वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का नाम भूल गए। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी वाले एक सवाल पर बाइडन ने गनी की जगह कियानी का नाम लिया। जिसके बाद सोशल मीडिया में उनकी खूब खिंचाई हुई। दरअसल, कियानी पाकिस्तानी सेना के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं उनका पूरा नाम जनरल अशरफ परवेज कियानी है। उपराष्ट्रपति रहने के दौरान जो बाइडन और जनरल कियानी की कई बार मुलाकातें भी हुई थी। बाइडन के इस बयान पर बिफरे लोग अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली प्रेस कांफ्रेंस में एक पत्रकार ने सवाल किया कि क्या अमेरिकी सैनिक 1 मई को पहले से निर्धारित डेडलाइन पर अफगानिस्तान को छोड़ देंगे। इस पर जवाब देते हुए बाइडन ने कहा कि हम लंबे समय तक नहीं रह रहे हैं। हम जल्द ही अफगानिस्तान को छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि... जनरल ऑस्टिन (अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड जे ऑस्टिन) अभी कयानी (अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी) से मिले हैं। वह काबुल में अफगानिस्तान के नेता हैं ... मैं बस उस पर एक ब्रीफिंग इंतजार कर रहा हूं। जो बाइडन की लोगों ने की खिंचाई जो बाइडन के इस बयान के बाद ट्विटर पर लोगों ने उनकी खिंचाई शुरू कर दी। कई लोगों ने उन्हें अशरफ गनी के नाम का उच्चारण सीखने की सलाह दी। वहीं कई ऐसे भी थे जिन्होंने कियानी और गनी की तस्वीरें ट्वीट कर दोनों के बीच का फर्क भी बताया। सोशल मीडिया में बाइडन के खिलाफ गुस्से का इजहार करन वाले लोगों में अफगानिस्तानी यूजर्स की संख्या ज्यादा थी। अफगानिस्तान के गुप्त दौरे पर अमेरिकी रक्षा मंत्री अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड जे ऑस्टिन ने भारत दौरे के तुरंत बाद अफगानिस्तान की एक गुप्त यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से मुलाकात भी की। माना जा रहा है कि इस बैठक में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और तालिबान के साथ जारी शांति वार्ता को लेकर चर्चा हुई। अमेरिका पहले ही कह चुका है कि वह तालिबान की तरफ से शांति के प्रयासों की समीक्षा करेगा, जिसके बाद वह इस आतंकी गुट के साथ किए गए समझौते को आगे बढ़ाने की सोचेगा। तालिबान अब भी कर रहा आतंकी हमले तालिबान के साथ शांति वार्ता के बीच में राजधानी काबुल सहित कई इलाकों में कई आतंकी वारदातें हुई हैं। अफगानिस्तान की सरकार ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर तालिबान को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, अमेरिका भी तालिबान के ऊपर शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनाने के लिए दबाव बढ़ा रहा है। राष्ट्रपति अशरफ गनी पहले ही साफ कर चुके हैं कि तालिबान के साथ शांति समझौते का मतलब उनको सत्ता का भागीदार बनाना नहीं है।
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