लंदन ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज एसएएस को महाशक्तिशाली राइफल से लैस किया गया है। यह राइफल इतनी शक्तिशाली है कि एक गोली से आसमान में उड़ते हेलिकॉप्टर को जमीन पर गिरा सकती है। इतना ही नहीं, यह राइफल अपने एक वार में किसी भी आर्मर्ड प्लेटेड गाड़ी को उड़ाने में सक्षम है। इस राइफल का नाम गेपार्ड जीएम6 लिंक्स () बताया जा रहा है। हंगरी में बनी इस राइफल की रेंज 2 किमी डेली मेली की रिपोर्ट के अनुसार, गेपार्ड जीएम6 लिंक्स राइफल की तुलना इसकी विनाशकारी प्रभावकारिता के कारण हॉवित्जर तोप से की जा रही है। इतनी तबाही मचाने वाले इस राइफल का वजन मात्र साढ़े 10 किलोग्राम है। इस राइफल की लंबाई 4 फीट से भी कम बताई जा रही है। हंगरी में निर्मित इस सेमी ऑटोमेटिक राइफल की रेंज 2 किलोमीटर तक बताई जा रही है। राइफल की नली तोप के गन की तरह करती है काम इस राइफल का बैरल किसी तोपखाने की गन की तरह रिक्वॉयल (झटके) को सहने के लिए फायरिंग के तुरंत बाद बंदूक के अंदर समा जाता है। राइफल के रिक्वॉयल को कम करने की यह तकनीक पहली बार किसी हैवी राइफल में इस्तेमाल की गई है। राइफल का रिक्वॉयल उसकी गोली के आकार पर निर्भर करता है। राउंड जितना बड़ा होगा उस बंदूक की रिक्वॉयल भी उतनी ही ताकतवर होगी। आर्मर्ड ट्रक को भेद सकती है इसकी गोली रिपोर्ट में के एक मेंबर के हवाले से बताया गया है कि GM6 शानदार है। यह तोपखाने के टुकड़े को लेकर युद्ध में जाने जैसा है। सैनिक इसे होवित्जर कहते हैं। यह दुश्मन पर बहुत भारी पंच है। यह जो राउंड फायर करता है उससे किसी हैवी आर्मर्ड ट्रक को भी रोका जा सकता है। इस राइफल से लैस टीम आधा दर्जन बेहद महंगे लड़ाकू विमानों या हेलिकॉप्टरों को रोकने में सक्षम है। एक राइफल की कीमत 9 लाख रुपये से ज्यादा GM6 राइफल की कीमत 9 लाख 11 हजार रुपये है। आकार में छोटी होने के कारण इसे जंग के मैदान में लेकर जाना भी काफी आसान है। इसे जंग के दौरान पैराशूट के सहारे भी लेकर जाया जा सकता है। इस राइफल में .50 कैलिबर रॉफॉस एमके 2 बुलेट का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी एक मैगजीन में ऐसी पांच गोलियां होती हैं। इन पांच गोलियों को यह राइफल मात्र तीन सेकेंड में फायर कर सकता है। ब्रिटेन ने खरीदी GM6 की 150 राइफल माना जा रहा है कि ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज, स्पेशल बोट सर्विस (SBS) और स्पेशल रिकॉनसेंस रेजिमेंट के लिए ऐसी 150 राइफलों को खरीदा गया है। यह भी दावा किया गया है कि इन हथियारों को सीरिया और इराक में तैनात किया जा चुका है। हालांकि, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने ऐसे किसी दावे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
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