Tuesday, 28 September 2021

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पेइचिंग चीनी ड्रैगन ने एक बार फिर से भारत के खिलाफ उकसावे वाली कार्रवाई की है। चीनी सेना पीएलए के करीब 100 सैनिकों ने लद्दाख के बाद अब उत्‍तराखंड के बाराहोती इलाके में करीब 5 किमी अंदर तक घुसपैठ को अंजाम दिया है। पिछले महीने हुई इस घटना में चीनी सैनिकों ने भारतीय इलाके में बने एक पुल और कुछ अन्‍य आधारभूत ढांचे को नष्‍ट कर दिया। दरअसल, चीनी सैनिकों ने इस घुसपैठ की लंबे समय से प्‍लानिंग कर रखी थी। यही नहीं पीएलए ने घटनास्‍थल से मात्र 70 किमी की दूरी पर अपना नया सैन्‍य ठिकाना बना लिया है। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस अनैलिस्ट Detresfa की ओर से जारी सैटलाइट तस्वीरों साफ दिखाई दे रहा है कि चीनी सैन्‍य ठिकाना भारत से लगती वास्‍तविक नियंत्रण रेखा से मात्र 70 किमी दूर स्थित है। चीन ने नेपाल-भारत के ट्राइजंक्‍शन पर इस नए सैन्‍य ठिकाने को बनाया है। इसमें पीएलए सैनिकों के लिए नए बैरक भी शामिल हैं। चीन का यह नया सैन्‍य ठिकाना करीब 4 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह सैन्‍य अड्डा तिब्‍बत के जांडा काउंटी में स्थित है। चीन ने वर्ष 2019 में इस इलाके में निर्माण कार्य शुरू किया था। पीएलए की यह पोस्‍ट पैंगोंग झील से 250 किमी दूर स्थित पीएलए के इस सैन्‍य अड्डे का सबसे नजदीकी एयरबेस नागरी गुंसा है और यह पैंगोंग झील से 250 किमी दूर स्थित है। पीएलए की यह पोस्‍ट 0.166 वर्ग किमी इलाके में स्थित है। चीन ने भारत से लगते एलएसी पर अपनी ताकत बढ़ाने के लिए इस पीएलए पोस्‍ट का निर्माण किया है। अब यहां पर बड़े पैमाने पर चीनी सैनिक तैनात हैं। पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी पर हो रही सकारात्मक प्रगति के बीच उत्तराखंड के इस इलाके में चीन के अतिक्रमण की कोशिश ने खतरे की घंटी बजा दी है। उत्‍तराखंड के बाराहोती इलाके में पहले भी चीन की ओर से घुसपैठ की जाती रही है। सितंबर 2018 में भी ऐसी खबर आई थी कि चीनी सैनिकों ने यहां 3 बार घुसपैठ की थी। 1954 में यह पहला इलाका था, जहां चीन के सैनिकों ने घुसपैठ की थी और बाद में दूसरे इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश हुई और फिर 1962 की जंग लड़ी गई थी। 30 अगस्त को हुई इस घटना में फेस-ऑफ की स्थिति पैदा नहीं हुआ क्योंकि जब तक भारतीय सैनिकों से उनका सामना होता PLA सैनिक वापस हो चुके थे। तुन जुन ला पास पारकर 55 घोड़े, 100 से ज्यादा चीनी सैनिक घुसे सुरक्षा सूत्रों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि तुन जुन ला पास पारकर 55 घोड़े और 100 से ज्यादा सैनिक भारतीय क्षेत्र में 5 किमी से ज्यादा अंदर आ गए थे। पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में पीएलए की ओर से घुसपैठ की मामूली घटनाएं ही हुई हैं। पिछली बार जुलाई में हुआ था, इसके बाद नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ गई थीं। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव पहले से ही बना हुआ है। सरकारी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि चीन के सैनिक सेना के घोड़ों के साथ तुन जुन ला पास पार करके बाराहोती के करीब चारागाह पर आ गए थे। ऐसा माना जा रहा है कि चीनी सैनिकों का यह ग्रुप करीब तीन घंटे तक रहा। चूंकि यह इलाका असैन्यीकृत क्षेत्र (जहां सैनिक नहीं होते हैं) है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पीएलए सैनिकों की मौजूदगी सुरक्षा प्रतिष्ठानों के लिए चिंता की बात है। सूत्रों ने बताया कि स्थानीय लोगों ने इस घुसपैठ की जानकारी दी जिसके बाद ITBP और सेना की टीम इसकी पुष्टि के लिए वहां फौरन पहुंच गई। हालांकि भारतीय गश्ती दल के पहुंचने से पहले चीनी सैनिक इलाका खालीकर लौट चुके थे।


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