पेइचिंग मानवाधिकार के मुद्दों पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और आलोचना के बीच चीन और रूस के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को हुई बैठक में एकता प्रदर्शित की। वांग यी और सर्जेई लावरोव ने अपनी राजनीतिक व्यवस्था में बाहरी हस्तक्षेप को खारिज करते हुए कहा कि वे जलवायु परिवर्तन से लेकर कोरोना वायरस महामारी तक के मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर प्रगति के लिए काम कर रहे हैं। दक्षिणी चीन में स्थित नान्निंग शहर में सोमवार को हुई पहली बैठक में वांग और लावरोव ने अमेरिका पर अन्य देशों के अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका से ईरान परमाणु समझौते में फिर से शामिल होने का आग्रह किया। गौरतलब है कि रूस और चीन के तेहरान से नजदीकी संबंध हैं। वांग ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका द्वारा चीनी अधिकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की। चीन के शिनजियांग प्रांत में कथित तौर पर मानवाधिकार के हनन के फलस्वरूप इन देशों ने प्रतिबंध लगाए थे जिसकी वांग के आलोचना की। उन्होंने कहा, 'एकपक्षीय प्रतिबंधों के खिलाफ सभी देशों साथ खड़ा होना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य नहीं हैं।' बता दें कि अब अमेरिका को टक्कर देने के लिए रूस ने चीन के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया है। दोनों देशों ने ऐलान किया है कि वे साथ मिलकर चांद पर साइंटिफिक रिसर्च स्टेशन बनाएंगे। अमेरिका साल 2024 में एक बार फिर इंसान चांद पर भेजने के लिए Artemis मिशन पर काम कर रहा है। दूसरी ओर लंबे वक्त तक अमेरिका के साथ स्पेस में पार्टनर रहे रूस ने अब चीन साथ देकर अंतरिक्ष की बदलती रणभूमि का संकेत दिया है। क्या करेगा काम? चीन और रूस ने एक मेमोरंडम साइन किया है जिसमें इंटरनैशनल साइंटिफिक लूनर स्टेशन साथ मिलकर बनाने की बात कही गई है। रूस के बयान के मुताबिक यह स्टेशन एक एक्सपेरिमेंटल रिसर्च फसिलटीज का कॉन्प्लेक्स होगा जो चांद की सतह पर या उसकी कक्षा में होगा। इसे अलग-अलग तरीके से और अलग-अलग उद्देश्यों के तहत रिसर्च करने के लिए डिजाइन किया गया है।
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