जिनेवा के महानिदेशक टेड्रोस ए गेब्रेयेसस को दूसरे कार्यकाल के लिए नामित किया गया है। इथियोपिया के टेड्रोस गेब्रेयेसस को जर्मनी और फ्रांस ने नामित किया है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के शीर्ष पद के लिए किसी उम्मीदवार को उनके अपने देश ने नामित नहीं किया है। गेब्रेयेसस पर अमेरिका ने चीन के साथ नजदीकियों के आरोप भी लगाए थे। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन ने उस समय डब्लूएचओ से नाता तोड़ लिया था। मई 2022 में होगा नए WHO चीफ का चुनाव टेड्रोस, पिछले 19 महीनों के दौरान कोरोना वायरस महामारी का मुकाबला करने में विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोशिशों को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा में रहे हैं। अगले डब्ल्यूएचओ महानिदेशक का चुनाव वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी की मई 2022 में होने वाली अगली वार्षिक सभा की बैठक में होगा। महानिदेशक का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है। जिनेवा में फ्रांस और जर्मनी के राजनयिक मिशन ने ट्विटर पर डब्ल्यूएचओ प्रमुख पद के लिए टेड्रोस का समर्थन करने की घोषणा की। टेड्रोस के दोबारा नियुक्त होने की संभावना ज्यादा जिनेवा में एक राजनयिक अधिकारी ने बताया कि यूरोपीय संघ के 15 अन्य सदस्यों ने भी टेड्रोस को नामित किये जाने का समर्थन किया है। डब्ल्यूएचओ ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि उम्मीदवारों की पूरी सूची की घोषणा नवंबर तक करने की उसकी योजना नहीं है। कुछ राजनयिक अधिकारियों ने बताया कि टेड्रोस की इस पद के लिए किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं हो सकती है। ट्रंप प्रशासन ने बताया था चीन का करीबी उल्लेखनीय है कि टेड्रोस के नेतृत्व के तहत डब्ल्यूएचओ को पिछले साल अमेरिका के ट्रंप प्रशासन से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था। दरअसल, स्वास्थ्य एजेंसी पर वुहान में कोविड-19 की उत्पत्ति होने के बाद महामारी से निपटने के चीन के शुरूआती प्रयासों की बढ़-चढ़ कर सराहना करने के आरोप लगे थे। जिसके बाद गुस्साए अमेरिका ने डब्यूएचओ को छोड़ दिया था। चीन के प्रयासों से टेड्रोस बने थे WHO चीफ? विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस ने 2017 में डब्लूएचओ की कमान संभाली थी। कहा जाता है कि उन्हें यह पद चीन के पैरवी करने के कारण मिला था। इसलिए वह चीन परस्त फैसले ले रहे हैं। टेड्रोस पहले अफ्रीकी हैं जो WHO के चीफ बने हैं। WHO को कैसे मिलता है फंड विश्व स्वास्थ्य संगठन को फंड दो तरीकों से मिलता है, पहला- असेस्ड कंट्रीब्यूशन और दूसरा- वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन। इन दोनों तरीकों से मिले फंड से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन का खर्च चलता है। असेस्ड कंट्रीब्यूशन इस फंड को विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देश देते हैं। यह पहले से ही निश्चित होता है कि कौन सा देश कितना फंड देगा। इस फंड का निर्धारण उस देश की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के आंकड़ों के जरिए किया जाता है। असेस्ड कंट्रीब्यूशन के जरिए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को सबसे ज्यादा फंडिंग मिलती है। इससे WHO अपने खर्च और प्रोग्राम की फंडिंग करता है। वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन यह फंड एक निश्चित प्रोग्राम को लेकर दिए जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस फंड का इस्तेमाल केवल उन्हीं काम में करता है जिसके नाम पर यह फंड मिला होता है। जैसे कोरोना वायरस की दवा बनाने के लिए WHO को अगर किसी संस्था या देश से फंड मिला है तो वह केवल इस वैक्सीन को बनाने में ही इस फंड को खर्च कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी फंडिंग विश्व स्वास्थ्य संगठन को दुनिया में सबसे ज्यादा फंडिंग अमेरिका से मिलती है। अमेरिका इस संगठन को असेस्ड और वॉलेंटरी दोनों प्रकार के फंड उपलब्ध करवाता है। रिपोर्ट के अनुसार, WHO के असेस्ड फंड का 22 फीसदी हिस्सा अकेले अमेरिका देता है। (एजेंसी से इनपुट के साथ)
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