Wednesday, 19 May 2021

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पिछले महीने दुनियाभर में पिंक सुपरमून देखा गया था और अगले हफ्ते दूसरा सुपरमून और भी रोचक होने वाला है। जब चांद धरती के इर्द-गिर्द अपनी कक्षा में धरती के बेहद करीब होता है, तो वह बहुत बड़ा भी दिखता है। अगले हफ्ते दिखने वाले सुपरमून पर ग्रहण भी लगेगा जिससे यह न सिर्फ आकार में बड़ा बल्कि और भी ज्यादा लाल नजर आएगा। यह नजारा 26 मई को उस वक्त देखा जाएगा जब चांद सबसे ज्यादा चमक रहा होगा। यह करीब 14 मिनट 30 सेकंड के लिए रहेगा। (फाइल फोटो: Haakon Mosvold Larsen/NTB Scanpix via Reuters)

इसे ब्रिटेन में Flower Moon भी कहते हैं क्योंकि मई के महीने से ही फूल खिलने शुरू होते हैं। यह अमेरिका में साफ-साफ दिखाई देगा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी हिस्से और दक्षिणपूर्व एशिया में भी यह दिखाई देगा।


Super Blood Moon 2021: अगले हफ्ते लाल रोशनी में नहाएगा चांद, भारत से कैसा दिखेगा साल का सबसे बड़ा Total Lunar Eclipse?

पिछले महीने दुनियाभर में पिंक सुपरमून देखा गया था और अगले हफ्ते दूसरा सुपरमून और भी रोचक होने वाला है। जब चांद धरती के इर्द-गिर्द अपनी कक्षा में धरती के बेहद करीब होता है, तो वह बहुत बड़ा भी दिखता है। अगले हफ्ते दिखने वाले सुपरमून पर ग्रहण भी लगेगा जिससे यह न सिर्फ आकार में बड़ा बल्कि और भी ज्यादा लाल नजर आएगा। यह नजारा 26 मई को उस वक्त देखा जाएगा जब चांद सबसे ज्यादा चमक रहा होगा। यह करीब 14 मिनट 30 सेकंड के लिए रहेगा। (फाइल फोटो: Haakon Mosvold Larsen/NTB Scanpix via Reuters)



कैसे बनता है Blood Moon?
कैसे बनता है Blood Moon?

पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूरज, धरती और चांद एक लाइन में होते हैं। ग्रहण के वक्त धरती सूरज और चांद के बीच में आती है। इससे सूरज की रोशनी चांद तक नहीं पहुंच पाती है और चांद अंधेरा नजर आता है। हालांकि, यह पूरी तरह गायब नहीं होता। धरती के वायुमंडल के सूरज की रोशनी पर असर से चांद अलग रंग का दिखता है। धरती के वायुमंडल से टकराने पर सूरज की रोशनी में से ज्यादा वेवलेंथ वाली लाल और नारंगी रोशनी में चांद नहा जाता है और 'ब्लड मून' बन जाता है। यह नारंगी या लाल से लेकर भूरे रंग का भी हो सकता है। (फाइल फोटो: Keith Burns/NASA/JPL)



भारत में कैसा दिखेगा?
भारत में कैसा दिखेगा?

इसे ब्रिटेन में Flower Moon भी कहते हैं क्योंकि मई के महीने से ही फूल खिलने शुरू होते हैं। यह अमेरिका में साफ-साफ दिखाई देगा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी हिस्से और दक्षिणपूर्व एशिया में भी यह दिखाई देगा। पहले चांद धरती की बाहरी छाया (penumbra) में दाखिल होता है और जब अंदरूनी छाया में दाखिल होता है तब वह लाल दिखाई देता है। भारत में यह ग्रहण penumbra फेज में ही दिखेगा है। ग्रेनिच की रॉयल ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक पूर्ण चंद्र ग्रहण दो से तीन साल में एक बार होता है। (फाइल फोटो: David Gray/Reuters)



दूसरा सुपरमून, ज्यादा बड़ा
दूसरा सुपरमून, ज्यादा बड़ा

अगले हफ्ते दिखने वाला सुपरमून साल का दूसरा और ज्यादा बड़ा होगा। इससे पहले 26 अप्रैल को सुपर पिंक मून था। साल 1930 में मेन फार्मर अलमेनक ने अमेरिकन इंडियन मून नेम छापने शुरू किए। इसके मुताबिक अप्रैल का फुल मून पिंक मून कहलाता है। पिंक मून के अलावा इसे स्प्राउटिंग ग्रास मून, एग मून, फिश मून जैसे कई नाम किए गए हैं। हिंदुओं में इसे हनुमान जयंती के तौर पर मनाया जाता है। सुपरमून नाम 1979 में रिचर्ड नोल ने दिया था। (फाइल फोटो: REUTERS Alkis Konstantinidis)





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