Friday, 26 March 2021

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जिनेवा भारत ने इजरायल के साथ अपनी दोस्ती को दुनिया के सबसे बड़े मंच पर फिर से एक बार साबित किया है। में इजरायल के खिलाफ में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर लाए गए प्रस्ताव पर भारत ने वोटिंग नहीं की है। बताया जा रहा है कि कूटनीतिक रास्ते से इजरायल ने इस प्रस्ताव के खिलाफ भारत का साथ मांगा था। 46 देशों में से 32 देशों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में वोटिंग की, जबकि 6 देश इसके खिलाफ रहे। भारत समेत 8 देश ऐसे भी थे जिन्होंने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया। पाक-चीन समेत इन देशों ने इजरायल के खिलाफ की वोटिंग इजरायल के खिलाफ वोट करने वाले देशों में अर्जेंटीना, आर्मीनिया, बांग्लादेश, बोलिविया, बुर्किना फासो, चीन, आइवरी कोस्ट, क्यूबा, डेनमार्क, इरिट्रिया, फिजी, फ्रांस, गेबोन, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, लीबिया, मोरिटानिया, मेक्सिको, नामीबिया, नीदरलैंड पाकिस्तान, पोलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस, सेनेगल, सोमालिया, सूडान, उरुग्वे, उजेबकिस्तान और वेनेजुएला शामिल थे। भारत समेत ये देश मतदान से रहे दूर इजरायल के खिलाफ मतदान से दूर रहने वाले देशों में भारत, बहमास, चेक रिपब्लिक, मॉर्शल आईलैंड, नेपाल, फिलिपींस, यूक्रेन, यूके और आयरलैंड शामिल हैं। जबकि इस प्रस्ताव के खिलाफ ऑस्ट्रिया, ब्राजील, बुल्गारिया, कैमरून, मालावी, और टोगो ने वोटिंग की। इजरायल-फिलिस्तीन विवाद पर भारत का क्या रुख? पिछले साल दिसंबर में भारत ने इजरायल-फिलिस्तीन को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया था। इसमें फिलिस्तीनी अधिकारियों और इजरायल के बीच समन्वय फिर से बहाल किये जाने के फैसले का भारत ने स्वागत किया था। भारत ने दोनों पक्षों के नेतृत्व से अनुरोध किया था कि इस अवसर का लाभ उठाएं और द्वि राष्ट्र समाधान के लक्ष्य पर फिर से सीधी बातचीत करें। भारत ने कहा था कि वह इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के सीधी बातचीत से शांतिपूर्वक समझौते के जरिये समाधान का पूरी तरह से समर्थन करता है। क्या है द्वि राष्ट्र समाधान का मतलब इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में शांति हासिल करने के प्रयासों में द्वि राष्ट्र समाधान दशकों से प्राथमिकता रहा है। इस समाधान के तहत इजरायल से लगा एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र स्थापित होगा-दो राष्ट्र दो लोगों के लिये। सिद्धांत रूप में फिलिस्तीन को राष्ट्र का दर्जा देते हुए, इसे इजरायल की सुरक्षा हासिल होगी और यहूदी जनसांख्यिकी बहुमत (देश को यहूदी और लोकतांत्रिक बने रहने देना) बरकरार रखने की मंजूरी होगी। अधिकतर सरकारों और संयुक्त राष्ट्र समेत विश्व निकायों ने द्वि राष्ट्र समाधान की उपलब्धि को सरकारी नीति के तौर पर निर्धारित किया है। यह लक्ष्य दशकों से शांति वार्ता का आधार रहा है।


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