Monday, 2 August 2021

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नाइजीरिया के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर लागोस में बारिश के मौसम के दौरान गाड़ियों से लकर घरों के अंदर तक पानी भरा रहता है। यहां हर साल एक-दो हफ्ते नहीं, मार्च से लेकर नवंबर तक बाढ़ जैसे हालात हो जाते हैं। इसकी वजह से हर साल 4 अरब डॉलर का नुकसान हो जाता है। इस साल जुलाई में हाल के सालों में सबसे ज्यादा भयानक बाढ़ आई है। वैज्ञानिकों को डर है कि सदी के आखिर तक इस शहर में हालात ऐसे हो जाएंगे कि यहां जीना नामुमकिन हो जाएगा। इसके पीछे वजह है जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता समुद्रस्तर।

एक और स्टडी के मुताबिक निचले इलाकों में बसे तटीय शहर 2100 तक पूरी तरह से पानी में समा सकते हैं। क्लाइमेट सेंट्रल की इस स्टडी में कहा गया है कि अगर समुद्रस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो ये शहर हाई टाइड लाइन के नीचे डूब सकते हैं।


अफ्रीका का सबसे बड़ा शहर हो जाएगा सुनसान? वैज्ञानिकों को खतरा, कहीं समुद्र के नीचे डुबो न दे विनाशकारी बाढ़

नाइजीरिया के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर लागोस में बारिश के मौसम के दौरान गाड़ियों से लकर घरों के अंदर तक पानी भरा रहता है। यहां हर साल एक-दो हफ्ते नहीं, मार्च से लेकर नवंबर तक बाढ़ जैसे हालात हो जाते हैं। इसकी वजह से हर साल 4 अरब डॉलर का नुकसान हो जाता है। इस साल जुलाई में हाल के सालों में सबसे ज्यादा भयानक बाढ़ आई है। वैज्ञानिकों को डर है कि सदी के आखिर तक इस शहर में हालात ऐसे हो जाएंगे कि यहां जीना नामुमकिन हो जाएगा। इसके पीछे वजह है जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता समुद्रस्तर।



रेत के खनन ने हालात किए बदतर
रेत के खनन ने हालात किए बदतर

इंस्टिट्यूट ऑफ डिवेलपमेंट स्टडीज के मुताबिक खराब ड्रेनेज सिस्टम और बेलगाम बढ़ते शहरीकरण के कारण ये हालात बदतर हुए हैं। नाइजीरिया की हाइ्रोलॉजिकल एजेंसी NIHSA ने भविष्य में संकट बढ़ने की आशंका जताई है जब बारिश का मौसम अपने चरम पर होता है। लागोस का तट धीरे-धीरे खत्म हो रहा है जिसकी वजह से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं के मुताबिक यहां रेत के खनन के चलते तट को नुकसान पहुंचा है। वहीं, समुद्रस्तर के बढ़ने से पानी टापू के अंदर दाखिल होने लगा है।



सदी के आखिर तक हो जाएगा खत्म?
सदी के आखिर तक हो जाएगा खत्म?

एक और स्टडी के मुताबिक निचले इलाकों में बसे तटीय शहर 2100 तक पूरी तरह से पानी में समा सकते हैं। क्लाइमेट सेंट्रल की इस स्टडी में कहा गया है कि अगर समुद्रस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो ये शहर हाई टाइड लाइन के नीचे डूब सकते हैं। इन इलाकों में आज 20 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं। सदी के आखिर तक समुद्रस्तर के 2 मीटर से ज्यादा बढ़ने की आशंका है। लागोस भी इसकी जद में आता है।



तबाही के कई कारण
तबाही के कई कारण

पिछले साल 20 लाख से ज्यादा लोगों को बाढ़ से तबाही झेलनी पड़ी थी। करीब 70 लोगों की मौत हो गई थी जबकि उससे पहले 2019 में 158 लोगों की जान गई थी और तबाही का असर दो लाख से ज्यादा लोगों पर हुआ था। स्थानीय लोगों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ खराब ड्रेनेज व्यवस्था इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार है। यही नहीं, वेटलैंड्स को खतम करके इमारतें खड़ी की गईं, जिसका नतीजा आज लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सरकार ने जरूरी कदम नहीं उठाए तो आने वाली विभीषिका को रोका नहीं जा सकेगा।





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