Monday, 2 August 2021

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संयुक्‍त राष्‍ट्र दुनिया की सबसे शक्तिशाली संस्‍था संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का अध्‍यक्ष बनते ही भारत ने जम्‍मू-कश्‍मीर पर अपने सख्‍त रुख से दुनिया को स्‍पष्‍ट संकेत दे दिया है। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का अध्‍यक्ष बनने पर आयोजित एक संवाददाता सम्‍मेलन में भारतीय राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने एक पाकिस्‍तानी पत्रकार के कश्‍मीर का मुद्दा उठाने पर उन्‍हें पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (POK) की याद दिलाकर बोलती बंद कर दी। तिरुमूर्ति ने कहा कि पीओके के दर्जे में बदलाव के लिए उसे खाली करने की जरूरत है। अगस्‍त महीने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के अध्‍यक्ष बने भारतीय राजदूत तिरुमूर्ति ने एक बार फिर से स्‍पष्‍ट कर दिया कि जम्‍मू-कश्‍मीर भारत का अभिन्‍न और अविभाज्य अंग है। उन्‍होंने यह भी कहा कि अगर किसी के दर्जे में किसी परिवर्तन की जरूरत है तो वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को खाली करने से जुड़ी है। वर्ष 2021-22 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य भारत ने पारी के आधार पर अगस्त महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र के इस शक्तिशाली अंग की अध्यक्षता संभाली है। 'जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य अंग' सुरक्षा परिषद के ‘प्रोग्राम ऑफ वर्क’ पर यहां संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद निरोधक एवं शांति के अहम विषयों पर प्रमुख कार्यक्रमों की मेजबानी करेगा। जम्मू कश्मीर और वहां अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाए जाने के बारे में पाकिस्‍तानी पत्रकार के पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘शुरू में ही मैं कुछ बातें बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य अंग है । मैं समझता हूं कि इसे स्वीकार कर लेना ही जरूरी है। और जम्मू कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश से जुड़े मुद्दे भारत के अंदरूनी विषय हैं। परिषद, जब भी उसके सामने यह विषय उठाया गया तब, करीब उसके सभी सदस्य इसपर सहमत रहे कि यह मुद्दा परिषद के लिए चर्चा का विषय नहीं है।’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस द्वारा जम्मू कश्मीर की स्थिति पर आठ अगस्त, 2019 को दिए गए बयान के बारे में एक अन्य सवाल पर तिरुमूर्ति ने कहा, ‘जैसा कि मैंने आपसे कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य अंग है। यदि किसी के दर्जे में किसी परिवर्तन की जरूरत है तो वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को खाली करने से जुड़ी है।’ महासचिव ने 2019 में 1972 के शिमला समझौते को याद किया था जिसमें कहा गया है कि जम्मू कश्मीर के अंतिम दर्जे का निर्धारण संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार शांतिपूर्ण माध्यमों से किया जाएगा।


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