वॉशिंगटन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने सूर्य की सतह पर होने वाली घटनाओं का अद्भुत नजारा जारी किया है। नासा के इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए गए इस वीडियो को पिछले 15 घंटे में 35 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा है। नासा के इस वीडियो में सूर्य की सतह पर एक कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) को दिखाया गया है। सौर प्लाज्मा की ये विशाल तरंगें अंतरिक्ष में अरबों कणों को लगभग 10 लाख मील या 1600000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से शूट करती हैं। सूर्य पर दिखा कोरोनल मास इजेक्शन नासा ने इस तस्वीर को शेयर कर लिखा कि सौर मंडल की हमारी समीक्षा? एक सितारा। लेकिन यह एक कमाल का सितारा है। हमारे सूर्य की यह तस्वीर एक कोरोनल मास इजेक्शन या सीएमई की है जो इसकी सतह से निकलती हुई दिखाई देती है। नासा ने बताया कि 2013 में हमारे सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (एसडीओ) ने अत्यधिक पराबैंगनी प्रकाश में इस विशेष सीएमई को देखा था, लेकिन यह पृथ्वी की ओर नहीं गया। नासा ने बताया- सीएमई धरती के लिए कैसे खतरनाक सूर्य की सतह पर विकिरण के शक्तिशाली विस्फोट से बने ये सोलर फ्लेयर्स अस्थायी रूप से संचार और नेविगेशन ब्लैकआउट का कारण बन सकते हैं। इससे बिजली लाइने ट्रिप होकर काम करना बंद कर सकती हैं। जिससे पूरी दुनिया के कई हिस्सों में बिजली का प्रवाह रुक जाएगा। नासा ने आगे कहा कि राहत की बात है कि सौर वेधशालाओं का हमारा जाल अंतरिक्ष मौसम के इन आकर्षक घटकों को ट्रैक करने में हमारी सहायता करता है। इसी कारण पृथ्वी पर व्यवधान बिलकुल ही कम है। नासा ने यूजर के कमेंट का दिया जवाब इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक इंस्टाग्राम यूजर ने पूछा कि क्या यह सच्ची फुटेज है। जिस पर नासा ने जवाब दिया, 'हां! हमारी सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने इसे एक लाइट फिल्टर के साथ कैप्चर किया। यह अंतरिक्ष यान सूर्य की परिक्रमा करता है और उसकी गतिविधि पर नजर रखता है ताकि हम इसे बेहतर ढंग से समझ सकें। सोशल मीडिया पर बहुत से यूजर्स ने इस नजारे की बड़ाई की है। सौर तूफान भी कम खतरनाक नहीं सूरज की सतह से पैदा हुए सौर तूफान भी कम खतरनाक नहीं होते हैं। सौर तूफान के कारण धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है जिसका सीधा असर सैटलाइट्स पर हो सकता है। इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है। पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।
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