वॉशिंगटन फाइजर/बायोएनटेक के कोविड-19 वैक्सीन पर चल रहे तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल से पता चला है कि यह वैक्सीन दूसरे डोज के बाद 6 महीने तक सबसे ज्यादा प्रभावी रहती है। यह घोषणा दोनों कंपनियों ने एक संयुक्त बयान में की है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने गुरुवार को कंपनियों के बयान के हवाले से कहा कि तीसरे चरण में कोरोना वायरस के लक्षण वाले 927 मामलों के विश्लेषण से आए परिणामों में सामने आया है कि फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन बीएनटी162बी2 बीमारी के खिलाफ 91.3 प्रतिशत प्रभावी थी। यह प्रभाव दूसरे डोज के 7 दिन से लेकर 6 महीने तक मापा गया था। यह वैक्सीन यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन द्वारा बताई गई गंभीर बीमारियों के खिलाफ 100 प्रतिशत प्रभावी थी। वहीं फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा बताई गई कोविड संबंधी गंभीरता में यह 95.3 प्रतिशत तक प्रभावी है। तीसरे चरण के अध्ययन में टीकाकरण करा चुके 12,000 से ज्यादा प्रतिभागियों से यह सुरक्षा डेटा इकट्ठा किए गए हैं, जिनके पास दूसरे डोज के बाद कम से कम 6 महीने का फॉलोअप समय था। फाइजर के चेयरमेन और सीईओ अल्बर्ट बोरला और बायोएनटेक के सीईओ और सह-संस्थापक युगुर साहिन ने अपने बयान में कहा, ‘यह डेटा हमारे वैक्सीन की प्रभावकारिता और सुरक्षा की पुष्टि करते हैं और हमें यूएस एफडीए को एक बायोलॉजिक्स लाइसेंस आवेदन देने के योग्य बनाते हैं। ये आंकड़े ऐसे पहले क्लिनिकल नतीजे भी देते हैं जो बताते हैं कि यह वैक्सीन वर्तमान में सामने आ रहे वेरिएंट्स से भी प्रभावी तौर से रक्षा कर सकता है।’ कंपनियों की इस घोषणा से एक दिन पहले ही 12 से 15 साल के किशोरों पर हुए एक परीक्षण में वैक्सीन ने 100 प्रतिशत प्रभावकारिता दिखाई थी, साथ ही मजबूत एंटीबॉडी रिस्पांस भी मिला था। इस परीक्षण में अमेरिका के 2,260 किशोरों को नामांकित किया गया था। बता दें कि एफडीए ने पिछले साल दिसंबर में फाइजर-बायोएनटेक के वैक्सीन को अमेरिका में आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी थी। यह देश में एफडीए की अनुमति पाने वाली पहली वैक्सीन थी। इसे 16 साल और इससे ज्यादा उम्र के लोगों में उपयोग करने के लिए अधिकृत किया गया था।
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