मैड्रिड विशाल गैलेक्सीज के बीच में पाए जाने वाले महाविशाल ब्लैक होल छोटी गैलेक्सीज की मदद करते हैं। ये छोटी गैलेक्सीज कई बड़ी गैलेक्सीज के चक्कर काटती हैं और इनका जीवनचक्र कुछ हद तक महाविशाल ब्लैक होल पर निर्भर करता है, खासकर उनसे निकलने वाली 'आंधी' पर। स्पेन के इंस्टिट्यूट ऑफ ऐस्ट्रोफिजिक्स केनरी आइलैंड में रिसर्चर इग्नेशियो मार्टिन-नवारो और उनके साथियों ने Sloan Digital Sky Survey की मदद से 1.24 लाख गैलेक्सीज का डेटा स्टडी किया और इसमें उन्हें उम्मीद से उलट नतीजे मिले। टीम यह देख रही थी कि इनमें से कितनी गैलेक्सीज में सितारे बनने बंद हो गए थे। इन पर महाविशाल ब्लैक होल के असर को स्टडी किया जा रहा था। कुछ सेंट्रल ब्लैक होल, जिन्हें ऐक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियाई (AGN) कहा जाता है, उनसे भारी ऊर्जा निकल रही थी और इसका असर पास की गैलेक्सीज पर पड़ रहा था। टीम ने पाया कि ऐसी गैलेक्सीज जो बड़ी गैलेक्सीज के प्लेन के पास चक्कर काट रही थीं, उनमें सितारे बनने की प्रक्रिया पूरी होने की ज्यादा संभावना थी बजाय उन गैलेक्सीज के जो किसी ऐंगल पर चक्कर काट रही हों। उम्मीद से उलट मिले नतीजे इग्नेशियो ने बताया है कि ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि जो सैटलाइट गैलेक्सीज बड़ी गैलेक्सी के प्लेन में नहीं थीं, उन्हें AGN से नुकसान होगा लेकिन इसका उल्टा असर देखा गया। माना जा रहा है कि सितारों के बनने के लिए जरूरी गैस को बाहर की ओर ब्लास्ट करने की जगह ब्लैक होल से निकली आंधियां ऐसे स्पेस के बबल बनाती हैं जो पास के इलाके से कम सघन होते हैं। जब सैटलाइट गैलेक्सीज इन बबल्स से गुजरती हैं तो वे धूल और गैस से टकराने से बच जाती हैं। इससे टकरान पर गैलेक्सी की जरूरी गैस खत्म हो सकती है जिससे सितारे बनते हैं। बजाय इसके, कम सघनता वाले स्पेस से गुजरने पर सैटलाइट का मटीरियल बना रहता है और सितारे भी बनते रहते हैं।
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