पेइचिंग लद्दाख में पिछले साल से जारी तनाव के बीच चीन ने एक बार फिर को लेकर सफाई देनी शुरू कर दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि () भारत को निशााना बनाए जाने के लिए नहीं है। दसअसल, चीन इस परियोजना का विस्तार अब अफगानिस्तान तक करने की योजना पर काम कर रहा है। इसे लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के साथ बातचीत भी जारी है। चीन का दावा- भारत के खिलाफ नहीं सीपीईसी सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने सीपीईसी के भारतीय इलाकों से गुजरने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि सीपीईसी आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए की गई पहल है। यह किसी भी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए नही है। चीन ने सीधे-सीधे इससे भारत के क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ होने के दावे को नकार दिया। उसने कहा कि जम्मू और कश्मीर को लेकर चीन के सैद्धांतिक रूख में कोई बदलाव नहीं आया है। अफगानिस्तान तक सीपीईसी को बढ़ाना चाहता है चीन चीन सीपीईसी को अफगानिस्तान तक बढ़ाकर भारत को अप्रत्यक्ष रूप से घेरने की तैयारी कर रहा है। इतना ही नहीं, इस प्रोजक्ट के जरिए चीन का असली मकसद अफगानिस्तान से अमेरिका के वापस जाने से पैदा हो रही खाली जगह पर कब्जा करना है। इससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस देश में चीनी प्रभुत्व को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, परियोजना को लेकर बातचीत अभी जारी है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सीपीईसी बना चीन के गले की फांस चीन पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर अब ड्रैगन के गले की फांस बन गया है। अरबों का पैसा लगाने के बाद भी चीन को वह फायदा नहीं मिल रहा है जिसके लिए उसने 60 अरब डॉलर का निवेश किया था। पाकिस्तान में इसे लेकर राजनीति भी चरम पर है। वहीं भ्रष्टाचार में डूबे पाकिस्तानी नेता सड़क निर्माण कार्य में कोताही भी बरत रहे हैं। चीन को निवेश डूबने का डर सीपीईसी में 60 अरब डॉलर का निवेश करने के बाद चीन को पूरी योजना पर पानी फिरता दिख रहा है। गिलगित बाल्टिस्तान और पीओके के स्थानीय लोग भी इस प्रोजक्ट के खिलाफ हैं। पाकिस्तान की राजनीति भी चीन के लिए समस्या बनी हुई है। कबायली इलाकों में काम कर रहे चीनी नागरिकों पर हमले भी बढ़े हैं। पाकिस्तान के सामने कर्ज लौटाना बना समस्या सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए पाकिस्तान दिसंबर, 2019 तक चीन से करीब 21.7 अरब डॉलर कर्ज ले चुका था। इनमें से 15 अरब डॉलर का कर्ज चीन की सरकार ने और बाकी का 6.7 अरब डॉलर वहां के वित्तीय संस्थानों से लिया गया है। अब पाकिस्तान के सामने इस कर्ज को वापस लौटाना बड़ी समस्या बन गया है। पाक के पास महज 10 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार ही है और वह इतनी बड़ी धनराशि चीन को वापस नहीं कर सकता।
from World News in Hindi, दुनिया न्यूज़, International News Headlines in Hindi, दुनिया समाचार, दुनिया खबरें, विश्व समाचार | Navbharat Times https://ift.tt/3uhabSV
via IFTTT
No comments:
Post a Comment