मॉस्को रूस के डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) ने मंगलवार को दावा किया है कि रूस की स्पूतनिक V (Sputnik-V) कोरोना वायरस वैक्सीन सबसे पहले भारत में मिले डेल्टा वेरियंट (Delta Variant Coronavirus) के खिलाफ ज्यादा असरदार है। दावा किया गया है कि किसी भी दूसरी वैक्सीन के मुकाबले इस ज्यादा संक्रामक और घातक वेरियंट के खिलाफ रूस की वैक्सीन ने सबसे ज्यादा असर दिखाया है। गमलेया सेंटर स्टडी अंतरराष्ट्रीय पियर-रिव्यू जर्नल में छपेगी। भारत में डॉ. रेड्डी लैब स्पूतनिक V का उत्पादन कर रही है और CoWIN पर इसका ऑप्शन भी दिया जा रहा है। इसे WHO ने तो मंजूरी नहीं दी है लेकिन भारत समेत 67 देशों में मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, पहले Pfizer-BioNTech और AstraZeneca की वैक्सीन्स को लेकर कई रिसर्च सामने आ चुकी हैं। कुछ में इन्हें असरदार बताया गया है तो कहीं कम शक्तिशाली। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेल्टा वेरियंट को 'चौथा चिंताजनक' वेरियंट करार दिया है और भारत में दूसरी लहर समेत कई देशों इसके कारण इन्फेक्शन तेजी से फैला है। ब्रिटेन में यह भी देखा गया है कि वहां मिले अल्फा वेरियंट के मुकाबले डेल्टा वेरियंट से इन्फेक्ट होने पर लोगों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत ज्यादा है। कैसे बनती है यह वैक्सीन? इसे कोल्ड-टाइप वायरस से बनाया जाता है। इस वायरस को इंजिनियर करके इससे होने वाला खतरा खत्म किया जाता है और फिर इसे कैरियर के तौर पर इस्तेमाल करके शरीर में कोरोना वायरस का एक हिस्सा पहुंचाया जाता है। इम्यून सिस्टम वायरस के जेनेटिक कोड को पहचानता है और बिना बीमार पड़े उससे लड़ता है। इससे शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ खास ऐंटीबॉडी बनती हैं। खास बात यह है कि Sputnik की पहली और दूसरी खुराक में अलग-अलग वेक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। रिसर्चर्स का कहना है कि अलग-अलग वेक्टर के इस्तेमाल से इम्यून रिस्पॉन्स ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक बरकरार रहने वाला होता है।
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