
काबुल अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के साथ ही आखिर तक अमेरिकी सैनिकों का ठिकाना बना रहा। देश में फंसे लोग इसी रास्ते से जान बचाकर भागने की कोशिश करते रहे। अमेरिका के हाथ इसकी सुरक्षा का जिम्मा रहा और अब उसके जाने के बाद सबसे पहला विमान कतर ने यहां उतारा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान ने इसके लिए गुजारिश की थी और मानवीय सहायता के लिए देश से आने-जाने को कतर ने यह मदद भेजी है। दरअसल, कतर से एक तकनीकी टीम हवाईअड्डे पर ऑपरेशन शुरू करने के लिए आई है। दूसरी ओर, तालिबान और पंजशीर घाटी में जुटे Northern Alliance के नेताओं के बीच बातचीत विफल होने से स्थिति अभी भी साफ नहीं हुई है। 'जंग का साथ न दें' तालिबान की ओर से मुल्ला आमिर खान मोताकी ने बताया है कि पंजशीर में आदिवासी बुजुर्गों और नेताओं के साथ बातचीत विफल हो गई है। उन्होंने प्रांत के लोगों से अपने नेताओं को प्रेरित करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि यह दुर्भाग्य की बात है कि जब पूरा अफगानिस्तान साथ है तो पंजशीर अभी भी विरोध कर रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ऐसी ताकतों का समर्थन न करें जो जंग चाहती हैं। दूसरे देशों की सीमा पर खड़े अफगान नागरिक अफगानिस्तान से निकलने को काबुल एयरपोर्ट के रास्ते बंद होने के बाद लोग सीमा पर पहुंचने लगे हैं। अब वे इरान, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों से लगीं सीमाओं के रास्ते तालिबान के साये से बचने की कोशिशें की जा रही हैं। एक पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक तोरखाम सीमा पर अफगान की ओर लोग इंतजार में खड़े हैं कि गेट खुले और उन्हें अंदर आने को मिल सके। वहीं, ईरान से जुड़े इस्लाम काला पोस्ट पर भी हजारों की भीड़ है।
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