Monday, 17 May 2021

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कई देशों के वैज्ञानिक मंगल पर जीवन की खोज में लगे हैं और एक के बाद एक कई यान भी लाल ग्रह पर उतारे जा चुके हैं। हालांकि, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रफेसर क्रिस्टोफर मेसन का कहना है कि मंगल पर मिलने वाला जीवन वहीं पैदा हुआ हो, ऐसा शायद मुश्किल होगा। दरअसल, मेसन का मानना है कि धरती से जब मिशन मंगल पर भेजे जाते हैं, हो सकता है कि माइक्रोब्स या सूक्ष्मजीवी उनके साथ पहुंचे हों और फिर पनपने लगे। उन्होंने बताया है कि इससे जीवन की खोज के नतीजों पर क्या असर पड़ेगा।

Life on Mars: बेहद साफ कमरों की वजह से शायद Microbes में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई हो और वे मंगल तक का रास्ता तय कर सकते हों। इसके लिए evolutonary selection को एक वजह बताया।


Life on Mars: मंगल पर पहले से मौजूद है जीवन? प्रफेसर ने बताया लाल ग्रह पर जीवन की खोज का दूसरा पहलू

कई देशों के वैज्ञानिक मंगल पर जीवन की खोज में लगे हैं और एक के बाद एक कई यान भी लाल ग्रह पर उतारे जा चुके हैं। हालांकि, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रफेसर क्रिस्टोफर मेसन का कहना है कि मंगल पर मिलने वाला जीवन वहीं पैदा हुआ हो, ऐसा शायद मुश्किल होगा। दरअसल, मेसन का मानना है कि धरती से जब मिशन मंगल पर भेजे जाते हैं, हो सकता है कि माइक्रोब्स या सूक्ष्मजीवी उनके साथ पहुंचे हों और फिर पनपने लगे। उन्होंने बताया है कि इससे जीवन की खोज के नतीजों पर क्या असर पड़ेगा।



जीवन कैसे मुमकिन?
जीवन कैसे मुमकिन?

बीबीसी पर एक आर्टिकल में मेसन ने बताया है कि NASA की जेट प्रोपल्शन लैब स्पेसक्राफ्ट तैयार करते वक्त बहुत कड़े नियमों का पालन करती है ताकि स्पेस मिशन पर किसी भी अनचाहे जीव के पहुंचने की आशंका को कम से कम किया जा सके लेकिन फिर भी कुछ जीव ऐसे होते हैं जो बेहद साफ कमरों में और यहां तक कि मंगल तक के सफर पर भी जिंदा रह सकते हैं। उन्होंने लिखा है कि सूक्ष्मजीवी धरती पर अरबों साल से रहे हैं और आज वे हर जगह हैं। हमारे आसपास, हमारे अंदर और कुछ बेहद साफ जगहों पर भी और स्पेस मिशन पर इनसे दिक्कत हो सकती है। (मंगल पर दिखने वाली मकड़ी जैसी आकृति)



कैसे होंगे ये माइक्रोब्स?
कैसे होंगे ये माइक्रोब्स?

मेसन का कहना है कि इन सूक्ष्मजीवियों में कुछ खास जीन होते हैं जो DNA को रिपेयर कर सकते हैं, जिससे रेडिएशन को भी वे झेल सकते हैं। वे उपकरण के ऊपर जमा हो सकते हैं और ठंडे पर्यावरण में भी रह सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि बेहद साफ कमरों की वजह से शायद उनमें प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई हो और वे मंगल तक का रास्ता तय कर सकते हों। इसके लिए evolutionary selection को एक वजह बताया।



जीवन की खोज का क्या?
जीवन की खोज का क्या?

मेसन ने कहा है कि हो सकता है कि सोवियत प्रोब के साथ सबसे पहले 1971 में माइक्रोब या इंसानी DNA भी मंगल पर पहुंच गया हो। ऐसे में हो सकता है कि मंगल पर अगर जीवन मिला भी, तो वह धरती से गया हो। ऐसा हुआ होगा तो ये वहां से हिसाब से ढल गए होंगे, म्यूटेशन हुआ होगा और वे बदल गए होंगे। हो सकता है कि ये मंगल पर रहना और आसान भी कर दें। वहां कुछ ऐसा मिलने पर उसकी रिसर्च की जा सकती है जिससे दोनों ग्रहों के बारे में कई जवाब मिल सकेंगे।





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