Thursday, 20 May 2021

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वॉशिंगटन कोरोना वायरस आज शायद दुनियाभर में सबसे बड़ी महामारी है लेकिन इससे पहले वैज्ञानिकों के सामने खतरनाक कीटाणुओं की लंबी लिस्ट रही है। ऐंटीबायॉटिक्स के ज्यादा इस्तेमाल से ऐसे जीवाणु विकसित होने का खतरा रहा है जिनपर दवाइयों का असर न हो लेकिन हाल ही में फंगस भी दवाओं को बेअसर करते मिले हैं। साइंटिफिक अमेरिकन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि Candida Auris नाम का फंगस अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में बना रहता है जो पहले से कमजोर मरीजों के लिए हानिकारक होता है। रिपोर्ट में मैरन मकेना ने लिखा है कि अमेरिका से पहले दूसरे देशों में इसका असर देखा गया। हर साल मलेरिया-टीबी से ज्यादा नुकसान दुनियाभर में हर साल 30 करोड़ से ज्यादा लोगों को फंगस से जुड़ी बीमारियां होती हैं और करीब 2.5 करोड़ लोगों को आंखों की रोशनी या जान जाने का खतरा रहता है। ग्लोबल ऐक्शन फंड फॉर फंगल इन्फेक्शन के आकलन के मुताबिक यह मलेरिया या टीबी से होने वाली मौतों से ज्यादा है। साल 2020 के अंत तक अमेरिका में 1,500 मामले थे। कोरोना के चलते दोनों के मिलकर ज्यादा नुकसान पहुंचाने की आशंका भी थी। क्यों होता है खतरनाक? कोरोना का इलाज करने के लिए दिए जा स्टेरॉइड्स के कारण इम्यून सिस्टम को दबाया जाता है। इस वजह से फंगस और दूसरे कीटाणुओं के कारण मरीजों में सुरक्षा नहीं रह जाती है। यही नहीं, ऐसे फंगस के कारण जमीन से लेकर उपकरण भी खराब होते हैं और मेडिकल केयर पर असर पड़ता है। पहले से ही दुनिया के कई इलाकों में पर्याप्त उपकरण और सेवाएं नहीं है। अगर उन्हें भी फंगस से नुकसान होता है तो सुरक्षा देने की चुनौती बढ़ जाएगी। म्यूकोरमाइकोसिस के इलाज के लिए एडमिट होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। महाराष्ट्र में म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) से अब तक 90 लोगों की मौत हो चुकी है। मध्य प्रदेश में 300 और राजस्थान में 1000 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं।


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