वॉशिंगटन दशकों से खगोलविदों के मन में यह सवाल रहा है कि क्या हर जगह एक सा है? हमारी आकाशगंगा Milky Way और उसकी सबसे करीबी गैलेक्सी Andromeda के बीच दूरी से अंदाजा लगा था कि हमारा ब्रह्मांड कितना विशाल है। उन्हें पता चला कि कहां-कहां गैलेक्सी फैली हुई हैं। ऐसे में सवाल उठा कि गैलेक्सीज की स्थिति का क्या कोई पैटर्न है या ये कहीं भी मिलती हैं? पैटर्न को समझने की शुरुआत पहले माना जाता था कि ये कहीं भी मिल जाती हैं। ऐस्ट्रोनॉमर्स ने कई विशाल गैलेक्सी क्लस्टर देखे जिनमें हजारों गैलेक्सीज होती हैं। कुछ छोटे समूह भी थे। इन्हें देखकर नहीं लगा कि कोई पैटर्न होता है। 1970 के दशक में गैलेक्सी सर्वे की मदद से पैटर्न को समझने की शुरुआत हुई। क्लस्टर के अलावा पतले-पतले धागों जैसे समूहों में भी गैलेक्सीज पाई गईं। इससे पता लगा कि ब्रह्मांड के कुछ हिस्से दूसरों से अलग हैं। अडवांस्ड सर्वे की जरूरत गणितज्ञ बेनोइ मैंडलब्रूट ने संभावना जताई कि ब्रह्मांड में ऐसा पैटर्न होगा जो कुछ दूरी पर एक जैसा होगा। ऐसे में यह संभावना भी पैदा होती है कि अलग-अलग तरह के गैलेक्सी समूह एक बड़े पैटर्न का हिस्सा हों। ज्यादा अडवांस्ड सर्वे की मदद से इसे समझा जा सकेगा और पूरे ब्रह्मांड के पैटर्न को खोजा जा सकेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि पहले कि तुलना में समझी गई ब्रह्मांड की एकरूपता दरअसल ज्यादा विशाल है। हो सकता है जटिल सिस्टम इस पैटर्न की खोज में अभी वक्त लग सकता है। सदी के आखिर तक इसे लेकर ठोस जानकारी मिल सकती है। अभी महाविशाल स्लोआन डिजिटल स्काई सर्वे ने करोड़ों गैलेक्सीज की स्थिति बताई है जो पहले कभी नहीं किया गया था। अगर पैटर्न पाए गए जो एक जटिल सिस्टम का खुलासा होगा। कुछ चीजों में पैटर्न अभी दिखता है। डजैसे डार्क मैटर के हेलो जिनके अंदर गैलेक्सी और क्लस्टर होते हैं। जहां कुछ नहीं होता वहां छोटी गैलेक्सी होती हैं।
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