साल 2017 धरती के करीब से गुजरा इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट Oumuamua आखिर क्या है? कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अंतरिक्ष की कोई चट्टान है, तो कोई इसे एलियन टेक्नॉलजी का नूमना बताता है। अब एक नई स्टडी में येल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बताया है कि यह न चट्टान है और न एलियन्स का सबूत बल्कि डीप स्पेस से आया एक हिमखंड है। रिसर्च में कहा गया है कि यह 3.5 करोड़ साल पुराना हाइड्रोडन का हिमखंड है। यह चट्टान करीब 4 साल से एक गुत्थी बनी हुई है क्योंकि इसके जैसा स्पेस ऑब्जेक्ट पहले कभी नहीं देखा गया था।इससे पहले हारवर्ड यूनिवर्सिटी के प्रफेसर Avi Loeb ने दावा किया था कि 19 अक्टूबर, 2017 को देखी गई स्पेस रॉक Oumuamua दरअसल एलियन लाइफ का सबूत थी। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के PAN-STARRS1 टेलिस्कोप ने इसे देखा था।

साल 2017 धरती के करीब से गुजरा इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट Oumuamua आखिर क्या है? कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अंतरिक्ष की कोई चट्टान है, तो कोई इसे एलियन टेक्नॉलजी का नूमना बताता है। अब एक नई स्टडी में येल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बताया है कि यह न चट्टान है और न एलियन्स का सबूत बल्कि डीप स्पेस से आया एक हिमखंड है। रिसर्च में कहा गया है कि यह 3.5 करोड़ साल पुराना हाइड्रोडन का हिमखंड है। यह चट्टान करीब 4 साल से एक गुत्थी बनी हुई है क्योंकि इसके जैसा स्पेस ऑब्जेक्ट पहले कभी नहीं देखा गया था।
कैसे बना Oumuamua?

प्री-प्रिंट जर्नल Arxiv में छपी इस रिसर्च में बताया गया है कि यह ऑब्जेक्ट एक विशाल मॉलिक्युलर बादल (GMC) से पैदा हुआ था। यहीं से हाइड्रोजन जैसे मॉलिक्यूल बनते हैं। ज्यादातर दूसरी जगहों पर सिर्फ आयनाइज्ड गैस होती है। ब्रह्मांड में हाइड्रोजन सबसे ज्यादा मात्रा में पाई जाती है लेकिन हाइड्रोजन की बर्फ दुर्लभतम ही होती है। इसे GMC जैसी जगहों पर ही ऐसा तापमान मिलता है।
स्टडी में वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगर ऐसा कोई फिजिकल असोसिएशन मुमकिन है तो हम उम्मीद करती हैं कि Oumuamua का रास्ता उससे होकर गुजरेगा। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि अगर यह एक धूमकेतु जैसा ऑब्जेक्ट प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क से निकला हो या GMC से ही बना हो।
तेज गति के पीछे क्या वजह?

एक्सपर्ट्स ने Carina-Near और Columba- इन दो असोसिएशन को ऐसा GMC बताया है जिनसे यह निकला हो सकता है। उनका कहना है कि Carina के दूसरे सदस्यों के साथ Oumuamua का मोशन तालमेल में है। दोनों GMC डीप स्पेस में धरती से 10-16 करोड़ लाइट इयर दूर हैं। इसके आकार के आधार पर जमी हुई हाइड्रोजन से बने होने का संकेत भी मिलता है। यह सिगार जैसा दिखता था। उनका यह भी कहना है कि हाइड्रोजन आइस के कारण इसे इतनी तेज गति से बढ़ने के लिए सिर्फ कुछ ही मात्रा की जरूरत होगी। इससे पहले येल की रिसर्च में ही पाया गया था कि इसमें हाइड्रोजन आइस मौजूद थी।
एलियन तकनीक का नूमना?

इससे पहले हारवर्ड यूनिवर्सिटी के प्रफेसर Avi Loeb ने दावा किया था कि 19 अक्टूबर, 2017 को देखी गई स्पेस रॉक Oumuamua दरअसल एलियन लाइफ का सबूत थी। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के PAN-STARRS1 टेलिस्कोप ने इसे देखा था। सिगार के आकार का ये ऑब्जेक्ट 1.96 लाख मील प्रतिघंटा की रफ्तार से धरती के करीब से गुजरा था और इसे धूमकेतु या ऐस्टरॉइड माना गया था। सबसे बड़ा दावा जो ऐवी इसके एलियन लाइफ के सबूत के तौर पर देते हैं, वह है सूरज के गुरुत्वाकर्षण का असर। उन्होंने बताया कि सूरज के करीब जाने पर स्पेस ऑब्जेक्ट्स की रफ्तार तेज हो जाती है और दूर जाने पर धीमी। हालांकि, Oumuamua के साथ ऐसा नहीं हो रहा था।
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