भारत में AstraZeneca-Oxford की Covishield वैक्सीन की दो खुराकों के बीच का गैप 6-8 हफ्ते से बढ़ाकर 12-16 हफ्ते कर दिया गया है। राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकर समूह (एनटीएजीआई) का कहना है कि ब्रिटेन में यह अंतराल 12 हफ्ते है जिसे WHO ने भी सही ठहराया है। NTAGI का कहना है कि ब्रिटेन के अनुभव से सीख ली गई है। दरअसल, ब्रिटेन में यह गैप 12 हफ्ते ही है और यूरोपियन यूनियन ने भी इसे बढ़ाने की सलाह नहीं दी है। कुछ स्टडीज में यह कहा गया है कि दोनों खुराकों के बीच ज्यादा अंतराल होने पर फायदा ज्यादा होता है।Coronavirus Vaccine two doses: ब्रिटेन में यह गैप 12 हफ्ते ही है और यूरोपियन यूनियन ने भी इसे बढ़ाने की सलाह नहीं दी है। कुछ स्टडीज में यह कहा गया है कि दोनों खुराकों के बीच ज्यादा अंतराल होने पर फायदा ज्यादा होता है।

भारत में AstraZeneca-Oxford की Covishield वैक्सीन की दो खुराकों के बीच का गैप 6-8 हफ्ते से बढ़ाकर 12-16 हफ्ते कर दिया गया है। राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकर समूह (एनटीएजीआई) का कहना है कि ब्रिटेन में यह अंतराल 12 हफ्ते है जिसे WHO ने भी सही ठहराया है। NTAGI का कहना है कि ब्रिटेन के अनुभव से सीख ली गई है। दरअसल, ब्रिटेन में यह गैप 12 हफ्ते ही है और यूरोपियन यूनियन ने भी इसे बढ़ाने की सलाह नहीं दी है। कुछ स्टडीज में यह कहा गया है कि दोनों खुराकों के बीच ज्यादा अंतराल होने पर फायदा ज्यादा होता है।
क्या कहती है रिसर्च?

इस वैक्सीन पर अंतरराष्ट्रीय टीमों की रिसर्च के डेटा में पता चला कि दो खुराकों के बीच में 12 हफ्ते का अंतर होने से ज्यादा असर होता है। अमेरिका, पेरू और चिली में किए गए ट्रायल में पाया गया कि चार हफ्ते से ज्यादा के अंतराल पर दूसरी खुराक देने से 79% असर ज्यादा होता है। दूसरे देशों में डेटा से पता चला कि 6 हफ्ते बाद दूसरी खुराक देने से ज्यादा असर होता है। ब्राजील, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में पाया गया कि दूसरी खुराक 6-8 हफ्ते बाद देने से असर 59.9%, 9-11 हफ्ते बाद देने से 63.7% और 12 या उससे ज्यादा हफ्ते बाद देने से 82.4% असर देखा गया। द लैंसेट में यह स्टडी फरवरी में छपी थी लेकिन इसका पियर-रिव्यू नहीं किया गया है। फिलहाल किसी स्टडी में 16 हफ्ते बाद दूसरी खुराक के असर को नहीं देखा गया है।
अंतराल बढ़ाने की जरूरत क्यों?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक NTAGI के डॉ. एनके अरोड़ा का कहना है कि 8 हफ्ते से अंतराल बढ़ाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, खासकर तब जब वैक्सीन की देश में कमी नहीं है। उनके मुताबिक यह ऐसे देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है जहां वैक्सीन की कमी हो। उन्होंने बताया कि अंतराल को ज्यादा बढ़ाने से बीच में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अंतराल बढ़ाने से ज्यादा से ज्यादा लोगों को कम से कम पहली खुराक जल्दी दी जा सकेगी। कुछ स्टडीज में यह भी देखा जा रहा है कि क्या दोनों खुराकें अलग-अलग वैक्सीन की लग सकती हैं। अंतराल बढ़ाने से इसे लेकर ज्यादा पुख्ता जानकारी सामने आ सकेगी।
ज्यादा अंतराल से बढ़ता है असर

फरवरी में WHO की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामिनाथन ने बताया था कि AstraZeneca की दूसरी खुराक का अंतराल बढ़ाने से ज्यादा असर देखा गया है। उन्होंने बताया था कि 12 हफ्ते के अंतर से ज्यादा इम्यून बूस्ट मिल सकता है। अमेरिका के रोशेस्टर में मेयो क्लिनिक में की गई एक स्टडी के मुताबिक Pfizer या Moderna की एक खुराक से भी 80% सुरक्षा मिल सकती है और इसके बाद संक्रमित लोगों के अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम हो सकता है। वहीं, स्पेन ने भी AstraZeneca की पहली और दूसरी खुराक में 16 हफ्ते का अंतर किया है।
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