Tuesday, 23 March 2021

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इस्लामाबाद पाकिस्तान आज अपना राष्ट्रीय दिवस मना रहा है। इस दिन को यौम-ए-पाकिस्तान के नाम से भी जाना जाता है। 23 मार्च 1940 को अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में मुसलमानों के लिए एक अलग देश बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी लाहौर प्रस्ताव के आधार पर मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए अलग देश स्थापित करने के लिए आंदोलन शुरू किया था। कहा जाता है कि 1947 को भारत-पाकिस्तान के बीच बंटवारे की पटकथा भी आज ही लिखी गई थी। भारत और पाकिस्तान दोनों देशों को एक साथ आजादी मिली थी। आज एक देश चांद और मंगल ग्रह तक अपनी पहुंच बना लिया है, वहीं दूसरा देश कंगाल होने की राह पर आगे बढ़ रहा है। जिन्ना के सपनों का पाकिस्तान बनाने का वादा कर सत्ता में आए प्रधानमंत्री ने देश को कहां पहुंचाया जानिए यहां... जिन्ना ने कैसे पाकिस्तान की परिकल्पना की थी? भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में आम धारणा यह है कि जिन्ना चाहते थे कि मुसलमानों का मुल्क पाकिस्तान बने और यहां इस्लामिक नियम-कानून लागू हों। हालांकि, 11 अगस्त 1947 को संविधान सभा को संबोधित करते हुए जिन्ना ने साफ कहा था, 'आप पाकिस्तान में अपने मंदिरों में जाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं, आप मस्जिदों में जा सकते हैं या जिस भी पंथ को मानते हैं आप अपने हिसाब से पूजा-पाठ आदि कर सकते हैं। आप किसी भी धर्म या जाति या पंथ का पालन कर सकते हैं- देश का इससे कोई लेनादेना नहीं होगा।' हालांकि आज पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किसी से छिपा नहीं है। पाकिस्तानी सेना को लेकर जिन्ना के क्या थे विचार इतना ही नहीं, जिन्ना ने पाकिस्तान में आर्मी की भूमिका का भी स्पष्टतौर पर जिक्र किया था। 14 जून 1948 को क्वेटा में अफसरों को दिए संदेश में पाक नेता ने कहा था, 'एग्जीक्यूटिव अथॉरिटी पाकिस्तान सरकार के हेड (जो गवर्नर जनरल हैं) से शुरू होती है और इस तरह से कोई भी कमांड या आदेश उनकी अनुमति के बगैर जारी नहीं किया जा सकता है।' लेकिन, पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में सेना ही सबकुछ है। पाकिस्तान के ही विपक्षी नेता आरोप लगाते रहे हैं कि इमरान खान को पाकिस्तानी सेना ने कुर्सी पर बैठाया है। इमरान खान की विचारधारा क्या है? पिछले 3 साल से ज्यादा समय से पाकिस्तान की सत्ता संभाल रहे इमरान खान कट्टर इस्लामिक नेता हैं। इमरान खान कह चुके हैं कि वह ईशनिंदा कानून का पूरा समर्थन करते हैं और इसका बचाव करेंगे। दरअसल, पाकिस्तान में इस कानून पर काफी विवाद है जिसका शिकार अक्सर अल्पसंख्यक होते हैं और इसमें मौत की सजा दिए जाने का प्रावधान है। इमरान कट्टरपंथियों के करीबी माने जाते हैं और चुनाव में कुछ आतंकी संगठनों ने उन्हें समर्थन भी दिया था। इसी नजदीकी के कारण इमरान को 'तालिबान खान' के नाम से पुकारा जाता है। जिन्‍ना के कर्मों की सजा भुगत रहा है पाकिस्‍तान! मोहम्‍मद अली जिन्‍ना ने भारत से अलग पाकिस्‍तान को बना तो लिया लेकिन वह भूल गए कि इस नए देश को धर्म के नाम पर बनाया गया है। इस नए देश को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश बनाए रखने और धार्मिक कट्टरपंथियों से दूर रखने के लिए महत्‍वपूर्ण प्रयास करना होगा। वस्‍तुत: जिन्‍ना ही वह वजह थे जिससे पाकिस्‍तान इस्‍लामिक गणराज्‍य बनने की ओर आगे बढ़ा। उन्‍होंने उस समय सेना पर भरोसा किया जब पाकिस्‍तान का नया-नया जन्‍म हुआ था। जिन्‍ना दूरदर्शी नहीं थे और उन्‍होंने वर्ष 1947 में पाकिस्‍तानी सेना को भारत के खिलाफ जम्‍मू-कश्‍मीर में आक्रामक कार्रवाई शुरू करने का आदेश दे दिया। अब पाकिस्‍तान उनके इस गलत कदम की सजा भुगत रहा है। अल्पसंख्यकों पर रोज हो रहे अत्याचार इमरान खान के गृह राज्य खैबर पख्तूनख्वा में हिंदुओं के मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। पाकिस्तान का सिंध सूबा तो धर्म परिवर्तन के लिए पूरी दुनिया में बदनाम है। पिछले 40 दिनों के अंदर चार हिंदु लड़कियों का अपहरण कर उनका धर्म परिवर्तन किया जा चुका है। बड़ी बात यह है कि इनमें तीन लड़कियां नाबालिग हैं। पाकिस्तान में हर साल करीब 1000 हिंदु और ईसाई लड़कियों का अपहरण कर धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। इसके अलावा मुसलमानों में भी अल्पसंख्यक कौम हमेशा से कट्टरपंथियों का निशाना बनते आए हैं। इसका ताजा उदाहरण हजारा समुदाय के लोग हैं। जिनके कई लोगों को आतंकियों ने दिनदहाड़े अगवा कर हत्या कर दी थी।


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