Friday, 16 April 2021

https://ift.tt/36CAGd7

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA रिसर्चर्स की मदद से चांद पर टेलिस्कोप लगाने का प्लान बना रही है। इसे लूनर क्रेटर रेडियो टेलिस्कोप (LCRT) कहा जा रहा है। माना जा रहा है कि इसे प्योर्टो रीको के Arecibo टेलिस्कोप की तर्ज पर बनाया जा रहा है जो दिसंबर में ढह गया था। इस टेलिस्कोप में एक बड़ा सा डिश अंतरिक्ष से रेडियो वेव लेगा और उन्हें ऐम्प्लफाई करेगा जिससे वैज्ञानिक इन सिग्नल्स को स्टडी कर सके। चांद पर लगे टेलिस्कोप को धरती की तुलना में कम शोर सुनना पड़ेगा जो इसका बड़ा फायदा होगा।

Telescope on Moon by NASA: Arecibo ने हमारे सौर मंडल के बाहर पहले ग्रह की खोज की थी, शुक्र ग्रह के सतह को देखा और दो ऐसे सितारों की खोज की जिन्होंने अल्बर्ट आइंस्टाइन की जनरल रिलेटिविटी के सिद्धांत को सही साबित किया। हालांकि, धरती के वायुमंडल में 10 मीटर से ज्यादा की वेवलेंथ वाली रेडियो वेव मिल जाती है।


NASA Telescope on Moon: चांद पर विशाल टेलिस्कोप बनाएगा NASA, प्राचीन ब्रह्मांड से लेकर डार्क मैटर तक मिलेंगे कई जवाब

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA रिसर्चर्स की मदद से चांद पर टेलिस्कोप लगाने का प्लान बना रही है। इसे लूनर क्रेटर रेडियो टेलिस्कोप (LCRT) कहा जा रहा है। माना जा रहा है कि इसे प्योर्टो रीको के Arecibo टेलिस्कोप की तर्ज पर बनाया जा रहा है जो दिसंबर में ढह गया था। इस टेलिस्कोप में एक बड़ा सा डिश अंतरिक्ष से रेडियो वेव लेगा और उन्हें ऐम्प्लफाई करेगा जिससे वैज्ञानिक इन सिग्नल्स को स्टडी कर सके। चांद पर लगे टेलिस्कोप को धरती की तुलना में कम शोर सुनना पड़ेगा जो इसका बड़ा फायदा होगा।



रोबॉट करेंगे काम
रोबॉट करेंगे काम

LCRT बनाने के लिए रोबॉट की मदद से एक किलोमीटर चौड़ी डिश को चांद के गड्ढे में लटकाया जाएगा। यह टेलिस्कोप Arecibo से तीन गुना ज्यादा चौड़ा होगा और चांद पर होने के कारण ब्रह्मांड का बेहतर व्यू बन सकेगा। NASA ने ऐलान किया कि इस रिसर्च में जुटी टीम को 5 लाख डॉलर दिए जाएंगे जिसकी मदद से वह टेलिस्कोप को डिजाइन कर सके और उसे बनाने का प्लान तैयार कर सके।



क्यों जरूरी है यह टेलिस्कोप?
क्यों जरूरी है यह टेलिस्कोप?

Arecibo ने हमारे सौर मंडल के बाहर पहले ग्रह की खोज की थी, शुक्र ग्रह के सतह को देखा और दो ऐसे सितारों की खोज की जिन्होंने अल्बर्ट आइंस्टाइन की जनरल रिलेटिविटी के सिद्धांत को सही साबित किया। हालांकि, धरती के वायुमंडल में 10 मीटर से ज्यादा की वेवलेंथ वाली रेडियो वेव मिल जाती है। इसकी वजह से Arecibo प्राचीन ब्रह्मांड को देख नहीं पाता था। इस टीम को लीड कर रहे NASA के इंजिनियर सप्तऋषि बंदोपाध्याय ने बताया है कि इस दौरान ब्रह्मांड में पहले सितारे बन रहे थे और उससे भी पहले मैटर बन रहा था।



क्या होगा फायदा?
क्या होगा फायदा?

शुरुआती ब्रह्मांड की मदद से डार्क मैटर की उत्पत्ति को भी समझा जा सकेगा। बंदोपाध्याय ने बताया कि 10 मीटर वेवलेंथ के ऊपर ब्रह्मांड कैसा दिखता है, यह अभी नहीं पता। उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि इन वेवलेंथ पर क्या मिलेगा। इस टेलिस्कोप के लिए टीम ने कुछ क्रेटर्स का चयन भी किया है। अभी तक का प्लान यह है कि एक क्रेटर के किनारे दो विशाल लैंडर उतारे जाएंगे। एक लैंडर में जाल होगा और एक में रोवर्स होंगे। ये रोवर तार बिछाएंगे जिनके ऊपर टेलिस्कोप का जाल बिछाया जाएगा। बंदोपाध्याय का मानना है कि 10 दिन में ये बॉट्स काम पूरा कर देंगे।





from World News in Hindi, दुनिया न्यूज़, International News Headlines in Hindi, दुनिया समाचार, दुनिया खबरें, विश्व समाचार | Navbharat Times https://ift.tt/3sskSRE
via IFTTT

No comments:

Post a Comment

https://ift.tt/36CAGd7

रियाद सऊदी अरब के नेतृत्‍व में गठबंधन सेना ने यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के एक शिविर को हवाई हमला करके तबाह कर दिया है। सऊदी...