अबूधाबी पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंच गए हैं। कुरैशी शनिवार को शुरू हुई यात्रा के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के अपने समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान और अन्य अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसे सोची समझी रणनीति कहें या कुछ और, भारत के भी विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई के दौरे पहुंच रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अभी दोनों के बीच कोई द्विपक्षीय मुलाकात तय नहीं है लेकिन यूएई लगातार दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में जुटा हुआ है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक कुरैशी व्यापार और निवेश, पाकिस्तानियों के लिए नौकरी के अवसरों और पाकिस्तानी प्रवासियों के कल्याण सहित द्विपक्षीय सहयोग के सभी क्षेत्रों पर यूएई के नेतृत्व के साथ परामर्श करेंगे। इस बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को अबूधाबी की यात्रा पर जाएंगे और इस दौरान उनका ध्यान द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने तथा आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर होगा। 'UAE भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों को सुधारने में मदद कर रहा' जयशंकर की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अहम शहर की यात्रा क्षेत्र में उभरते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच हो रही है, खास तौर पर अफगानिस्तान में हो रहे घटनाक्रमों के समय। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, ‘अपने समकक्ष के न्योते पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर 18 अप्रैल 2021 को अबूधाबी की यात्रा पर जाएंगे। उनका ध्यान आर्थिक सहयोग और समुदाय के कल्याण पर होगा।’ जयशंकर की यूएई की यात्रा ऐसे समय हो रही जब खबर है कि अमेरिका में खाड़ी देश के राजदूत ने कहा कि उनका देश भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों को सुधारने में मदद कर रहा है। अमेरिका में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राजदूत यूसेफ अल-ओतैबा ने कहा है कि उनके देश ने भारत और पाकिस्तान के बीच के तनाव को कम करने और और उनके द्विपक्षीय संबंधों को 'स्वस्थ कामकाजी स्तर' पर वापस लाने में भूमिका निभाई है। पाकिस्तान से बातचीत पर जानें भारत ने क्या कहा अल-ओतैबा ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के हूवर इंस्टिट्यूशन के साथ एक डिजिटल चर्चा में बुधवार को कहा, 'वे शायद बहुत अच्छे दोस्त नहीं बन सकते, लेकिन हम इसे कम से कम ऐसे स्तर पर पहुंचाना चाहते हैं, जहां वे एक-दूसरे से बात करते हों।' भारत और पाकिस्तान ने 25 फरवरी को एक अचानक की गयी घोषणा में कहा था कि वे जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के सभी समझौतों का सख्ती से पालन करने पर सहमत हुए हैं। अल-ओतैबा ने खुद ही एक सवाल का जवाब देते हुए इस मुद्दे को उठाया और दोनों पड़ोसियों के बीच ‘तनाव को कम करने’ में अपने देश की भूमिका को स्वीकार किया। नयी दिल्ली में जब इन मीडिया खबर के बारे में पूछा गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले एक साल से अधिक समय से परदे के पीछे बातचीत हो रही थी तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। बागची ने 9 अप्रैल को कहा था, 'अगर आप इस मुद्दे पर संचार चैनलों के बारे में बात करते हैं, तो मुझे याद रखना चाहिए कि हमारे संबंधित उच्च आयोग मौजूद हैं और वे काम कर रहे हैं। इसलिए यह संचार का बहुत प्रभावी माध्यम है।'
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