टोक्यो की खोज भले ही अभी जारी हो, कुछ वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि लाल ग्रह पर इंसान बच्चे जरूर पैदा कर सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मंगल पर स्पर्म 200 साल तक रह सकता है। एक्सपर्ट्स को अभी तक लगता था कि स्पेस के रेडिएशन से हमारा DNA खराब हो जाएगा और प्रजनन नामुमकिन लेकिन इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन पर 6 साल तक चूहे का स्पर्म रखा रहने के बाद भी स्वस्थ पाया गया। इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन पर रखे गए सैंपल 66 चूहों से लिए गए सैंपल्स को 2012 में 30 से ज्यादा ग्लास ऐंप्यूल्स में रखा गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने सबसे बेहतर सैंपल से बच्चे को पैदा करने का फैसला किया। 4 अगस्त, 2013 को 3 सैंपल्स को ISS के लिए लॉन्च किया गया और तीन को जापान के सुकूबा में वैसी ही कंडीशन्स में रखा गया जिनमें कई रेडिएशन शामिल थे। रेडिएशन का फर्क नहीं पहला बॉक्स 19 मई, 2014 को वापस लाया गया और सैंपल के अनैलेसिस के बाद प्रॉजेक्ट जारी रखा गया। दूसरा बॉक्स 11 मई, 2016 को लाया गया। तीसरा 3 जून, 2019 को लौटा। धरती पर लौटने के बाद टीम ने RNA सीक्वेंसिंग की मदद से देखा कि सैंपल्स में कितना रेडिएशन पहुंचा है। उन्होंने पाया कि ISS ट्रिप से स्पर्म के न्यूक्लियस पर फर्क नहीं होता है। धरती पर रखे बॉक्स भी जापान की यामानाशी यूनिवर्सिटी पहुंचाए गए। ड्राई-फ्रीज करके भेजे गए स्पर्म को रीहाइड्रेट किया गया और फिर फ्रेस ओवरी सेल्स में इंजेक्ट किया गया। प्रफेसर सयाका वकायमा के मुताबिक जेनेटिक रूप से कई सामान्य बच्चे पैदा हुए। उनमें कोई डिफेक्ट नहीं पाया गया। प्रफेसर सयाका ने इसे मानव सभ्यता के लिए अहम खोज बताया है। यह स्टडी 'साइंस अडवांसेज' जर्नल में छपी है।
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