Sunday, 18 April 2021

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पेइचिंग पूर्वी लद्दाख के कैलाश रेंज में अपने आक्रामक अभियान से चीन को अचंभे में डालने वाले भारत के स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) के जवानों के प्रदर्शन से ड्रैगन टेंशन में आ गया है। तिब्‍बती मूल के लोगों से बनी इस सेना के प्रदर्शन से घबराए चीन ने अब अपनी सेना में भी तिब्‍बती युवकों की भर्ती को तेज कर दिया है। इसके लिए चीन अब तिब्‍बत में विशेष भर्ती अभियान चला रहा है। हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सेना पीएलए पीएलए कैंप में रहने वाले तिब्‍बत‍ियों को सेना में भर्ती कर रहा है। बताया जा रहा है कि चीन अब भारत की एसएफएफ की तर्ज पर स्‍पेशल तिब्‍बतन आर्मी यूनिट बनाने का इरादा रखता है। सूत्रों के मुताबिक चीन अगर इसमें सफल रहता है तो यह पीएलए में किसी खास जातीय समूह की पहली यूनिट होगी। पीएलए ल्‍हासा में भी भर्ती अभियान चला रही खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ल्‍हासा के चीनी सेना के अधिकारियों ने फरवरी के तीसरे सप्‍ताह में नागरी प्रांत के रुडोक का दौरा किया था ताकि तिब्‍बतियों को सेना में भर्ती किया जा सके। इसके बाद अधिकारी जांडा जो भारत की सीमा से लगा हुआ है। यहां पर उन तिब्‍बती लड़कों को सैनिक के रूप में चुना गया जो पहले ही पीएलए के कैंप में मौजूद हैं। पीएलए ल्‍हासा में भी भर्ती अभियान चला रही है। अधिकारियों ने कहा कि चीन तिब्‍बतियों की यह भर्ती ऐसे समय पर कर रहा है जब भारत के साथ लद्दाख में उसका तनाव चल रहा है। भारतीय अधिकारी चीन में जारी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर गड़ाए हुए हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'चीन इन भर्तियों को ऐसे समय पर कर रहा है जब ऐसी खबरें आई हैं कि चीन के मुख्‍यधारा के सैनिक तिब्‍बत में ऊंचाई वाले इलाकों में काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ये सैनिक पहाड़ों में काफी बीमार हो रहे हैं।' भर्तियों का मकसद भारत और तिब्‍बतियों को संदेश भेजना अधिकारी ने यह भी कहा कि इन भर्तियों का मकसद भारत और यहां रह रहे तिब्‍बतियों को संदेश भेजना है। बता दें कि भारत में तिब्‍बतियों की भर्ती करके स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स का गठन किया गया है। माना जाता है कि करीब 10 हजार जवान तिब्‍बती हैं। वर्ष 1962 में तैयार की गई स्पेशल टुकड़ी एसएफएफ भारतीय फौज की नहीं बल्कि भारत की गुप्तचर एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग का हिस्सा है। इस यूनिट का कामकाज इतना गुप्त है कि शायद फौज को भी मालूम नहीं होता कि ये क्या कर रही है। Special Frontier Force डायरेक्टर जनरल ऑफ सिक्यॉरिटी के माध्यम से सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है। इसलिए इसके 'शौर्य की कहानियां' आम लोगों तक नहीं पहुंच सकतीं। एसएफएफ (SFF) का गठन 1962 के चीन-भारत युद्ध (1962 India-China War) के तुरंत बाद किया गया था। यह एक गुप्त यूनिट थी, जिसमें तिब्बतियों (अब इसमें तिब्बतियों और गोरखाओं का मिश्रण है) को भर्ती किया गया था। इस तरह से पड़ा विशेष फ्रंटियर फोर्स नाम शुरू में इस यूनिट को 22 के नाम से जाना जाता था। इसका नाम इसलिए रखा गया क्योंकि इसे एक आर्टरीरी ऑफिसर मेजर जनरल सुजान सिंह उबान ने उठाया था, जिन्होंने 22 माउंटेन रेजिमेंट की कमान संभाली थी। इसलिए उन्होंने अपनी रेजिमेंट के बाद नए गुप्त यूनिट का नाम दिया। इसके बाद इस ट्रुप्स को विशेष फ्रंटियर फोर्स के रूप में नामित किया गया था और यह अब कैबिनेट सचिवालय के दायरे में आता है।


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