Friday, 14 May 2021

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काठमांडू सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष के केपी शर्मा ओली एक बार फिर से नेपाल के प्रधानमंत्री बन गए हैं। राष्‍ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने शुक्रवार को केपी ओली को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। ओली ने संसद में विश्‍वासमत खोने के बाद 10 मई को अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था। गुरुवार रात को राष्‍ट्रपति भंडारी ने एकबार फिर से उन्‍हें प्रधानमंत्री नियुक्‍त किया था। ओली के साथ मंत्रिमंडल के उनके पुराने साथियों ने भी शपथ ग्रहण किया है। कोरोना वायरस के कहर से जूझ रहे नेपाल की राजनीति में उठापटक का दौर लगातार जारी है। नेपाल में गुरुवार को विपक्षी दल अगली सरकार बनाने के लिये बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे। इसके बाद नेपाल की संसद में सबसे बड़े राजनीतिक दल के नेता के रूप में केपी शर्मा ओली फिर से देश के प्रधानमंत्री नियुक्त कर द‍िए गए। नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने 69 वर्षीय सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली को प्रधानमंत्री के रूप में फिर से नियुक्त किया। प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हार गए थे ओली अभी तीन दिन पहले ही ओली प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत हार गए थे और उन्‍हें अपने पद से इस्‍तीफा देना पड़ा था। राष्ट्रपति भंडारी ने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 78 (3) के अनुसार प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के नेता के रूप में ओली को प्रधानमंत्री के रूप में फिर से नियुक्त किया। राष्ट्रपति भंडारी शुक्रवार को शीतल निवास में एक समारोह में ओली को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी। इससे पहले नेपाली कांग्रेस तथा नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवाद मध्य) का विपक्षी गठबंधन अगली सरकार बनाने के लिये बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा। इसके बाद ओली के एक बार फिर देश का प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया था। ओली सोमवार को प्रतिनिधि सभा में विश्वास मत साबित करने में नाकाम रहे थे, जिसके बाद राष्ट्रपति भंडारी ने विपक्षी दलों को सरकार गठन के लिये गुरुवार रात नौ बजे तक का समय दिया था। नेपाली कांग्रेस के पास 61 और प्रचंड की पार्टी के पास 49 सीटें नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा को सीपीएन माओवाद के अध्यक्ष पुष्पकमल दल 'प्रचंड' का समर्थन मिल गया था, लेकिन वह जनता समाजवादी पार्टी (जेएसपी) का समर्थन हासिल करने में नाकाम रहे। जेएसपी के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने देउबा को समर्थन का आश्वासन दिया था लेकिन पार्टी के एक और अध्यक्ष महंत ठाकुर ने इस विचार को खारिज कर दिया। निचले सदन में नेपाली कांग्रेस के पास 61 और प्रचंड की पार्टी के पास 49 सीटें हैं। इस प्रकार उनके पास 110 सीटें हैं, लेकिन बहुमत के आंकड़े से कम हैं। फिलहाल सरकार गठन के लिये 136 मतों की जरूरत है। सदन में जनता समाजबादी पार्टी की 32 सीटें हैं।


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