ने शुक्रवार को खुलासा किया कि सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ऑफ चाइना (CMC) ने उन 4 सैन्य अधिकारियों और जवानों को अलग-अलग उपाधियों से नवाजा जो जून 2020 में गलवान घाटी में भारत के साथ सीमा पर संघर्ष में मारे गए थे। वहीं, ग्लोबल टाइम्स ने एक वीडियो जारी कर हिंसा का आरोप भारत पर मढ़ने की नाकाम कोशिश भी की। हालांकि, सेना की ओर से जारी स्टोरी को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन ताजा खुलासों के जरिए चीन आधा सच दुनिया के सामने रख रहा है।
सच छिपा रहा चीन?

चीन की आक्रामकता पर न सिर्फ दुनिया भर के सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स ने नजरें गड़ा रखी हैं, उसकी रणनीतियों को भी बखूबी समझा जा रहा है। एक ओर जहां लोग इस बात पर हैरान हैं कि आखिर चीन ने अपनी प्रकृति से उलट 'विदेशी सेना' के हाथों अपने सैनिकों के मारे जाने की बात कबूल कैसे की, मैसच्यूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में चीन की विदेश और सुरक्षा नीतियों पर रिसर्चर एम टेलर फ्रैवल याद दिलाते हैं कि चीन की सेना ने पूरी बात नहीं बताई है। उनका कहना है कि PLA डेली स्टोरी CMC के गैलेंट्री अवॉर्ड्स देने और इन पांच सैनिकों के ऐक्शन पर थी। इस स्टोरी में घटना का पूरा विवरण नहीं दिया गया है और न इसके जरिए असल में सभी हताहतों की जानकारी दी गई है।
भारत पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश

इससे पहले चीन ने वीडियो जारी कर खुद को विक्टिम दिखाने की कोशिश की थी। चीन इस वीडियो के जरिए यह जताना चाहता है कि हिंसा की शुरुआत भारत ने की थी। जबकि, सच्चाई से पूरी दुनिया वाकिफ है।ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटजिक पॉलिसी इंस्टिट्यूट के रिसर्चर नाथन रुसर ने दावा किया है कि जियोलोकेटर की मदद से पता चलता है कि झड़प वाली जगह भारतीय सीमा के अंदर लगभग 50 मीटर अंदर थी।
अपने ही देश में आलोचना

दरअसल चीन लद्दाख में तनाव के शुरू होने के बाद से ही चौतरफा घिरा हुआ है। पहले भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई ने PLA सैनिकों के हौसले तोड़ दिए और फिर पैंगोंग झील से वापसी पर चीन की अपने ही देश में खासी आलोचना हो रही थी। चीनी लोग सेना और कम्युनिस्ट पार्टी से सवाल पूछ रहे थे कि इतने दिनों से जारी तनाव के बाद आखिर सेना पीछे क्यों लौट रही है।
असल में कहीं ज्यादा सैनिक गंवाए

इसमें बची हुई कसर रूस की न्यूज एजेंसी तास ने पूरा कर दिया। तास ने 10 फरवरी को अपनी खबर में गलवान हिंसा में चीन के 45 सैनिकों के मौत का दावा किया था। जिसके बाद से चीन में हड़कंप मचा हुआ था। चीन सहित दुनियाभर के लोगों को तास की खबर पर इसलिए ज्यादा भरोसा है क्योंकि गलवान में हिंसक झड़प के बाद रूस की अगुवाई में ही भारत और चीन के बीच राजनीतिक स्तर पर पहली बातचीत हुई थी।
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