मंगल के अलावा सौर मंडल में अगर कहीं वैज्ञानिकों को जीवन के होने की उम्मीद दिखती है, तो वह है शनि का चांद टाइटन। इसके लिए कुछ रिसर्चर वहां तक जाने के मिशन पर काम भी कर रहे हैं ताकि किसी तरह के सबूत को धरती पर लाया जा सके। इसके लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने ग्रांट दिया है। दिलचस्प बात यह है कि धरती पर वापसी के सफर के लिए ईंधन टाइटन में बह रहीं मीथेन की झीलों से लेने का प्लान है। NASA ने हाल ही में NASA इनोवेटिव अडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स की 1.25 लाख डॉलर की ग्रांट NASA ग्लेन रिसर्च सेंटर को दी है।NASA का मानना है कि ये सौर मंडल में जीवन का आधार हो सकते हैं और धरती पर भी जीवन की उत्पत्ति से जुड़े सवालों के जवाब मिल सकते हैं। टाइटन पर क्राफ्ट लैंड करना भी मंगल या दूसरे ऑब्जेक्ट्स की तुलना में आसान है।

मंगल के अलावा सौर मंडल में अगर कहीं वैज्ञानिकों को जीवन के होने की उम्मीद दिखती है, तो वह है शनि का चांद टाइटन। इसके लिए कुछ रिसर्चर वहां तक जाने के मिशन पर काम भी कर रहे हैं ताकि किसी तरह के सबूत को धरती पर लाया जा सके। इसके लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने ग्रांट दिया है। दिलचस्प बात यह है कि धरती पर वापसी के सफर के लिए ईंधन टाइटन में बह रहीं मीथेन की झीलों से लेने का प्लान है। NASA ने हाल ही में NASA इनोवेटिव अडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स की 1.25 लाख डॉलर की ग्रांट NASA ग्लेन रिसर्च सेंटर को दी है।
मिल सकते हैं कई जवाब

टाइटन पर तरल महासागर है जिसमें जीवन की संभावना हो सकती है। उसकी सतह पर वायुमंडल पर Tholin नाम के केमिकल कंपाउंड्स भी हैं, जो धरती पर नहीं पाए जाते हैं। इन्हें धरती पर लाने की कोशिश की जाएगी ताकि लैब में इन पर रिसर्च की जाए। NASA का मानना है कि ये सौर मंडल में जीवन का आधार हो सकते हैं और धरती पर भी जीवन की उत्पत्ति से जुड़े सवालों के जवाब मिल सकते हैं। टाइटन पर क्राफ्ट लैंड करना भी मंगल या दूसरे ऑब्जेक्ट्स की तुलना में आसान है।
दूसरा सबसे बड़ा चांद

टाइटन के वायुमंडल में नाइट्रोजन धरती से ज्यादा है और दबाव 1.5 गुना ज्यादा। इससे लैंडर की गति अपने आप धीमी होती है, जैसे धरती पर लौटने वाले कैप्सूल्स की। टाइटन हमारे सौर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा चांद है। सबसे बड़ा चांद बृहस्पति का है जिसका नाम है Ganymede। टाइटन पर तरल महासागर है और उसमें लिक्विड मीथेन पाई जाती है। शनि पर भेजे गए NASA के Cassini मिशन ने यह जानकारी दी थी। Cassini ने यहां धूल के तूफान भी देखे थे।
टाइटन पर है क्या?

टाइटन की सतह पर तापमान -179 डिग्री सेल्सियस तक भी जा सकता है। इस कारण वैज्ञानिकों में इसे लेकर कई सवाल रहे हैं। Compass के लीड साइंस इन्वेस्टिगेटर जेफ्री लैंडिस का कहना है कि नाइट्रोजन से भरा टाइटन का मोटा वायुमंडल ऑर्गैनिक कंपाउंड्स को सुरक्षित रखता है। धरती की विशाल झीलों के बराबर और गहरे तरल नैचरल गैस के सागर हैं। क्रस्ट के नीचे टाइटन में महासागर हैं और सतह की गहराई में पानी के महासागर। टीम को यह पता करना है कि लिक्विड ऑक्सिजन कैसे तैयार की जाए।
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