हनोई चीन ने दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव के बीच अब वियतनाम के पास मिसाइल बेस बनाया है। चीनी सेना ने यहां जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को तैनात किया है। गुरुवार को वियतनामी विदेश मंत्रालय ने एक एनजीओ की सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रही चीनी मिसाइल बेस को लेकर जांच कराने की बात की है। बता दें कि दिसंबर के अंत में वियतनाम के प्रधानमंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। जिसके बाद से ही चीन चिढ़ा हुआ है। वियतनाम बॉर्डर से 20 किमी दूर बनाया मिसाइल बेस वियतनामी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ले ती तू हांग ने कहा कि स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में आई इस तस्वीर के सत्यता की हम जांच कर रहे हैं। चीन का यह मिसाइल बेस वियतनाम की सीमा से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर बना है। बताया जा रहा है कि वियतनाम के साथ संबंधों में आई खटास के बाद दबाव बनाने की रणनीति के अंतर्गत चीन ने इस मिलाइस बेस को गुआंग्शी प्रांत के निगमिंग काउंटी में तैयार किया है। साउथ चाइना सी पर चीन की नजर साउथ चाइना सी नाम के एनजीओ ने चीन की चाल का खुलासा करते हुए कहा कि इस मिसाइल बेस के पास ही एक हेलिकॉप्टर बेस को भी बनाया गया है। इत सैटेलाइट तस्वीर में मिसाइल के 6 लॉन्चर साफ-साफ दिखाई दे रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले ही चीन ने ऐलान किया था कि उसकी वायुसेना के बमवर्षक विमानों ने अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस थियोडोर रुजवेल्ट पर हमले की मॉक ड्रिल की है। भारत के ब्रह्मोस को खरीदने की प्लानिंग कर रहा वियतनाम वियतनाम जल्द ही भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को खरीदने की प्लानिंग कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह डील भारत के पक्ष से ही लटकी हुई है। जैसे ही भारत सरकार इसके लिए हरी झंडी दे देती है, वैसे ही यह डील फाइनल हो जाएगी। माना जा रहा है कि भारत को डर है कि अगर चीन के पड़ोसी देशों को यह मिसाइल दी गई तो इससे ड्रैगन के साथ हमारे संबंध और खराब हो सकते हैं। 2018 में जब भारत ने वियतनाम एयरफोर्स के पायलटों को सुखोई एसयू 30 एमकेआई को उड़ाने की ट्रेनिंग दी थी, तब भी चीनी मीडिया में इसकी कड़ी प्रतिक्रिया देखी गई थी। चीनी सेना का काल बनेगी ब्रह्मोस मिसाइल दक्षिण चीन सागर में गश्त लगाने वाली चीनी नौसेना के लिए भारत की यह मिसाइल काल बन सकती है। यह दुनिया की एकमात्र ऐसी मिसाइल है जो समुद्र, पानी और हवा तीनों माध्यम से फायर की जा सकती है। यह मिसाइल 300 किलोग्राम तक पारंपरिक और परमाणु वारहेड ले जाने के साथ अपने निशाने को सटीकता के साथ भेदने में सक्षम है। इसकी स्पीड भी 2.8 मैक से ज्यादा है। इस कारण कोई भी चीनी मिसाइल रक्षा प्रणाली भारत के ब्रह्मोस को रोक नहीं सकती है। भारत से 12 हाई स्पीड पेट्रोल बोट भी खरीद रहा वियतनाम भारत ने वियतनाम को हथियार खरीदने के लिए पहले ही 36,78,54,50,000 रुपये का लाइन ऑफ क्रेडिट दिया है। माना जा रहा है कि इस सौदे में ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद भी शामिल है। भारत वर्तमान में क्रेडिट योजना के तहत वियतनाम को 100 मिलियन डॉलर की लागत वाली 12 हाई स्पीड पेट्रोल शिप दे रहा है। इन शिप्स को सीमा की रखवाली कर रहे वियतनाम बॉर्डर गार्ड के लिए बनाया जा रहा है।
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