Wednesday, 26 May 2021

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इस्लामाबाद फ्रांसीसी राजदूत के निष्कासन वाले मुद्दे पर घिरी सरकार अब पूरी दुनिया को सफाई दे रही है। पाकिस्तान ने बुधवार को यूरोपीय संघ से कहा कि सरकार की नीति किसी भी सशस्त्र या दबाव समूह की शह पर नहीं होगी और ना ही उन्हें इसकी चुनौती देने की अनुमति दी जाएगी। कुछ सप्ताह पहले एक कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी ने देश में फ्रांसीसी दूत के निष्कासन की मांग को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद इमरान सरकार ने घुटने टेक दिए थे। क्या यूरोपीय संघ में झूठ बोलकर आए कुरैशी? विदेश मंत्री ने यूरोपीय संसद (ईपी) की विदेश मामलों की समिति (एएफईटी) को बताया कि हम हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद कट्टरपंथी समूहों के खिलाफ मजबूती से आगे बढ़े हैं। मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि किसी भी सशस्त्र या दबाव समूह को सरकार के फरमान को चुनौती देने और सरकार की नीति पर दबाव डालने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हालांकि पाकिस्तान की सच्चाई से पूरी दुनिया वाकिफ है कि कैसे इमरान सरकार ने तहरीक ए लब्बैक के चीफ को गिरफ्तारी के बाद चुपचाप गुप्त समझौता कर छोड़ दिया था। कट्टरपंथियों के हिंसक प्रदर्शन के आगे इमरान सरकार ने मानी थी हार उनका संबोधन ऐसे समय में आया है जब कुछ सप्ताह पहले तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने पाकिस्तान में हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद अप्रैल के मध्य में पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार ने टीएलपी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने और प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को रद्द करने के लिए संसद में एक प्रस्ताव पेश करने का वादा किया, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया। धार्मिक समूहों के दबाव में फ्रांसीसी राजदूत को निकालने का प्रस्ताव हुआ था पेश अंत में, इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के एक सदस्य द्वारा एक प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच मतभेदों के कारण संसद में कोई बहस नहीं हुई। स्पष्ट रूप से विरोध प्रदर्शनों और प्रस्ताव ने यूरोपीय संघ को नाराज कर दिया और उसकी संसद ने पाकिस्तान के लिए जीएसपी प्लस का दर्जा समाप्त करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पारित किया। जीपीएस प्लस देश को अपने कपड़ा उत्पादों को रियायती दरों पर बेचने की अनुमति देता है। ईशनिंदा कानूनों के बारे में भी हुई बात यूरोपीय संघ के प्रस्ताव में ईशनिंदा कानूनों के बारे में भी बात की गई जिसमें इस्लाम के पैगंबर का अपमान करने वाले को मौत की सजा देने का प्रावधान किया गया है। विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा कि कुरैशी ने ईशनिंदा कानूनों पर यूरोपीय संसद द्वारा पारित प्रस्ताव को लेकर निराशा व्यक्त की और इस्लाम के पैगंबर के लिए मुसलमानों की विशेष भावनाओं और सम्मान को समझने के महत्त्व पर जोर दिया। कुरैशी ने वहां भी अलापा कश्मीर का राग उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग दूसरों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं किया जा सकता है और जानबूझकर उकसावे तथा नफरत और हिंसा को उकसाने को सार्वभौमिक रूप से गैरकानूनी घोषित किया जाना चाहिए। कुरैशी ने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह विवाद दक्षिण एशिया में स्थायी शांति बनाने के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। आतंकी देश ने भारत पर लगाया उल्टा आरोप कुरैशी ने कहा कि उपयुक्त वातावरण तैयार करने का दायित्व भारत पर है क्योंकि पाकिस्तान कश्मीर के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। भारत पाकिस्तान को बता चुका है कि वह आतंकवाद, उग्रता एवं शांति से मुक्त वातावरण में इस्लामाबाद के साथ सामान्य पड़ोसी संबंध चाहता है। भारत कह चुका है कि आतंकवाद एवं उग्रता से मुक्त वातावरण तैयार करना पाकिस्तान का दायित्व है।


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