वॉशिंगटन भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री ने चीन की तालिबान के साथ बैठक पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ भी तालिबान के बढ़ती ताकत को लेकर बातचीत की है। हाल के दिनों में तालिबान के लड़ाकों ने अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी के बाद सेना पर हमले भी तेज कर दिए हैं। एक रिपोर्ट में यहां तक दावा किया गया है कि अफगानिस्तान के 90 फीसदी बॉर्डर पोस्ट पर तालिबान का कब्जा हो चुका है। अमेरिका ने बताया सकारात्मक कदम एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को तियानजिन में चीनी विदेश मंत्री वांग यी और तालिबान के राजनीतिक नेतृत्व के बीच बातचीत का स्वागत करते हुए इस बैठक को सकारात्मक बात बताया। सीएनएन-न्यूज 18 से बात करते हुए ब्लिंकन ने कहा कि संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान में हर किसी की रुचि है और इसके फलस्वरूप किसी प्रकार की सरकार जो उभरती है वह वास्तव में प्रतिनिधि और समावेशी है। उन्होंने कहा कि इसलिए यदि चीन उन हितों पर काम कर रहा है, यदि अन्य देश उन हितों पर काम कर रहे हैं, तो यह एक सकारात्मक बात है। अफगानिस्तान के सैन्य अधिग्रहण के पक्ष में कोई नहीं ब्लिंकन ने यह भी माना कि कोई भी शक्ति, चाहे वह अमेरिका, चीन, रूस, भारत या मध्य एशियाई देश हो, तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के सैन्य अधिग्रहण का पक्षधर नहीं है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी गृहयुद्ध में पड़ने में किसी की कोई दिलचस्पी नहीं है ... हर किसी को संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान में दिलचस्पी है और ऐसे में किसी प्रकार की सरकार उभरती है जो वास्तव में प्रतिनिधि और समावेशी है। भारतीय नेताओं के साथ ब्लिंकन ने की बात अमेरिकी विदेश मंत्री 27 जुलाई की शाम को दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ बैठकें की। इस दौरान अमेरिका और भारत के बीच क्षेत्रीय हालात, दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों में और मजबूती, तालिबान के बढ़ते प्रभाव, हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी समेत कई द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई। चीनी विदेश मंत्री से तालिबान नेता ने की मुलाकात तालिबान के राजनीतिक समिति के प्रमुख मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के नेतृत्व में नौ सदस्यीय तालिबानी प्रतिनिधिमंडल चीन पहुंचा था। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तालिबान के नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर से बुधवार को मुलाकात की और आतंकी समूह की प्रशंसा करते हुए अफगानिस्तान में उसे अहम सैन्य और राजनीतिक ताकत करार दिया। इसके साथ ही चीन ने तालिबान से सभी आतंकवादी समूहों से संपर्क तोड़ने को कहा। चीन ने खासतौर पर शिनजियांग के उइगर मुस्लिम चरमपंथी समूह ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट को सहयोग न करने की अपील की। तालिबान ने चीन को भरोसेमंद दोस्त बताया, मांगी मदद बातचीत के दौरान तालिबान ने चीन को भरोसेमंद दोस्त बताया और आश्वस्त किया कि समूह अफगानिस्तान के क्षेत्र का इस्तेमाल किसी को भी करने की इजाजत नहीं देगा। अफगानिस्तान से अमेरिका और नाटो के बलों की वापसी के बीच तालिबान और चीन के मध्य यह पहली बैठक है। तालिबान ने सरकारी बलों के कब्जे वाले काफी क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया है जिससे चीन चिंतित हो रहा था कि उसके अस्थिर शिनजियांग प्रांत के उइगर आतंकवादी समूह, ईस्ट तुर्कीस्तान इस्लामिक मूवमेंट अफगान सीमा से घुसपैठ कर सकते हैं।
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