Monday, 22 March 2021

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लंदन नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह को चलाने के आरोपी को ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित किया गया है। वह भारत में नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति कराने के आरोपों का सामना करेगा। ब्रिटेन की क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने सोमवार को कहा कि का यह मामला दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय सहयोग को दर्शाता है। बता दें कि यह ब्रिटेन से किसी आरोपी को प्रत्यर्पित करने का दूसरा मामला है। इससे पहले क्रिकेट सट्टेबाज संजीव चावला को पिछले साल फरवरी में लंदन से प्रत्यर्पित किया गया था। दिल्ली लाया गया किशन सिंह राजस्थानी मूल के 38 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक को मेट्रोपोलिटन पुलिस एक्ट्राडिशन यूनिट ने भारत के अधिकारियों को सौंपा। उसे हीथ्रो हवाईअड्डे से वायुसेना के एक विमान के जरिए नई दिल्ली ले जाया गया। वह रविवार शाम नई दिल्ली पहुंचा। ब्रिटेन की अदालतों में प्रत्यर्पण मामलों में भारतीय प्राधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सीपीएस ने कहा कि किशन सिंह को 21 मार्च 2021 को भारत को सौंपा गया। यह मामला ब्रितानी और भारतीय अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय सहयोग और यह सुनिश्चित करने की संयुक्त प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि अपराधी विदेश भाग कर न्याय के दायरे से बच नहीं सकते। भारत में नशे का कारोबार चलाने का है आरोप किशन सिंह पर मेफेड्रोन एवं केटामाइन जैसे नशीले पदार्थों को 2016-17 में भारत भेजने का आरोप है। उसे अगस्त 2018 में लंदन में प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तार किया गया था। उसने दिल्ली की तिहाड़ जेल में प्रतिकूल परिस्थितियों और मानवाधिकार आधार पर अपने प्रत्यर्पण का विरोध किया था। उसे तिहाड़ जेल में रखे जाने की संभावना है। डिस्ट्रिक जज जॉन जानी ने मई 2019 में उसके प्रत्यर्पण के समर्थन में फैसला सुनाया। ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित किए जाने का यह दूसरा मामला ब्रिटेन से भारत में किसी आरोपी को प्रत्यर्पित किए जाने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले कथित क्रिकेट सट्टेबाज संजीव चावला को पिछले साल फरवरी में लंदन से प्रत्यर्पित किया गया था। भारत ने किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक विजय माल्या और हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भी धोखाधड़ी और धनशोधन के मामलों में प्रत्यर्पित किए जाने का ब्रिटेन से अनुरोध किया है, लेकिन उन्हें अभी तक प्रत्यर्पित किया गया है। प्रत्यर्पित आरोपी को फांसी नहीं दे सकता भारत भारत और ब्रिटेन की प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को प्रत्यर्पण कानून, 2003 के तहत भाग-दो देशों की सूची में रखा गया है। इसका अर्थ यह है कि किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण का आदेश देने का अधिकार कैबिनेट मंत्री के पास है। कानून के प्रावधानों के अनुसार मंत्री इस बात पर विचार करता है कि जिस व्यक्ति को प्रत्यर्पित किए जाने का अनुरोध किया गया है, उसे मृत्युदंड तो नहीं दिया जा सकता। यदि उसे भारत में मृत्युदंड दिए जाने की संभावना है तो उसे प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता। सिंह की दो साल पहले हुई गिरफ्तारी राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पद विजेता हरप्रीत सिंह और दो अन्य आरोपियों की 2017 में गिरफ्तारी से जुड़ी है।


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